भारत का नेटग्रिड आतंक से लड़ाई के लिए ब्रह्मास्त्र सिद्ध होगा। पढ़े विस्तार से

अफ़गानिस्तान में तालिबानियों की सरकार के बन जाने से भारतीय उपमहाद्वीप में आतंक बड़ी तेजी से फैल सकता है। जिससे भारत की समस्याये और चिंताएं दोनो में वृद्धि हुईं हैं।

लेकिन भारत सरकार ने आतंक से मजबूती से लडने के लिए कमर कस ली है। जिसके लिए भारत सरकार ने एक आतंकरोधी प्रणाली "नेटग्रिड (NATGRID)" के निर्माण की रफ्तार तेज कर दी है। यह नेटग्रिड भारत सरकार के गृहमंत्रालय के अंतर्गत आता है। नेटग्रिड(NATGRID) का वर्तमान सीईओ पी रघु रमन जी हैं।

नेटग्रिड (NATGRID) क्या है?

नेटग्रिड एक डाटा बेस होगा। जिसमें संदिग्ध लोगों की संदिग्ध गतिविधियां को डाटा के रुप में स्टोर किया जायेगा। इस बात को आप इस तरह से समझ सकते हैं कि अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति बार बार पाकिस्तान जा रहा है और फिर वह व्यक्ति भारत में  आकर संवेदनशील जगहों पर जा रहा हों। तब इस परिस्थिति में उस संदिग्ध व्यक्ति के एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर और डेबिट कार्ड की जानकारी नेटग्रिड के डाटा बेस में स्टोर रहेगी और फिर सुरक्षा एजेंसियां को उस व्यक्ति के एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और डेबिट कार्ड की सहायता से, उस संदिग्ध व्यक्ति की ट्रैकिंग करना आसान हो जायेगी। जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था बहुत ही मजबूत हो जायेगी। आतंकी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। क्यों कि इसके द्वारा खुफिया एजेंसियों को संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियों के बारे में पता चलता रहेगा।  

नेटग्रिड की जरुरत क्यों पड़ी?

जब भारत में दिसंबर 2008 में मुम्बई धमाके हुए थे। तब अमेरिकी नागरिक डेविड कोलमैन हेडली नाम का व्यक्ति बार बार पाकिस्तान से भारत आता जाता था और 26/11 मुम्बई धमाकों के बाद भारत की सरकार और  खुफिया एजेंसियों को पता चला था कि डेविड कोलमैन हेडली ने पहले ही धमाकों वाली जगहों की रैकी की थी। इससे भारत सरकार और खुफिया एजेंसियों को संदिग्ध गतिविधियों वाले लोगों पर नजर रखने के लिए नेटग्रिड की स्थापना की जरुरत पड़ी थीं। 

इसलिए भारत सरकार के तात्कालिक गृहमंत्री पी चिदंबरम ने नेटग्रिड की स्थापना करने का निर्णय लिया था और इसी के साथ नेशनल इन्वेस्टिकेशन डिपार्टमेंट (एनआईए) की भी स्थापना की थी। 

लेकिन यूपीए सरकार के दौरान इसके काम में देरी कर दी गई थी। किंतु मोदी सरकार के आने बाद इस पर तेजी से काम किया जा रहा है। इस नेटग्रिड प्रोजेक्ट के बारे में गृह मंत्रालय (HMA) ने 5 फरवरी 2020 को संसद में घोषणा की थी । कि प्रोजेक्ट NATGRID को व इसके लिए आवश्यक भौतिक बुनियादी ढांचे के साथ मार्च 2020 के अंत तक पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके साथ ही मोदी सरकार ने संसद को बताया था कि नेटग्रिड का डाटा बेस 31 दिसंबर 2020 तक काम करना शुरू कर देगा।      

नेटग्रिड तक पहुंच

नेटग्रिड संधिग्ध लोगों की गतिविधियों का डाटा होगा। जिसको भारत सरकार की सभी प्रमुख 11 केंद्रीय एजेंसियां ही इस्तेमाल कर सकती हैं। जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ,रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW), इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), वित्तीय खुफिया इकाई (FIU), प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT), केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड और सीमा शुल्क (CBIC), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और जीएसटी खुफिया महानिदेशालय जैसे प्रमुख एजेंसियां शामिल हैं। राज्यों की आतंकरोधी इकाई को जिनमें एंटी टेरर स्कॉट (ATS) को भी केंद्रीय एजेन्सी की अनुमति से नेटग्रिड से आतंकी का डाटा मिल सकता है।

नेटग्रिड के लिए बजट

भारत सरकार ने नेटग्रिड को बनाने के लिए 3400 करोड़ रुपए का बजट रखा है। जिसके लिए बड़े बड़े शहरों में आतंक में संलिप्त या संदिग्ध लोगों का डाटा सेंटर बनाएं जायेंगे। 

नेटग्रिड का विरोध

नेटग्रिड का कुछ एनजीओ और संगठन यह कह कर विरोध कर रहे हैं कि इससे डाटा लीक भी हो सकता है और सरकार खुफिया एजेंसियों को बहुत ज्यादा शक्तियां दे रहीं है। जबकि भारत सरकार ने कह दिया है कि नेटग्रिड भारत की सुरक्षा के लिए बहुत ही आवश्यक है। नेटग्रिड के द्वारा आतंकी घटनाओं को घटित होने से रोका जा सकता है। 

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