अमेरिका चाहता था कि पाक परमाणु हथियार बनाए और भारत को काउंटर करे

अमेरिका को यह अच्छी तरह से पता था कि पाकिस्तान भी परमाणु हथियार बना रहा है। लेकिन उस समय अमेरिका की जिम्मी कार्टर की सरकार ने पाकिस्तान को परमाणु हथियार बनाने दिए। उस समय भारत अमेरिका का सहयोगी नहीं था बल्कि जिम्मी कार्टर की सरकार के दौरान भारत सोवियत संघ का एक महत्व पूर्ण सहयोगी था। यहीं अमेरिका की सबसे बड़ी वजह थी कि उसने पाकिस्तान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से बिल्कुल भी नहीं रोका। इस तरह अमेरिका पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सहायता से काउंटर करना चाहता था। 


लेकिन आज भारत और अमेरिका एक दूसरे के बहुत करीब आज चुके हैं। क्योंकि दोनों देशों के रक्षा के मामले एक दूसरे जुड़े हुए हैं। भारत और अमेरिका का एक ही प्रबल शत्रु चीन है।

तब भी उसी पाकिस्तान के न्यूक्लियर बॉम्ब अमेरिका के लिए खतरा बन चुके हैं। क्यों कि अमेरिका को ऐसा लगता है कि पाक के परमाणु हथियार तालीबान के हाथ लग सकते हैं। जो अमेरिका की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा सिद्ध होगा।

कार्टर प्रशासन को पाक के परमाणु कार्यक्रम का पता था

पूर्वी और दक्षिण एशियाई मामलों के उस समय के तत्कालीन सहायक राज्य सचिव हेरोल्ड सॉन्डर्स ने जिम्मी कार्टर प्रशासन को एक पत्र लिखा था कि "पाकिस्तान बड़ी तेजी से और गुप्त रूप से उन चीजों के निर्माण की ओर बढ़ रहा है जो शायद उसको दो से चार वर्षों के भीतर उसे परमाणु विस्फोटक क्षमता प्रदान कर दे"।

अमेरिका में एक सरकारी दस्तावेज लीक हो गया जिसमें यह पता चला कि अमेरिका पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में  1979 की शुरू में ही पता चल गया था। लेकिन उस समय की जिम्मी कार्टर की सरकार ने कुछ नहीं बोला। क्यों कि उस समय अमेरिका भारत को पाकिस्तान के परमाणु हथियार से काउंटर करना चाहता था। तभी तो उन्होंने ने पाक को परमाणु हथियारों को बनाने से नहीं रखा।

अमेरिका सरकारका का विदेश विभाग  यह  जानता था कि जनवरी 1979 में "कहुता" में एक नवजात परमाणु संवर्धन की सुविधा के साथ-साथ गैस सेंट्रीफ्यूज तकनीक का उपयोग करके पाकिस्तान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम प्रारंभ किया था।," 

पाकिस्तान का गुप्त प्रॉजेक्ट 706 

पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम गुप्त कोडनेम 706 था। इसी कोडनेम के अंतर्गत यूरेनियम संवर्धन और उसका इस्तेमाल कैसे करते हैं। फ़िर इसकी सहायता से पाकिस्तान के लिए पहला परमाणु हथियार बनाना था। उस समय के, पाकिस्तानी परमाणु प्रौद्योगिकी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने रिएक्टर-ग्रेड प्लूटोनियम के उपयोग में दक्षता हासिल कर ली और 1980 के दशक की शुरुआत तक सफलतापूर्वक पहला परमाणु लायक हथियार ग्रेड प्लूटोनियम का उत्पादन कर लिया था। 

पाकिस्तान ने अपने परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत की

पाकिस्तान ने अपने परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत 1955 में परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना से की थी। जिसका उद्देश्य शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का उपयोग करना था। फ़िर इसके बाद 1972 में पाकिस्तान में कनाडा की सहायता से पहला परमाणु ऊर्जा केंद्र स्थापित हुआ।

लेकिन जब भारत ने अपना पहला परमाणु  18 मई 1974 व दूसरा परमाणु परीक्षण 1998 कर लिया और इसके साथ भारत सरकार ने भारत को एक परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। जिसके बाद पाकिस्तान के प्रधान मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने कहा था कि पाकिस्तान अपने परमाणु हथियार विकसित करने के लिए यदि जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान "खास खाएगा" की शपथ ली थी। 

प्रॉजेक्ट 706 पर काम करने वाले व्यक्ति

पाकिस्तान ने प्रोजेक्ट 706 के अंतर्गत 1974 से ही परमाणु अनुसंधान के लिए इंजीनियरों का नेतृत्व अब्दुल कादिर खान और तथा मुनीर अहमद खान ने किया था।

पाकिस्तान को फंडिग देने वाले देश

पाकिस्तान ने इस  प्रोजेक्ट 706 के लिए 450 मिलियन डॉलर लीबिया और सऊदी अरब से प्राप्त किए थे। 

अमेरिका के लिए पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से ख़तरा हुआ

जब 2003 में संयुक्त राष्ट्र की एक अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी द्वारा एक सूचना प्राप्त की। कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक अब्दुल कादिर खान ने उत्तर कोरिया, लीबिया और ईरान को परमाणु हथियार के लिए उन्नत यूरेनियम संवर्धन, डिज़ाइन, हार्डवेयर और अन्य जानकारियां बेच रहें हैं और फिर जब जनवरी 2004 में जांच बैठी तब अब्दुल कादिर खान ने इस बात को स्वीकार कर लिया। कि उन्होंने परमाणु हथियारों को बनाने वाली सारी जानकारियों को दूसरे देशों को बेच दी। 

पूरी दुनिया जानती है कि उत्तर कोरिया और ईरान दोनों अमेरिका के जानी दुश्मन हैं। जो अमेरिका को बर्बाद करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है क्यों कि ईरानी परमाणु हथियार सीधे अमेरिका के लिए ख़तरा हैं।

दुसरी तरफ उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु हथियार विकसित भी कर लिए हैं और उसने फिर से परमाणु परीक्षण करने का ऐलान भी कर दिया है। अमेरिका के लिए यह सब ख़तरा पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से हुआ है और अब उनके सीनेटर यह भी कहने लगे हैं कि कहीं पाक के परमाणु हथियार तालीबान के हाथ न लग जाए। अगर ऐसा हुआ तो पुरी दुनिया में परमाणु संकट गहरा सकता है। 

अमेंरीका का संकट टल सकता था

अमेरिका को आज उत्तर कोरिया और ईरान दोनों से खतरा है और दोनों ने परमाणु हथियार विकसित करने की तकनीक पाकिस्तान से हासिल की हैं और जिसमें उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु हथियार विकसित भी कर लिए हैं। जबकि ईरान विकसित करने में लगा हुआ है। 

अब अमेरिका के लिए यह संकट कभी खड़ा ही नहीं होता। यदि अमेरिका ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को रुकवा दिया होता और इसके लिए फंडिंग देने वाले देशों पर  दबाव बना देते। तो आज पाकिस्तान के पास न परमाणु हथियार होते और न ही पाकिस्तान परमाणु तकनीक अमेरिका के दुश्मन देशों को बेच पाता।

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