52% अमेरिकी नागरिक ताइवान के मुददे पर चीन से युद्ध चाहतें

एक रिपोर्ट के अनुसार 52% अमेरिकी नागरिक ताइवान की चीन से रक्षा के लिए युद्ध चाहतें हैं और यह भी चाहते हैं कि अमेरिकी सरकार को ताइवान की जरूर रक्षा करनी चाहिए।


लेकिन अमेरिकी लोगों के बीच ताइवान के महत्व को लेकर उनकी समझदारी में बढ़ोतरी हुई हैं। इस बात को आप इस तरह से समझ सकते हैं कि 69% अमेरिकी लोगों ने ताइवान को चीन से स्वतन्त्रता के लिए अमेरिकी समर्थन के लिए हामी भरी है। जिसमें वो सीधे तौर पर कह रहें हैं कि अमेरिका अब ताइवान को एक देश के तौर पर पहचान दे। यह सर्वे अमेरिका के शिकागो काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स ने किया है। जिसमें आधे से अधिक अमेरिकी लोगों ने कहा कि अगर चीन ताइवान को अपने कब्जे में लेने के लिए कोई आक्रमण करता है तो अमेरिकन फौज को भी ताइवान की रक्षा करने के लिए जाना चाहिए और चीन से युद्ध भी लड़ना चाहिए। यह सर्वे जब  1982 में  किया गया। तब मात्र 19 % अमेरिकी लोगों ने चीन से ताइवान की रक्षा करने के लिए समर्थन किया था। 

यह सर्वे  इस साल 7 जुलाई से 26 जुलाई तक एक ऑनलाइन प्रश्नों के द्वारा सम्पन्न कराया गया था। जिसमें कुल नमूने में 2,086 वयस्क लोग शामिल थे, जिनकी आयु सीमा 18 वर्ष या उससे अधिक थी, जो 50 अमेरिकी राज्यों और कोलंबिया जिले में रहते थे। इस सर्वे को प्रकाशित 25 अगस्त को वॉयस ऑफ अमेरिका के नाम से मशहूर वेबसाइट पर किया गया था।


अमेरिका में यह सर्वे बहुत ही विस्वास पूर्ण होते हैं क्यों कि ज्यादातर अमेरिकी लोग अपना निर्णय पहले ही बता देते हैं।  जिस तरह सभी सर्वे ट्रंप की हार बता रहे थे और हुआ भी ऐसा ही। क्यों कि अमेरिकी सरकार भी वहीं करती है जो वहां के लोग चाहते हैं। चाहें फिर कुछ भी क्यों न हों।

 

इस सर्वे में उन बातों को भी दर्शाया गया है जो चीनी राष्ट्रपति ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के 100 वर्ष पूर्ण हो गए थे। शी जिनपिंग ने 2019 में यह कहा था कि चीन "एक देश, दो प्रणालियों" के सिद्धांत के अंतर्गत ताइवान पर शासन करता है और ताइवान चीन का एक अभिन्न अंग हैं और अगर ताइवान द्वारा किसी भी प्रकार की रिपब्लिक ऑफ चाइना से स्वतंत्रता के लिए प्रयास किया जाता है। तो चीन उस प्रयास को कुचल कर रख देगा। लेकिन ताइवान की नई राष्ट्रपति तसाई इन वेन ने चीन के इस सिद्धान्त और उनकी धमकी को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ताइवान कम्युनिस्ट चीन का कभी हिस्सा न था और न ही कभी होगा।  

हालाँकि, बीजिंग का कहना है कि ताइवान एक पाखण्डी प्रांत है।  ताइवान द्वारा औपचारिक स्वतंत्रता के लिए किए जाने वाले किसी भी प्रयास को "तोड़ने" की कसम खाई।


इसी सर्वे के आधार पर इनका कहना कि अगर चीन ताइवान पर निकट भविष्य में कब्जा करने के लिए आक्रमण करता है और वह ऐसा आवश्य ही करेगा। तो क्या अमेरिका को अपनी फौज भी ताइवान की रक्षा करने के लिए  भेजनी चाहिए।  तो इसके समर्थन में 52 % लोगों ने समर्थन किया है कि अमेरिका को ताइवान के मुददे पर युद्ध भी करना चाहिए। इस बात से आप यह मत समझ लेना कि अमेरिकी अभी तो अफ़गानिस्तान से बहुत बुरी तरह से हताश होकर निकले हैं। वो अब कैसे युद्ध लड़ेंगे। 


मेरा मानना है कि वियतनाम में भी अमेरिका बहुत बुरी तरह से हार गया था और उसे वहां से निकलना पड़ा था। लेकिन तब भी उन्होंने लीबिया, इराक और सिरिया में युद्ध लड़े और अपनी सेनाओं को भी भेजा था। 


आप इस तरह से निष्कर्ष निकाल सकते हो कि अमेरिका अभी कुछ दिनों के लिए शान्ति चाहता है और क्यों कि 20 वो वर्षो से अफ़गानिस्तान में लड़ रहे थे। जिससे वो अब थक गए थे। लेकिन जैसे ही उनकी यह थकावट दूर होगी। फ़िर नया कुछ करेंगे। क्यों कि उनके पास पैसा है और साथ में शक्ति है। चाहें युद्ध का परिणाम कुछ भी हो।  क्यों कि अमेरिका बेशर्म देश है। वो अपने भले के लिए किसी को भी बाप बना लेंगे। फ़िर चाहें उनकी कितनी भी दुनिया में बेज्जती हो। इससे उनको फर्क नहीं पड़ता। 


हां इस सर्वे से यह जरूर पता चलता है कि अमेरिकी लोग ताइवान के प्रति जागरूक हैं और अमेरिकी सरकार भी अपने लोगों की इच्छा को अनुसार ही काम करती है। आप इस उदाहरण से समझ सकते हो कि अमेरिकी लोगों ने कहा कि अमेरिका को अफ़गानिस्तान से तुरंत सेना अब निकाल लेनी चाहिए। चाहें कुछ भी हो। वही अमेरिकी सरकार ने किया। 


अगर अब अमेरिकी जनता चाहती है कि ताइवान के मामले में अमेरिकी सरकार ताइवान की चीन की सहायता करें। तो अंत में फिर यही होगा।

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