सार्क देशों ने तालीबान के मुद्दे पर मीटिंग कैंसल कर दी। वजह पाकिस्तान

सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की 25 सितंबर को होने वाली मीटिंग को पाकिस्तान की वजह से रद्द करनी पड़ी। पाकिस्तान तालीबान को पहचान दिलवाने के लिए किस हद उत्सुक है। कि उसने 25 सितंबर को सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की होने वाली मीटिंग का इस्तेमाल तालीबान के लिए करना चाहता था। जिसमें पाकिस्तान चाहता था कि सार्क देश अफ़गानिस्तान के प्रतिनिधि के रूप में तालीबान के विदेश मंत्री अमीर खान मोटाकी को बैठने दे। जिससे सार्क देशों की तरफ से दुनिया को यह संदेश जाता। कि सभी सार्क देशों ने तालीबान को स्वीकार कर लिया है।

सार्क देशों का तालीबान को अस्वीकार करना

लेकिन पाकिस्तान की इस बात से सभी सार्क देश सहमत नहीं थे और उन्होंने सार्क की मीटिंग में अफ़गानिस्तान की ओर से तालीबान के किसी भी प्रतिनिधि को शामिल करने से साफ़ साफ़ मना कर दिया। 

सार्क देशों ने पूर्व अफगान सरकार के प्रतिनिधि का सुझाव दिया

सभी सार्क देशों ने एक सुझाव दिया है कि तालीबान के ज्यादातर मंत्री सयुक्तं राष्ट्र संघ द्वारा घोषित आतंकी हैं और तालीबान की सरकार को दुनिया में किसी भी बड़े राष्ट्र ने पहचान भी नहीं दी है। इस वजह से तालीबान को इस बैठक में नही बैठने दिया जायेगा। इसके बदले में पूर्व अफगान सरकार के किसी प्रतिनिधि को बैठाया जा सकता है। लेकिन पाकिस्तान ही सार्क देशों में एक देश ऐसा निकला, जिसने पूर्व अफगान सरकार के किसी भी प्रतिनिधी के शामिल करने का विरोध किया। जिस पर दूसरे सार्क देशों ने विदेश मंत्रियों की इस मीटिंग को ही रद्द कर दिया। 

सार्क संगठन

सार्क संगठन एक भारतीय उपमहाद्वीप के 8 देशों का एक समूह है। जिसकी स्थापना 8 दिसंबर 1985 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुईं थी। सार्क का पूर्ण नाम क्षेत्रीय सहयोग के लिए दक्षिण एशियाई संघ है। सार्क का मुख्यालय नेपाल के कांठमांडू में है। इस संगठन का  उद्देश इस क्षेत्र में विकाश के लिए नए अवसर पैदा करना और स्वतंत्र रूप से व्यापार करना था। लेकिन पाकिस्तान के स्टेट स्पॉन्सर्ड आतंकवाद की बजह से यह संगठन बेकार सिद्ध हो रहा है और इस क्षेत्र पर आतंकी घटनाओं का प्रभाव बढ़ रहा है। 

सार्क संगठन के सदस्य देश

1. भारत 

2. नेपाल

3. भूटान

4. बांग्लादेश

5. मालदीव

6. अफ़गानिस्तान

7. श्री लंका

8. पाकिस्तान

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