तालीबान के लिए अपमान होगा यदि उन्होंने पंजसीर के खिलाफ हार मान ली

        तालीबान अफ़गानिस्तान की 34 में से 33 प्रॉविंस पर कब्जा कर लिया है। लेकिन उनके लिए सिर दर्द पंजशीर घाटी बनी हुई हैं। जहां पूरे अफगानिस्तान को आसानी से कब्जा कर लिया है और वहीं पंजशीर वैली तालिबानियों की कब्रगाह बनती जा रही हैं। क्यों कि हर दिन हजारों तालिबानी लड़ाके अहमद शाह मसूद के लोगों के हाथों मारे जा रहें हैं। वो भी तब जब 86 बिलियन डॉलर के अमेरिकी हथियार उनके हाथों लग चुके हैं। 

तालीबान का आक्रामक रुख

पंजशीर घाटी के लिए लड़ने वाले लोगों का कहना है कि तालीबान ने पिछली रात 7800 तालिबानी आतंकियों के साथ आक्रामक तरीके से पंजशीर पर हमला किया। जिसका पंजशीर की सेना और मिलिसिया समूह ने मुंह तोड़ जवाब दिया। जिसमें तालीबान के 450 लड़ाके मारे गए और 130 तालिबानी लड़ाको को पकड़ लिया गया। इन सभी कारणों से तालीबान बहुत ही अपमान महसूस कर रहा है क्यों कि जिन्होंने तीन लाख की सेना को हरा दिया है।अब वो सिर्फ 5 से 6 हजार लोगों से हार रहें हैं। जबकि नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट का कहना है कि वह सक्षम हैं। अपनी जमीन को बचाने के लिए।

पंजशीर घाटी की ताकत

पंजशीर घाटी चारों तरफ से पहाड़ों से घिरी हुई हैं। जहां संकरी संकरी गलियां और नदियां हैं। जिनको पार कर पाना तालिबानी आतंकियों के दम का नहीं है। तालीबान ने सोच रखा था कि वह बहुत आसानी से अफ़गानिस्तान पर कब्जा कर लेगा और अपनी मन मर्जी करेगा। लेकिन पंजशीर घाटी उसके लिए सिर दर्द बन गई है। क्यों कि अगर ऐसे ही तालिबानी लड़ाके मरते रहें। तो हो सकता है कि निकट भविष्य में अफगानिस्तान के ओर लोग तालीबान के खिलाफ खड़े हो जाए। यहीं कारण है कि तालीबान ताकत के दम पर पंजशीर पर कब्जा कर लेना चाहता है। लेकिन पंजशीर को जीतना इतना आसान नहीं है। क्यों कि रूस भी घाटी को कभी जीत नहीं पाया था।

पंजशीर घाटी के लोगों का क्या कहना

पंजशीर घाटी के लोगों का साफ़ साफ़ कहना है कि वह स्वतंत्र रहना चाहते हैं वे तालिबानियों के गुलाम बन कर नहीं रहना चाहते हैं। सभी पंजशीर घाटी के लोग अहमद मसूद को अपना नेता मानते हैं और उनके नेतृत्व में हर पंजशीर वासी अपनी आखिरी सांस तक लड़ेगा। 

      पंजशीर घाटी के लोगों का यह भी कहना है कि अगर कोई तालिबानी घाटी शान्ति के लिए आना चाहते हैं तो पंजशीर के गेट सभी के लिए खुले हैं। लेकिन यदि वो घाटी पर हमला करने के लिए आयेंगे। तो पंजशीर का हर नागरिक पंजशीर के साथ साथ पूरे अफगानिस्तान को तालिबानियों से बचायेंगे।

अहमद मसूद की सेना

अहमद मसूद के नेतृत्व में पुरी पंजशीर वैली के लोग तालिबानियों को कुत्ते की मौत दे रहे हैं। पंजशीर घाटी के लोग अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ना जानते हैं। पंजशीर घाटी के लोगों के साथ अफ़गानिस्तान की आर्मी के लोग भी शामिल हो गए हैं। जो अफ़गानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह के साथ पंजशीर भाग गए और अब वहीं से तालिबानियों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है। साथ ही तालिबानी आत्यचारों से पीड़ित लोग तालीबान के खिलाफ पंजशीर पहुंच कर युद्ध लड़ रहे हैं। अहमद मसूद और अफ़गानिस्तान के उपराष्ट्रपति फ्रंट लाइन पर जाकर अपने लोगों का हौसला अफजाई कर रहें हैं।

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