जब जब हिंदू राममंदिर को देखेगा, तब तब कल्याण सिंह की भी हिंदुओं को याद आयेगी।

        हिन्दुओं के बादशाह और बीजेपी नेता कल्याण सिंह जी अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनकी बहुत दिनों से तबियत बिगड़ी हुई थी और 4 जुलाई को लखनऊ पीजीआई में भर्ती किया गया था। तब से वह अस्पताल में भर्ती थे। लेकिन आज 21 तारीख को उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली। 


     कल्याण सिंह हिंदुओं के नेता थे। वह बाबरी विध्वंस के समय यूपी के मुख्यमंत्री थे। जब एक अक्रोशित भीड़ ने बाबरी मस्जिद पर पहुंची और उसने बाबरी मस्ज़िद का विध्वंस कर दिया।

     तब यूपी और अयोध्या में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी यूपी सरकार और यूपी पुलिस की थी तथा सरकार के मुखिया होने के नाते कानून व्यवस्था उनकी भी जिम्मेदारी थी। 

      कल्याण सिंह जी की राज्य में सरकार थी और केंद्र में कांग्रेस की। केंद्र सरकार ने कल्याण सिंह को अयोध्या में पुलिस बल का प्रयोग करने को कहा। लेकिन कल्याण सिंह ने इसको यह कहते मना कर दिया कि वहां बहुत सारे लोग हैं और पुलिस बल का प्रयोग कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के बजाय बिगाड़ देगा। 

    कल्याण सिंह ने  केंद्र सरकार को कारसेवकों पर गोली चलाने से साफ इंकार कर दिया और तब तक कारसेवकों ने 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर दिया। जिसके बाद कल्याण सिंह ने कानून व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी ली और गवर्नर हाउस में गर्वनर को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

इसलिए हिंदू उनको अपना सांस्कृतिक उद्धारक भी कहते हैं क्यों कि एक आक्रमणकारी और धर्मांध अत्याचारी ने मन्दिर को तोड़कर मस्जिद बना दी। ऐसा बहुत इतिहासकार कहते हैं कि बाबर के कहने पर उसके सेनापति ने ऐसा किया था। जिस सेनापति का नाम मीर बाकी था जिसने 1927 में हिंदुओं के धार्मिक स्थल पर मस्जिद बना दी थी। जहां पर हिंदू भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं।

लेकिन जन्मभूमि का अब सर्वोच्च न्यायालय ने निपटारा कर दिया और मस्जिद वाली जगह पर भगवान राम का जन्म स्थान मान लिया। तब मस्जिद वाली जगह को हिंदुओं को दे दी गई और इसके साथ ही मुसलमानों को 5 एकड़ भूमि अयोध्या की परिधि के अंदर दे दी गई।

भगवान कल्याण सिंह जी की आत्मा को शांति प्रदान करें। वो हिंदू धर्म के सेनापति थे। इतिहास में वह अमर हो गए। जब जब राममंदिर का ख्याल आयेगा। तब तब कल्याण सिंह भी याद आयेंगे।

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