फ्रांस ने इस्लामिक कट्टरपंथ को फैलाने वाले धार्मिक स्थलों और संगठनों को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया

फ्रांस के एक टीचर की गर्दन मुस्लिम कट्टरपंथी द्वारा काट देने के बाद फ्रांस सरकार कट्टरपंथी लोगों के लिए बहुत ही सख़्त हो गई है। इस सख्ती का असर भी फ्रांस में दिखने लगा है। फ्रांस की सरकार ने कट्टरपंथ फैलाने वाली ऐसी 6 मस्जिदों को बंद कर देने का आदेश दिया और इसके साथ ही कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले संगठनों व केंद्रो को बंद करने का निर्णय लिया है।

फ्रांसिसी राष्ट्रपती एमेनुएल मैक्रॉन


मुख्य विषय

1. फ्रांस की गृहमंत्री गेराल्ड डारमैनिन ने विस्तार से जानकारी दी।

2. इस्लामिक कट्टर विचारों फैलाने वाले संगठनों व केंद्रो को भंग करना।

3. नस्ल भेदी हिंसा में संलिप्त संगठनों को भी भंग करना।

4. फ्रांस में आतंक के खिलाफ सख्त कार्रवाई।

फ्रांस की गृहमंत्री मंत्री गैरोल्ड डारमैनिन ने बताया कि फ्रांस के सुरक्षा विभाग ने पूरे देश में "इस्लामी अलगाववाद" के खिलाफ सख्ती और निगरानी को बढ़ा दिया गया है। उन्होंने बताया कि फ्रांस ने नंबर 2020 से ही कट्टरता फैलाने वाले धार्मिक स्थलों और संगठनों के खिलाफ जांच पड़ताल करने का आदेश दे दिया था। सभी 89 धार्मिक स्थलों में से दो तिहाई धार्मिक स्थलों को "कट्टरपंथी होने के शक" में रखा गया है और इन दो तिहाई कट्टरपंथ फैलाने वाले धार्मिक स्थलों पर जांच जारी है।


फ्रांस की गृहमंत्री ने आगे बताया कि फ्रांस की सरकार दो संगठनों को प्रतिबंधित करने जा रही है। जिसमें पहला संगठन "इस्लामिक प्रकाशक नावा" है। जिसको सरकार धार्मिक कट्टरपंथ फैलाने के आरोप में प्रतिबंधित कर रही है। यह इस्लामिक संगठन फ्रांस के दक्षिणी शहर एरीज में यहूदियों और समलेंगिको के प्रति नफरत फ़ैलाने का कार्य कर रहा है। 

दूसरा संगठन "ब्लैक अफ्रीकन डिफेंस लीग (BADL)" है। यह संगठन फ्रांस में नस्ल भेदी हिंसा में संलिप्त पाया गया है और जिसने पिछले वर्ष जून में पुलिस हिंसा के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों का आयोजन किया था। इसके बाद फ्रांस की गृहमंत्री ने कहा कि फ्रांस में इस्लामिक कट्टरपंथ और इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ माहौल है।

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