अर्द्धमत्स्येंद्र योग की विधि, लाभ और सावधानियां।

अर्धमत्स्येंद्रयोग आसन (मुद्रा) जिसका अर्थ होता है शरीर को आधा मोड़ना या घुमाना।इस आसन से रक्त के द्वारा पर्याप्त मात्रा में फेफड़े तक ऑक्सीजन पहुंचती है।


अर्द्धमत्सेंद्र योग की विधि 

  1. एक समतल भूमि पर चटाई बिछाकर बैठ जाओ।
  2. दोनों पैर को दाएं पैर के घुटने के पास बाहर की ओर भूमि पर रखें।
  3. बाएं हाथ को दाएं घुटने के समीप बाहर की ओर सीधा रखते हुए दाएं पैर के पंजे को हाथ से पकड़े हुए हुए।
  4. दाएं हाथ को पीठ के पीछे घुमाकर पीछे की ओर देखें।
  5. इस योग आसन को 20 से 40 सेकंड तक करना चाहिए।
  6. इसी प्रकार इस आसन को दूसरी ओर से करें।

अर्द्धमत्स्येंद्र योग के लाभ 

1.मधुमेह रोग

इस आसन को करने से मधुमेह रोग में लाभकारी होता है और यह इंसुलिन के उपाकरण (चयापचय) को नियंत्रित करता है।

2.कमर का दर्द

कपमत्स्येंद्र योग को करने से कमर दर्द में राहत मिलती है और दोनों पैरों की मासपेसियों में दर्द आता है।

३.मेरु दंड

इस योग का सबसे महत्वपूर्ण लाभ मेरू दंड जिसको स्पोनल कॉर्ड भी कहते हैं। जो हमारे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। 

4. संचार

रक्त का संचार सुचारू रूप से और शरीर के सभी अंगों में संचारित होता है। रक्त के साथ ऑक्सीजन का भी सुचारू ढंग से संचार होता है।

5.पेट संबंधित विकलांगता

पेट संबंधी विकार इस आसन से ठीक हो जाते हैं और इसके साथ ही आँखों को दृढ़ता प्रदान होती है। पेट की मासपेसियां ​​शिथिल हो जाती हैं।


ध्यान दें

  1. इस योग आसन को गर्भवती महिलाओं को और मासिक धर्म के दौरान नहीं करना चाहिए।
  2. पेट दर्द के समय इस योग आसन को करने से बचना चाहिए।
  3. मेरूदंड में दर्द के समय आसन को नहीं करना चाहिए

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