ब्रह्मा का 1 वर्ष 31 खरब 10 अरब 40 करोड़ मानव वर्ष के बराबर

सनातन धर्म के अनुसार काल गणना बहुत विस्तृत है. सनातन धर्म के अनुसार समय चार युगों में बंटा हुआ है।  हमारे वेदों में काल की गणना बहुत सुंदर और वैज्ञानिक ढंग से की गयी है. जिस तरह यह संसार अरबो साल पुराना है और संसार भी अन्नत है।  जिसकी ना तो कोई शुरुआत और ना कोई अंत है।  यह सब सनातन धर्म के ग्रंथ वेदो में  साफ़ साफ़ लिखा हैं।  जबकि दूसरे मजहब कहते हैं कि दुनिया 2000 वर्ष पुरानी है। लेकिन केवल हिन्दू धर्म ही कहता है कि धरती अरबो वर्ष पुरानी है। 

ब्रह्मा

सनातन धर्म को आज आधुनिक समय में हिन्दू धर्म के नाम से जाना जाता है।  सनातन धर्म दुनिया का सबसे सबसे प्राचीन है।  यानि तब जब दुनिया के अन्य मजहबों का कोई बजूद भी नहीं था।   

हिन्दू धर्म के अनुसार समय 4 युगों में बंटा हुआ है। जो इस प्रकार है। 

1 . सतयुग 

सतयुग हिन्दू धर्म चारों  युगों में सबसे बड़ा युग है।  जो 17,28,000   है। इनको 400 दैविये वर्ष भी मान सकते है। यानि सतयुग का समय देवताओं के 400 दैविये वर्ष के बराबर होगा।  सतयुग सच्चाई , ईमानदारी, धर्म और प्रेम का युग है , जिसमे अधर्म के लिए कोई जगह नहीं है।  इस युग में लोग बड़े प्रेम से रहते हैं।  लोगो के अंदर किसी के लिए  कोई  भी दुर्र्भावना नहीं थी।  लोग अपना हर कर्म धर्म के अनुसार करते थे।  महिलाओं का समाज में पूर्ण सम्मान दिया जाता था। इस युग में धर्म अपने चारों पैरों पर खड़ा होता है। अर्थात धर्म 100 % होता है। 

 2. त्रेता युग 

त्रेता युग सतयुग के खात्मे के बाद शुरू होता है।  इस युग में भगवान् राम ने अवतार लिया था। भगवान् राम ने अत्याचारी अधर्मी लंका के राजा रावण का अपने हाथों से वध किया था।  भगवान् राम के तीन भाई भरत , लक्ष्मण और शस्त्रुघन ने भी जन्म लिया था। इस युग में हनुमान, सुग्रीब , जाम्बन्त और राजा रावण के भाई बिभीषण ने भी जन्म लिया था और भगवान् राम की सहायता की रावण के वध में। त्रेता युग का समय काल 12,96,000  था।  या 3600 दैविये वर्ष था।  इस युग में धर्म की केवल 3 पैर ही बचे थे। यानि इस युग में  75 % धर्म था और 25 % अधर्म था। 

3. द्वापर युग  

इस युग में की शुरुआत त्रेता युग की समाप्ति के साथ हुई। इस युग में धर्म केवल 2 टांगो पर खड़ा था।  जिसमे 50 % धर्म और 50 % अधर्म था। इस युग में भगवान् विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए भगवान् श्री कृष्णा का अवतार लेकर धरती पर जन्म लिया था।  भगवान् श्री कृष्णा ने इस युग में पापी और अधर्मी अपने मामा कंस का वध किया था।  कंस मथुरा का राजा था। इस युग में ही महाभारत जैसा बड़ा युद्ध हुआ था।  महाभारत का युद्ध  कौरवों और पांडवो के बीच हुआ था।  कौरव अधर्म की ओर थे और पांडव धर्म की ओर थे। भगवान् श्री कृष्ण इस युग में अर्जुन के सारथी बने थे। सभी अधर्मियों का अपने हाथों से या दूसरे तरीको से उनका वध कर।  इस धरती को पवित्र किया।  इस युग का समय काल 8,64000 साल था। यानि यह युग 2400 दैवीय वर्ष के बराबर है.

इस युग में महाभारत और भगवत गीता जैसे महान ग्रंथ लिखे गये। इस युग का अंत भगवान् श्री कृष्ण के धरती से प्रस्थान से हुआ।  भगवान् धरती लोक को छोड़कर  वैकुंठ लोक चले गये। 

4. कलयुग

सनातन धर्म के ग्रंथो के अनुसार यह युग चारों युगों में अंतिम युग हैं।  इस युग की शुरुआत भगवान् श्री कृष्ण के धरती छोड़ने और वैकुंठ लोक के लिए प्रस्थान से हुई। इस युग में धर्म अपनी केवल 1 टांग पर खड़ा होगा।  अर्थात इस युग में धर्म केवल 25 % और अधर्म 75 % होगा। भगवान् श्री कृष्ण ने गीता में इस युग के बारे में  बताया कि कलयुग में लोग  अधर्मी, अत्याचारी , और दुराचारी होगा।  इस युग में धन सबसे बड़ा होगा। हर से मानवता मर रही होगी और इंसान धर्म के नाम पर लोगो का निर्दयता से खून कर देगा।  फिर इस युग के अंत में भगवान विष्णु कल्कि का अवतार लेंगे और सभी अधर्मियों का वध क़र देंगे और धरती पर जल प्रलय होगी।  इसके साथ धरती से मानव का अंत हो जायेगा।  

कलयुग का समय काल 432000 साल है अर्थात 1200 दैवीय वर्ष है। इस युग की शुरुआत लगभग 5000 वर्ष पहले हुई थी। 

इन युगो की काल गणना के बाद भी और गणना आती हैं जो इस प्रकार है।

मन्वन्तर :

यह मनु की उम्र होती है।  एक मन्वन्तर में 71 युग आते हैं।  अर्थात  1 मन्वन्तर  306,720,000 वर्षो के बराबर होता है। 

संध्यांश:

दो मन्वन्तर के बीच में एक संध्यांश होता है जो एक सतयुग के बराबर होता है। एक संध्यांश 17,28 000  वर्षो के बराबर होता है। 

कल्प :

एक कल्प 14 मन्वन्तर या 994 युग (71 *14 =994 ) के बराबर होता है। अर्थात एक कल्प 4,320,000,000  मानव वर्षो(4 अरब 32 करोड़ वर्ष ) के बराबर होता है। 

ब्रह्मा का एक दिन और रात :

एक कल्प ब्रह्मा का एक दिन होता है और इसी अवधि की एक रात होती है। अर्थात ब्रह्मा का एक दिन और रात ( 4अरब 32 करोड़ वर्ष*2 ) 8,64,00,00,000 वर्षों के बराबर होते हैं।  

ब्रह्मा का 1 वर्ष :

ब्रह्मा का 1 वर्ष (8640000000 वर्ष *360 ) 31,10,40,00,00,000 बर्ष के बराबर होता है। जिसको सही शब्दों में कहें तो 31 खरब 10 अरब 40 करोड़ मानव वर्ष  होता है। 

ब्रह्मा के 100 वर्ष :

ब्रह्मा के 100 वर्ष 311,040,000,000,000  (31 खरब 10 अरब 40 करोड़ वर्ष *100 वर्ष) 32 नील 10 ख़रब 40 करोड़  मानव वर्षों के बराबर होंगे।अर्थात ब्रह्मा के 100 वर्ष 72000 कल्पों के बराबर होंगे।   ब्रह्मा के 100 वर्ष विष्णु के एक निमेय के बराबर होंगे। 

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