कृषि कानूनों का समर्थन करने वाले देश से ही राकेश टिकैत की गुहार।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने अमेरिका के राष्ट्रपति से गुहार लगाते हुए, ट्विटर पर राकेश टिकैत ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को टैग करते हुए लिखा। कि हम भारत के किसान 11 महीनों से 3 कृषि कानूनों के खिलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं , जिनको मोदी सरकार लेकर आईं है।

    

राकेश टिकैत ने आगे लिखा कि हमारे 700 किसान इस आन्दोलन के 11महीनों के दौरान मारे गए हैं। ये 3 काले कानून ख़त्म होने चाहिए और हमको इन काले कानूनों से बचाइए।  

राकेश टिकैत का अमेरिका के राष्ट्रपति से कहना है कि आप भारत के प्रधान मंत्री से मीटिंग के दौरान किसानो के लिए चिंता व्यक्त कर देना। 

किसान आंदोलन भटक गया

वैसे किसान भारत की आत्मा है और भारत ने हमेशा अपने किसान भाईयों का सम्मान किया है और हमेशा करेगा। पिछले वर्ष का किसान आंदोलन अपने शुरुआती दिनों में राजनीति से दूर था। लेकिन कुछ महीनों बाद लाल किला के कांड ने इस किसान आंदोलन से आम आदमी का मोहभंग कर दिया। साधारण किसान भी अब इस आंदोलन के साथ नहीं रहा है और वो अपने खेतों में खेती कर रहा है।

क्यों कि अब इस आंदोलन में ज्यादातर बड़े बड़े किसान और छोटे किसानों से औने पौने भाव में फसल खरीद करने वाले लोग ही रह गए हैं। 

इसी का दूसरा पहलू यह भी है कि यह अब किसान आंदोलन ही नहीं रहा है। बल्कि राजनीति का किसान आंदोलन बन गया है। जहां हर कोई बहती गंगा में हाथ धोना चाहता है। 

वैसे इस तरह से राजनीति करने से कुछ निकलने वाला नहीं है। क्यों कि किसानों की समस्याएं ढेर सारी है और हजारों किसान हर वर्ष आत्म हत्या कर लेते हैं। क्यों कि उनकी प्रॉब्लम्स पर कोई बात ही नहीं करना चाहता है। सब राजनीति कर रहे हैं। सरकार भी किसानों के प्रति संवेदन शील होना चाहिए। क्यों कि ये सब भारतीय हैं न कोई दूसरे ग्रह से आए लोग हैं। दूसरी तरफ इन लोगों को भी अपनी राजनीतिक सोच को दूर रख कर सरकार से बात करनी चाहिए। तभी इस समस्या का हल निकल सकेगा। 

यूएस का कृषि कानूनों को समर्थन

अब राकेश टिकैत जिन कृषि कानूनों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति से गुहार लगा रहें हैं। तो अमेरिका ने इन 3 कृषि कानूनों का पूरी तरह से समर्थन किया है। फिर किस आधार पर अमेरिकी राष्ट्रपति से सहायता मांगी जा रही है। सब जानते हैं कि यह आंदोलन अब केवल राजनीतिक आंदोलन बन कर रह गया है। जिसका आम आदमी का कोई सरोकार नहीं है। 

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