श्री लंका के पास न खाना बचा और न विदेशी मुद्रा आपातकाल घोषित किया गया

भारत के पड़ोसी देश श्री लंका में आपातकाल घोषित कर दिया गया। क्यों कि श्री लंका के पास न खाना बचा और न ही विदेशी मुद्रा भंडार। 




उनका विदेशी मुद्रा भंडार अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। जिससे वह अब विदेश से कोई भी वस्तु नहीं खरीद सकता है और वहां की गोताबाया राजपक्षे की सरकार ने सभी व्यापारियों के लिए सख़्त आदेश जारी किए गए हैं कि कोई भी व्यक्ति अनाज और दुसरी खाद्य पदार्थों का भंडारण नही कर सकता है।

     

इस काम के लिए सरकार ने अपनी फौज को भी लगा दिया है। ताकि कहीं भी भोज्य पदार्थों की कालाबाजारी न हो सकें। वहां की गोताबाया राजपक्षे की सरकार ने अपने व्यापारियों को आदेश दिया कि व्यापारी केवल जरूरत की चीजें ही विदेश से आयात करें। 

श्री लंका का विदेशी मुद्रा भंडार

श्री लंका के विदेशी मुद्रा भंडार में नवंबर 2019 में 7.5 बिलियन डालर विदेशी मुद्रा थी। लेकिन इसी समय भारत समर्थित सरकार श्री लंका से चली गई और घोर चीन समर्थित गोतापाया राजपक्षे की सरकार श्री लंका में बन गईं। 

जब 2019 में राजपक्षे बंधुओं की सरकार श्री लंका में बनी थी। उसी समय कॉविड 19 का संकट पैदा हो गया। जिससे श्री लंका की आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई। क्यों कि श्री लंका की अर्थव्यवस्था टूरिज्म पर निर्भर है और कोविड संकट के कारण विदेशी टूरिस्ट श्री लंका में जा ही नहीं पाये जिससे श्री लंका की आर्थिक हालत गंभीर बनती चली गई। लेकिन श्री लंका का विदेशी मुद्रा भंडार जुलाई के अंत तक 7.5 अरब डॉलर से गिरकर 2.5 अरब डॉलर ही बचा। जिससे वहां की सरकार सिर्फ़ जरूरत की चीजें ही आयात कर सकती हैं। जिससे देश खाने पीने वाली वस्तुओं की कमी न हो।

श्री लंका दुनिया के बहुत से देशों से कर्ज ले रखा है। जिसे उसकी किस्त हर साल अदा करनी पड़ती हैं। खासकर चीन से श्री लंका ने अरबों डॉलर कर्ज ले रखा है। इसलिए श्री लंका ने अपने कर्ज की 1.5 बिलियन डालर की किस्त चुकाई हैं और इसके साथ ही श्री लंका इसी साल 1.5 बिलियन डॉलर की एक ओर कर्ज की किस्त देनी है।          

 इसलिए श्री लंका में विदेशी मुद्रा भंडार का संकट गहरा गया है। जिससे श्री लंका अभी जो बचा विदेशी मुद्रा भंडार है। उससे वह केवल प्रतिदिन प्रयोग की जानें वाली जरूरत की चीजों का ही आयात करता है। 

BBC news

भारत में भी यहीं संकट 1992 में खड़ा हुआ

भारत में जब नरसिम्हा राव की सरकार थी तब भारत भी श्री लंका की तरह आर्थिक संकट में फंसा हुआ था। तब भारत सरकार के पास 2500 करोड़ रुपए का ही विदेशी मुद्रा भंडार बचा हुआ था और देश एक तरीके से कंगाल होने की अवस्था पर खड़ा था। लेकिन भारत के उस समय के पीएम नरसिम्हा राव ने भारत को इस संकट से बाहर निकाल लिया।

आज भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 616.895 अरब डॉलर है। जिससे भारत विदेशों से खरीदी गई चीजों के खर्चों की मंद 14 महीनों तक किसी परेशानी से चुका सकता है। 

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