सऊदी अरब सरकार ने मदीना में सिनेमा हॉल खोला। तो भारतीय मुस्लिम आगबबूला सऊदी सरकार से।

सऊदी अरब को कुछ वर्ष पहले बहुत कट्टर इस्लामी देश कहा जाता था। जिसके इस्लामी कानून बहुत ही कुख्यात थे। लेकिन जब से सऊदी अरब के राजकुमार मोहमंद  बिन सलमान ने शासन का कार्यभार अपने हाथों में लिया है। वह सऊदी अरब को दुनिया में एक नई पहचान के रूप में उभार रहें हैं। जिसके अंतर्गत प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सऊदी के इस्लामी कानूनों को उदार बना रहें हैं। इसी के अंतर्गत राजकुमार ने मुसलामानों के पवित्र शहर मदीना में सिनेमा हॉल खोलने का निर्णय लिया है। यह निर्णय उनके विजन 2030 के अनुसार लिया गया है। जिसके अंतर्गत वह सऊदी अरब को 2030 एक आधुनिक देश बना देना चाहते हैं और कट्टर इस्लामी कानूनों को धीरे धीरे खत्म कर देना चाहते हैं।


भारतीय मुसलमानों का सऊदी के खिलाफ़ प्रदर्शन

अब उनके इस निर्णय का सऊदी अरब के मुसलमानों ने तो विरोध नहीं किया है। लेकिन भारत के मुसलमान खुलकर विरोध कर रहे हैं। जिसमें यह लोग सऊदी सरकार को जमकर निशाना साध रहें हैं। 

इस विरोध में भारत के कट्टर संगठन जैसे रजा अकादमी भी समर्थन दे रही है। सऊदी सरकार के मदीना में सिनेमा हॉल खोलने के निर्णय पर इस संगठन का  कहना है कि मदीना मुनव्वरा में सिनेमा हॉल खोलने के निर्णय का विरोध करते हैं और सऊदी अरब सरकार इस निर्णय को तुरन्त वापस ले।

भारत के सबसे बड़े राज्य यूपी के बरेली जिला के उलमा बोले कि  सऊदी अरब सरकार का मदीना में सिनेमा हॉल खोलने का निर्णय इस्लाम को बदनाम करना है।

भारत के आम लोगों का सऊदी सरकार को समर्थन

भारत की सबसे बड़ी पार्टी के नेता कपिल मिश्रा ने सऊदी सरकार के इस निर्णय का समर्थन किया है और उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि मैं सऊदी के राजा सलमान के निर्णय के साथ हुं।

रेखा जी कहती हैं कि यह आधुनिकता की ओर बढ़ाया गया एक कदम है। जिसके बाद वह सऊदी सरकार को समर्थन देती हैं।


राकेश बोस कहते हैं कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मदीना में सिनेमा हॉल खोल कर बहुत अच्छा काम किया है। यह निर्णय सऊदी सरकार द्वारा लिया गया है और इसका स्वागत होना चाहिए। वह आगे कहते हैं कि सऊदी सरकार ने महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए भी बहुत सारे निर्णय लिए हैं।

 

सऊदी सरकार इस तरह के निर्णय क्यों ले रही

आप लोग सोच रहे होंगे कि सऊदी सरकार इस तरह के निर्णय क्यों ले रही है। तो इसका सीधा मतलब है कि दुनिया  जल्द ही कुछ 10 या 20 वर्षों में तेल से बिजली पर आ जायेगी और तेल का खेल खत्म हो जायेगा। वर्तमान समय में सऊदी अरब की जीडीपी में तेल का हिस्सा लगभग 85 % तक है। अब दुनिया में सऊदी अरब को इसी तरह बने रहना है तो उसको अपने देश के कट्टर इस्लामी कानूनों को बहुत ही उदार बनाना पड़ेगा। तभी दुनिया सऊदी अरब में निवेश करेगी और साथ ही साथ पर्यटक भी जा सकेंगे।  

सऊदी क्राउन प्रिंस का विजन 2030

सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने  सऊदी अरब के लिए एक विजन 2030 बनाया है। जिसके तहत वह अपने देश में कट्टर इस्लामी कानूनों को ख़त्म कर रहे है। इसी 2030 विजन के अंतर्गत महिलाओं को कार चलाने, अकेले विदेश यात्रा करने, फौज में भर्ती होने, घर से बिना मर्द के निकलने, स्विमिंग पूल में तैरने, सिनेमा हॉल खोलने जैसे क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। 

भारत और भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमान अपने कट्टर इस्लामी विचारों को त्यागने को तैयार ही नहीं हैं। जबकि सऊदी अरब की 98% जनता सऊदी सरकार के इस निर्णय का समर्थन कर रही हैं। क्यों कि वहां की जनता अब धर्म के मामले में होशियार हो गई है। वो लोग कभी नहीं चाहेंगे कि उनकी जिन्दगी 1947 से पहले जैसी हो जाएं। 

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