16 वर्ष बाद बर्फ से दबे सैनिक को भारतीय सेना ने खोज कर परिवार वालों को सौंपा

भारतीय सेना का एक जवान आज से 16 वर्ष पहले अपनी ड्यूटी के दौरान गहरी खाई में गिर गया था। हालाकि अब 16 वर्ष बाद खाई का बर्फ पिघलने के बाद शहीद सैनिक का शरीर सेना को प्राप्त हुआ। जिसको भारतीय सेना ने पूरे सम्मान के साथ शहीद सैनिक के शरीर को उनके परिवार वालों को सौंप दिया।



मुख्य विषय

1. 16 वर्ष बाद लौटने वाले जवान के बारे में विस्तार से वर्णन।

 2. भारतीय सेना ने अपने 16 वर्ष पहले खोये जवान के बारे में बताया

3. जवान के साथ ड्यूटी के दौरान होनी वाली दुर्घटना का विस्तार से वर्णन।

4. भारतीय सेना ने अपने 16 वर्ष पहले खोये जवान के बारे में बताया

5. सैनिक के परिवार के लोगों के विचार। 

6.शहीद जवान के माता पिता का अपनी अंतिम सांस तक इंतजार।


16 वर्ष बाद मिलने वाले शहीद सैनिक का नाम नाइक अमरीश त्यागी है। जो उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हैं। अमरीश त्यागी सन् 1995 में भारतीय सेना में एक "पर्वतारोही सैनिक" के रूप में शामिल हुए थे और जिसके बाद उनकी तैनाती भारत के अलग अलग हिस्सों में हुईं थी। लेकिन सितंबर 2005 में जब वह उत्तराखण्ड की एक चोटी पर झण्डा फहरा कर अपनी टीम के साथ वापस आ रहे थे। तभी वह एक बहुत गहरी खाई में गिर गए थे और जिसके बाद भारतीय सेना ने उनकी बहुत खोज की। लेकिन उनके शरीर को भारतीय सेना नहीं खोज सकीं। फिर 16 वर्ष बाद, भारतीय सेना ने खाई का बर्फ पिघल जानें के बाद उनके शरीर खाई से प्राप्त किया।


भारतीय सेना ने अपने जवान नाइक अमरीश त्यागी के बारे में बताया कि 2005 में उत्तराखंड के शिखर "माउंट सतोपंथ" की चढ़ाई के बाद लौटते समय लापता हुए पर्वतारोही नाइक अमरीश त्यागी का नश्वर शरीर के अवशेष भारतीय सेना की पर्वतारोहण टीम द्वारा बरामद कर लिए गए हैं। इसके बाद सेना ने बताया कि पर्वतारोही सैनिक का उनके गृहनगर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।



शहीद जवान अमरीश के परिवार वालों को भी उम्मीद थी कि अमरीश त्यागी घर लौटकर जरूर आयेगे। चाहें वह किसी भी तरह से आयें। लेकिन जब उनका मृत शरीर 16 वर्ष बाद भारतीय सेना लेकर आयी। तो उनके परिवार ने कहा कि हम लोग उम्मीद कर रहे थे कि अमरीश जिंदा घर वापस आयेंगे। लेकिन जब उनका मृत शरीर मिल गया है। तब भी हम खुश हैं। उनके भाई ने कहा कि धरती मृत्यु लोक है। जहां सबको एक बार मरना ही है। वह आगे कहते हैं कि मेरे भाई का शरीर ही मिल गया। तो मैं इसी से ही खुश हूं। 

हालाकि इन 16 वर्षों के बीच अमरीश के माता और पिता दोनों की भी मृत्यु हो गई है। परिवार के लोगों का कहना है कि अमरीश के माता पिता हमेशा अपने बेटे को मरते दम तक याद करते रहें थे। शहीद अमरीश का शरीर जैसे ही उनके घर आया। तब यह बात पुरे क्षेत्र में फैल गई। जिसके बाद आस पड़ोस क्षेत्र के लोगों ने उनके घर जाकर शहीद नाइक अमरीश त्यागी नमन किया और उनकी इस महान शहादत पर देश भक्ति के नारे लगाएं।


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