रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले सफर से भारत के पीएम बनने तक का अद्भुत, शक्ति से पूर्ण और अकल्पनीय सफर

प्रधान मंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी भारत के महान प्रधानमंत्रियों में से एक हैं। जिनके भारत के पीएम बनने का सफर बड़ा ही अद्भुत, और अकल्पनीय है। जिनके इस सफर ने यह बता दिया है कि मानव अगर कुछ तय कर ले। तो वह कुछ भी हासिल कर सकता है। जिसके लिए किसी बड़े खानदान का होना जरूरी नहीं होता है। क्यों कि बड़े खानदान का होना किसी व्यक्ति की योग्यता का प्रमाण नहीं होता है। बड़ा पाने के लिए महान त्याग और बलिदान की आवश्कता होती है और ढेरो सारे कष्ट तथा परेशानियों से जूझना पड़ता है। तब जाकर कोई नरेंद्र मोदी बन पाता है। क्यों कि हर कोई भारत के पीएम पद के योग्य नहीं होता है। उसके लिए योग्यता और कई वर्षों का अनुभव चाहिए होता है। 


पीएम मोदी का शुरुआती जीवन काल

आज भारत के सबसे शक्तिशाली प्रधाममंत्री पद पर नरेन्द्र मोदी विराजमान हैं और जो भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भी वह नेता हैं। 

भारत जिस वर्ष गणतंत्र बना था। उसी वर्ष भारत के भविष्य के प्रधानमन्त्री ने जन्म लिया था। तब क्या किसी ने सोचा था कि वडोदरा का यह बच्चा एक विशाल लोकतंत्र का मुखिया बनेगा। भारत के पीएम नरेद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर वडोदरा, जिला महेसाना राज्य गुजरात राज्य (उस समय के मुम्बई राज्य में) में हुआ था। मोदी जेसे महान पुत्र को जन्म देने वाली माता का नाम हीराबेन है और उनके पिता का नाम दामोदर दास मूलचंद्र मोदी है। मोदी जी कहते हैं कि वह अपने पिता की सहायता करने के लिए वडोदरा स्टेशन पर चाय बेचने का कार्य किया करते थे और उनकी मां दूसरो के घरों में काम किया करती थी। वो कहते हैं कि महान व्यक्ति की पहचान उसके बचपन के कर्मों से भी हो जाती है। 

भारत के पीएम मोदी जी की शादी 17 वर्ष की आयु में जशोदाबेन मोदी से हों गईं थीं। लेकिन वह शादी से खुश नहीं थे और इसलिए उन्होंने 17 वर्ष की आयु में ही घर छोड़ दिया और भारत भ्रमण की ओर निकल पड़े। 

      

मोदी की शिक्षा दीक्षा

भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी हायर सेकंडरी शिक्षा 1967 में गुजरात के वडनगर से की है। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए किया और गुजरात विश्वविद्यालय से एमए की अपनी पढ़ाई पूरी की। भारत के पीएम को हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती भाषाओं का ज्ञान हैं। जिसमें गुजराती उनकी मातृ भाषा हैं। जिसमें उन्होंने बचपन में बोलना और पढ़ना सीखा था। 

आरएसएस से पहली बार जुड़ाव

भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ एक अटूट संबंध रहा है। जिसकी एक झलक इस बात से लगती है कि भारत के पीएम  मोदी जी 8 वर्ष की अवस्था में पहली बार आरएसएस से जुड़े थे। आरएसएस की शाखाओं में वह बचपन से ही जानें लगें थे और वहां, मोदी ने लक्ष्मणराव इनामदार जी से मुलाकात की थी। जिन्होंने मोदी साहब को बाल स्वयंसेवक के रुप में आरएसएस में शामिल किया था और बाद में यह भारत के मजबूत पीएम के राजनीतिक गुरु बन गए। इसके साथ ही आरएसएस से भारत को एक ओर महान प्रधानमंत्री की सौगात मिली। 

राजनीतिक जीवन की शुरुआत

जब नरेन्द्र मोदी जी आरएसएस की शाखाओं के द्वारा प्रशिक्षण ले रहे थे। तब उनकी मुलाकात सन 1970 में गुजरात राज्य के बीजेपी इकाई के संस्थापक वसंत गजेंद्रगडकर और नथालाल जाघड़ा से हुई थी। जो भारतीय जनसंघ के नेताओं में से एक थे।

उन्होंने 1975 में इंदिरा गांधी के द्वारा लगाई गई इमरजेंसी का विरोध किया और विरोध में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। जिसके बाद आरएसएस ने उनको 1985 में बीजेपी में भेज दिया था। जहां उन्होंने अपने जीवन की नई शुरूआत की।

सीएम के रूप में न्यू जीवन की शुरूआत

नरेन्द्र मोदी के जीवन का महान पल 7 अक्टूबर 2001 में आया। जब वह गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने बीजेपी के ही केशुभाई पटेल की जगह ली थी। उसके बाद गुजरात की जनता ने  उन्हें  तीन बार  अपने राज्य का मुख्यमंत्री के रूप में चुना था और 22 मई 2014 को गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

मोदी के शासन में ही गुजरात राज्य में 2002 दंगे हुए थे। इन दंगो के कारण उस समय की केन्द्रीय सरकार के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और यूरोप से मोदी को वीजा न देने को कहा था। तब जब उन पर कोई आरोप सिद्ध भी नहीं हुए थे। लेकिन कांग्रेस की मुस्लिम वोटबैंक की राजनीति ने भारत के गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री को विदेशों में बदनाम किया गया। किंतु जैसे जैसे नरेन्द्र मोदी का कद भारतीय राजनीति में बड़ा होता गया। वैसे वैसे ही अमेरिका और यूरोप ने उन पर वीजा तथा यात्रा प्रतिबंध हटा लिए। जब वह भारत के पीएम बने। तब उनको व्हाइट हाउस से अमेरिका आने का निमंत्रण मिला।

  

प्रधाममंत्री के रूप में जीवन काल

22 मई 2014 को उन्होंने गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। क्यों कि 2013 के अंत  में उनको बीजेपी के प्रधाममंत्री उम्मीदवार के रुप में चुन लिया गया था और उन्होंने 2014 में भारत के इतिहास में इंदिरा गांधी के बाद दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। फ़िर भारत की जनता ने उन्हें 2019 में एक बार ओर चुनकर विश्वास जताया। जिस पर वह खरे उतरे भी हैं। उन्होंने बीजेपी के प्रमुख एजेंडे धारा 370 को जम्मू कश्मीर से खत्म किया और जम्मू कश्मीर में भारत के संविधान को भी लागू किया। तीन तलाक जैसे कुप्रथा का अंत किया और मुस्लिम महिलाओं के साथ न्याय किया।

       उनके प्रधान मंत्री के दौरान ही भारतीय सेना सशक्त हो रही हैं। जिन्होंने राफेल लड़ाकू विमान खरीदा और शक्तिशाली डिफेंस सिस्टम S 400 भी खरीदा है। तिब्बत से लगती सरहदी इलाकों में सड़को का जाल बिछाया गया। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद की रचना की और भारत को उसका पहला सीडीएस विपिन रावत के रूप में दिया है। सीडीएस समय और देश दोनों की मांग थी। जिसको भारत सरकार के पीएम नरेन्द मोदी ने पूरी कर दी।

नरेन्द मोदी के  कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राममंदिर के बनने का रास्ता साफ हुआ। वैसे राममंदिर में उन्होंने ने भी अपने जीवन के कई वर्षों को खपा दिए थे। लेकिन 5 अगस्त 2019 को उन्होंने राममंदिर निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए और एक भव्य और दिव्य राममंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ।

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