फैट मैन परमाणु बॉम्ब जो नागशाकी शहर पर मौत पर बनकर फटा था। पढ़े विस्तार से

द्वितीय विश्व युद्ध के जल्दी ख़त्म हो जानें का सबसे बड़ा कारण परमाणु बॉम्ब था। अमेरिका किसी भी हाल में युद्ध को ज्यादा नहीं खींचना चाहता था और वह इस महायुद्ध को जल्दी ख़त्म कर देना चाहता था। इसके लिए अमेरिका के तात्कालिक राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने जापान पर परमाणु बॉम्ब फोड़ने का आदेश दे दिया। अमेरिका ने जिन परमाणु बॉम्बो को जापान के ऊपर फोड़े थे। उनका नाम फैट मैन और लिटिल बॉय था। यहां हम फैट मैन परमाणु बॉम्ब के बारे में विस्तार से जानेंगे।

दुनिया का दुसरा परमाणु हथियार फैट मैन

फैट मैन दुनिया का दुसरा परमाणु हथियार था। पहले परमाणु बॉम्ब का कोड नाम फैट मैन रखा गया था।जिसको द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के नागाशकी शहर पर 9 अगस्त 1945 को फोड़ा गया था। यह परमाणु बॉम्ब दुसरा परमाणु बॉम्ब था जो द्वितीय विश्व युद्ध में प्रयोग किया गया था। तब से आज तक 75 वर्ष हो चुके हैं। कहीं भी युद्ध में परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं किया गया है। क्यों कि इसके फटने के बाद जो दुनिया और जापान सरकार ने देखा था। उस मंजर ने दुनिया को हिला के रख दिया और जापान सरकार ने अमेरिका के सामने आत्म समर्पण कर दिया। परमाणु विस्फोट के साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध भी खत्म हो गया।

फैट मैन परमाणु बॉम्ब बनाया गया

फैट मैन परमाणु बॉम्ब को अमेरिका के लॉस एंजेलिस प्रयोगशाला में विज्ञानिकों और इंजीनियरों द्वारा हनफोर्ड साइट पर बनाया गया था। इसमें प्लूटोनियम का प्रयोग किया था। जिसका कोड नाम फैट मैन था। इसी का दुसरा नाम मार्क 3 भी है। इसका व्यास 60 इंच (1.5 मीटर) था जिसका भार 4,670 किलो (10,300 पाउंड) था। जिसमें प्लायटोनियम भरा हुआ था। इसके फटने से नागासाकी में 21 किलो टीएंटी की ऊर्जा निकली थी। फैट मैन जैसे 120 परमाणु बॉम्ब बनाए गए थे। इनको 1945 से 1949 में बनाया गया था।

फैट मैन को नागाशाकी में गिराया

अमेरिका के तात्कालिक राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने जापान पर परमाणु बॉम्ब ब्लास्ट करने का आदेश दिया और इसके बाद जापान पर दो परमाणु बॉम्ब गिराये गए थे। जिसमें फैट मैन को अमेरिका के वायु सेना के अधिकारी चार्ल्स डब्ल्यू. स्वीनी ने 9 अगस्त 1945 को  जापान के शहर नागशाकी पर गिरा दिया था। 

फैट मैन की कार्य प्रणाली

परमाणु बॉम्ब एक बहुत ही खतरनाक हथियार है और इससे अपार विनाशकारी ऊर्जा बॉम्बो के कोर से विखंडनीय तत्वों के लगातार विखंडन होने से इसमें से अचानक बहुत ज्यादा ऊर्जा का विस्फोट होता है। यह ऊर्जा सूर्य की ऊपरी सतह के बराबर होती है। इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि सूर्य की ऊपरी सतह का तापमान 6000 डिग्री सेल्सियस होता है और इतने ही तापमान के साथ फैट मैन नागशाकी शहर पर फट गया था। जिससे जो चीज 2.5 किलोमीटर व्यास में था। वो तुरन्त जल कर राख हो गया। पानी भाप बनकर उड़ गया। लोगों की हड्डियां भी राख हो गई। इसी विनाश लीला को देखकर दुनिया ने परमाणु बॉम्ब का इस्तेमाल दुबारा नहीं किया। 

फैट मैन से मरने वाले लोगों की संख्या

जब सुबह के समय परमाणु बॉम्ब गिराया गया था तब लोग घरों से उठ कर बाहर काम पर जा रहे थे। इसी समय अमेरिका के द्वारा परमाणु बॉम्ब नागाशाकी पर गिराया गया था। इस परमाणु हमले में तुरंत 35000 से 40000 हजार लोग मारे गए थे और बाद में परमाणु बॉम्ब के रेडिएशन से भी बहुत लोग मरे थे। कुछ लोगों को बहुत ही घातक बीमारियां हो गई थी। जिससे वैज्ञानिक ने अनुमान लगाया है कि इस परमाणु हमले में 60000 से 80000 हजार लोग  मारे गए थे।

Post a Comment

Previous Post Next Post