भारतीय सेना के जवान अब गीता और अर्थशास्त्र पढ़ेंगे :सीडीएम ने की अनुशंसा

भारतीय सेना बहुत ही शक्तिशाली और संयमित सेना है जो अपने देश के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए हमेशा तैयार रहती है। जिसकी टॉप लीडरशिप से लेकर एक आम सैनिक हमेशा अपने देश के लिए जीता है। 


भारतीय सेना के कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट(सीडीएम) ने एक अनुशंसा की है कि जिसमें उन्होंने कहा है कि भारतीय सेना के वर्तमान सैन्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में कोटिल्य की अर्थशास्त्र और गीता को शामिल करने के लिए कहा। 

इस मामले में सीडीएम का कहना है कि इससे भारतीय सेना के अफसर की अपनी प्राचीन संस्कृति  ,युद्ध कौशल और निर्णय लेने की  समझ विकसित होगी। क्यों कि कोटिल्य की अर्थशास्त्र में रणनीति के नियम, शासन को चलाने के तरीके और युद्ध के बारे में विस्तार से बताया गया है। जिसमें चंद्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य की सेना और उसके रणकोशल के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है। जिसमें कोटिल्य की कूटनीति और राजनीति दोनों का समागम है। जिसमें बताया गया है कि अपने दुश्मन से किस तरह से निपटना चाहिए। 

दुसरी तरफ भागवत गीता जो व्यक्ति को मानसिक रूप से मज़बूत बनाती है और जिसको एक बार पढ़ लेने से जीवन के प्रति लोगों का नजरिया ही बदल जाता है। गीता जीवन जीना सिखाती है और जो तुरंत निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाती है। 

इसलिए सीडीएम ने अनुशंसा की है कि सभी वर्तमान सैन्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में गीता और कोटिल्य की अर्थशास्त्र  को शामिल कर लेना चाहिए।

इसी विषय पर अकादमी मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ  में बातचीत हुई थी तथा जिसका शीर्षक "प्राचीन भारतीय संस्कृति और युद्ध तकनीक के गुण और वर्तमान में रणनीतिक सोच और प्रशिक्षण में इसका उपयोग" था। भारतीय प्राचीन ग्रंथों का वर्तमान सैन्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल करने का उद्देश्य अधिक से अधिक संभावनाओं की खोज के लिए था। जिससे भारत के सैन्य अधिकारियों की सोच और रणनीति समझ में वृद्धि होती।

कांग्रेस ने इसका विरोध किया।

कांग्रेस ने भगवत गीता और कोटिल्य के अर्थशास्त्र को सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल करने का विरोध किया और कहा कि एक सेकुलर देश की सेना में धार्मिक ग्रन्थों को नहीं पढ़ाना चाहिए। उनका कहना है कि बहुत से मुस्लिम सैनिकों ने कारगिल युद्ध में लड़ाई लड़ी और देश को जीत दिलवाई। कांग्रेस ने आगे कहा कि बीजेपी को सेना का राजनीतिकरण करने से बचना चाहिए।

 सीडीएम क्या है?

सीडीएम का पूरा नाम कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट है। यह भारत के  तेलंगाना राज्य के सिकंदराबाद जिले में स्थित एक प्रमुख त्रि-सेवा सैन्य प्रशिक्षण संस्थान है। जहां हमारी सेना, नौसेना और भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को उच्च रक्षा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित किया जाता है और बाद में यहीं भारत के लिए युद्ध रणनीति तैयार करते हैं। जिनकी हर अनुशंसा के आधार पर सरकार युद्ध में निर्णय लेती है। यही लोग सीडीएम से प्रशिक्षण लेने के बाद में भारत की सेना में उच्च पदों पर आसीन होते हैं। 

इसकी स्थापना सन् 1970 में की गईं थीं। जिसका पुराना नाम इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट था। जिसको बाद में कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट कर दिया गया। जिसका अंग्रेजी में ध्येय वाक्य "विक्ट्री थ्रू एक्सीलेंस" है

Post a Comment

Previous Post Next Post