अफ़गानिस्तान में अमेरिका का कट्टर दुश्मन सिराजुद्दीन हक्कानी गृहमंत्री बना

अफ़गानिस्तान का गृहमंत्री एक आत्मघाती हमलावरों को तैयार करने वाले शख्स को बनाया गया है। जिसका नाम सिराजुद्दीन हक्कानी है। जो आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क का प्रमुख है।  इसके साथ ही तालिबानी सरकार में हक्कानी नेटवर्क के कम से कम 3 अन्य हक्कानी मंत्री ओर हैं। जिनमें एक और "मोस्ट वांटेड आतंकी" शामिल है जिसका नाम खलील हक्कानी है। जो तालीबान सरकार में शरणार्थी मामलों का मंत्री है।


हक्कानी नेटवर्क

हक्कानी नेटवर्क एक अफगान गुरिल्ला विद्रोही और आत्मघाती हमला करने वाला आतंकी संगठन है। यही संगठन अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो सैन्य बलों और अफगानिस्तान के इस्लामी गणराज्य की सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए आत्मघाती हमलावरों के द्वारा युद्ध किया करता था।  हक्कानी नेटवर्क की स्थापना जलालुद्दीन हक्कानी ने की थी और अब इस खूंखार आतंकी संगठन की कमान उसके बेटे सिराजुद्दीन हक्कानी के पास है। 

अमेरिका के लिए संकट का समय

अमेरिका की सुरक्षा एजेंसी एफबीआई और सीआईए ने हक्कानी नेटवर्क सहित सिराजुद्दीन हक्कानी को एक आतंकी घोषित कर रखा है। जिस पर एफबीआई ने 5 मिलियन डॉलर का ईनाम घोषित कर रखा है। इसकी खबर देने वाले को 5 मिलियन डॉलर मिलेंगे। लेकिन अब यह बकवास है क्यों कि अब सबको पता है वह कहां है। किंतु फिर भी कोई कुछ नहीं कर सकता है।

जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति तालिबानियों को क्लीन चिट देने पर तुले हैं और तालिबानियों से बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे। जबकि उन्होंने अपने असली मंसूबे सिराजुद्दीन हक्कानी को अफ़गानिस्तान का गृहमंत्री नियुक्त कर अमेरिका को दिखा दिए हैं। इसलिए भारत और रूस अब फिर एक बार साथ आ रहे हैं और किसी भी क़ीमत पर तालीबान के कट्टर इस्लामी आतंकवाद पर कठोर आघात करने की रणनीति पर विचार करना शुरू कर दिया है। इसलिए आज भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दिल्ली में अफ़गानिस्तान मसले पर मीटिंग करने जा रहें हैं। क्यों कि अमेरिका आतंकवाद के मसले पर अपने हथियार डाल चुका है और अब उसकी आतंकियों से निपट सकने की हिम्मत नहीं रही है। 

अफ़गानिस्तान में आत्मघाती हमलों की शुरुआत करना

हक्कानी नेटवर्क के नेतृत्व में अफ़गानिस्तान में आत्मघाती हमलों की शुरुआत हुई थी। जो पहले अमेरिकी और नाटो सैन्य बलों पर आत्मघाती हमलों को अंजाम दिया करता था। लेकिन इसके बाद हक्कानी नेटवर्क का इस्तेमाल पाकिस्तान की बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत के खिलाफ़ भी शुरू कर दिया। इसी हक्कानी नेटवर्क ने ही काबुल स्थित भारतीय दूतावास पर 2008 में आत्मघाती हमला किया था। जिसमें करीब 58 लोग मारे गए थे और 141 लोग घायल हुए थे।

हक्कानी नेटवर्क की कमान आईएसआई के पास

हक्कानी नेटवर्क की कमान पाकिस्तान की आईएसआई के पास है और इस बात से यह अंदेशा जताया जा सकता है कि दुनिया में आतंकवाद की वृद्धि होना तय है। खासकर भारतीय उपमहाद्वीप पर आतंकवाद में अच्छी खासी वृद्धि हो सकती हैं और रूस के पड़ोसी मुस्लिम देशों में तालिबान की कट्टर इस्लामी विचारों का प्रसार भी होना तय है।क्यों कि जितने भी अफ़गानिस्तान में मंत्री बने हैं। वो अंदर से बहुत ही कट्टरपंथी इस्लामी विचारों के लोग हैं। जो अफ़गानिस्तान के साथ साथ पूरे विश्व में इस्लामी विचारों और शरीयत कानून को लागू करना चाहते हैं।

 

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