चीनी मीडिया में वायरल लेख, जिसमें चीन ताईवान को 2025 तक कब्जा लेगा, बाद में 2040 में अरुणाचल प्रदेश को जीत लेगा।

चाइनीज मीडिया में 2013 में एक थ्योरी अपलोड की गईं थीं। जो अब जाकर 2021 में चाइना में सुहू पर वायरल हो गया है। उसमें जो बातें लिखी गई हैं। वो पूरी तरह से चीन के विस्तारवाद को दिखा रहीं हैं। इस वायरल आर्टिकल में चीन के भावी युद्धों के बारे में विस्तार से बताया गया था। जो 2020 से 2060 तक लड़ेगा। जिसमें वो चीन के पड़ोसी देशों की भूमि पर कब्जा कर अपने आकार को बढ़ायेगा। 



ताईवान से युद्ध 2020 से 2025 तक 

इस लेख में कहा गया है कि ताईवान का प्रशासन शांति पूर्वक मैनलैंड चीन से मिल जाता है तो ठीक है और यदि ऐसा नहीं होता है। तो चाईनीज फौज 2025 तक ताईवान पर आक्रमण करके ताईवान को चीन में पुनः मिला लेगी। इस लेख में आगे कहा गया है कि यदि जापान ताईवान की रक्षा करने के लिए आता है तो चीन जापान के खिलाफ़ भी युद्ध छेड़ देगा और उसका साथी अमेरिका उसकी मदद भी नहीं करने आयेगा।

6वीं युद्ध रशिया से 2050 से 2060 तक

    

दूसरा युद्ध साउथ चाइना समुद्र में 2025 से 2030 तक


इस लेख के अनुसार ताईवान पर कब्जे के बाद चीन 2 वर्ष के लिए आराम करेगा और इसके दौरान चीन द्वारा दक्षिणी चीन सागर के सभी देशों को दक्षिण चीन सागर के द्वीपों को लेकर समय सीमा दे दी जायेगी। कि वो  दक्षिणी चीन सागर के सभी द्वीपों को चीन को दे दें। अन्यथा चीन 2030 तक में सभी द्वीपों पर सैन्य कार्रवाई करके अपना कब्जा कर लेगा। इसमें यह भी कहा गया है कि जब एक बार चाइना इन दक्षिण चीन सागर के द्वीपों पर अधिकार कर लेगा। तब फिर अमेरिका के अंदर इतनी हिम्मत नहीं होगी। कि वो चीन को इन द्वीपों से दोबारा भगा सके। इसमें यह भी कहा गया है कि 2030 में अमेरिका चीन का सामना नहीं कर पायेगा। वियतनाम और फिलिफिंस ही दो ऐसे देश होगें। जो चीन का विरोध करेगें। लेकिन चीन उनको अपनी शक्ति के दम से कुचल देगा।


तीसरा युद्ध 2035 से 2040 तक अरुणाचल प्रदेश को लेकर


चाइना के सुहु सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लीक इस दस्तावेज़ में चीन तीसरा युद्ध भारत के अरुणाचल प्रदेश पर कब्जे के लिए लड़ेगा। जिसको चीन दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है। इसमें यह भी कहा गया है कि 2030 तक भारत की सैन्य ताकत बहुत ज्यादा हो जायेगी और उससे चीन का सीधे युद्ध करना। चीन के लिए ठीक नहीं होगा। इसलिए इस लेख में आगे लिखा गया है कि चीन भारत को अंदर से बहुत कमजोर करके विभाजित करवा दे। जिससे भारत की शक्ति खत्म हो जायेगी और जिससे चीन भारत को आसानी से हरा देगा।  


इस लेख में आगे लिखा है कि अगर चीन भारत को विभाजित नहीं कर पाता है। तो चीन पाकिस्तान को खतरनाक हथियार देने चाहिए। ताकि पाकिस्तान समय आने पर जम्मू कश्मीर में एक फ्रंट खोल सके। तब चीन द्वारा भारत पर तिब्बत की ओर आक्रमण कर देना चाहिए और दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा अरुणाचल प्रदेश पर कब्जा कर लेना चाहिए। जिससे भारत दो मोर्चों पर लड़ाई नहीं लड़ सकता है और आसानी से चीन द्वारा हार जायेगा। इसमें यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान और भारत को इस युद्ध में  सबसे ज्यादा हानि होगी। चीन को इस युद्ध से सबसे ज्यादा लाभ होगा। 


इसमें परमाणु युद्ध के बारे में भी लिखा गया है। कि अगर भारत परमाणु हथियारो का इस्तेमाल करता है। तो चीन को इससे ज्यादा नुकसान नहीं होगा। क्यों कि चीन का क्षेत्रफल बहुत ज्यादा है और इसके बदले में चीन भारत पर परमाणु बॉम्ब का इस्तेमाल कर उसे धरती के नक्शे से ही मिटा दिया जायेगा। 


चौथा युद्ध 2040 से 2050 तक जापान से 

इस आर्टिकल में जापान से भी एक युद्ध के बारे में विस्तार से बताया गया है कि। चाइना जापान से 2040 से 2050 तक चौथा युद्ध डियाओयू  और लिउकिउ द्वीप के लिए लड़ेगा।इन  दोनों द्वीपो को चीन अपना बताता है और जापान उसकी इस बात को सिरे से खारिज कर देता है। इसमें आगे बताया गया है कि इस समय अमेरिका, यूरोप और रूस का पतन हो रहा होगा। जिससे इनमें से कोई भी जापान की मदद करने को आगे नहीं आयेगा। भारत भी जापान की मदद करने के लिए कतई सामने नहीं आयेगा और चाइना आसानी से जापान से डियाओयू  और लिउकिउ द्वीपों को कब्जे में ले लेगा।


पांचवा युद्ध 2045 से 2050 तक बाहर मंगोलिया को लेकर


अगर इस आर्टिकल को सच माने तो चीन अपना पांचवा युद्ध बाहरी मंगोलिया पर आक्रमण करके उसको रिपब्लिक ऑफ चाइना में शामिल कर लिया जायेगा। इस लेख में कहा गया है कि  चीन को मंगोलिया को लेकर ताईवान मॉडल को अपनाना चाहिए और बाहरी मंगोलिया को चीन के साथ एकीकरण कर लेना चाहिए। इसमें चीनी विश्लेषक  कहते हैं कि हमें अपनी मातृभूमि को फिर से एकजुट और मज़बूत करनी होगी। इनका यहां साफ साफ कहना है कि चीन को अपने आकार में वृद्धि करनी चाहिए। चाहें इसके लिए कुछ भी करना हों।


छठा युद्ध 2055 से 2060 तक रूस से


इस आर्टिकल में छठे युद्ध को लेकर भी जानकारी है। यह युद्ध चीन 2055 से 2060 रूस के कब्जे वाले क्षेत्र को पुनः प्राप्त करने के लिए लड़ेगा। इसमें कहा गया है कि रूस और चीन इस समय एक मित्रवत और अच्छे पड़ोसी देश हैं। लेकिन चीन को अमेरिका से लड़ने और उसका सामना करने के लिए रूस के साथ मिलकर चलना होगा। लेकिन धीरे धीरे चीन रूस से शक्तिशाली होता चला जायेगा और रूस एक समय के बाद चीन का सामना नहीं कर सकता है। इसी समय का फायदा उठाकर चीन रूस को धमकी देगा कि किंग राजवंश के शासन की जमीन, जो रूस ने कुछ वर्षों पहले कब्जा ली थी। रूस इस जमीन को चीन को वापस करें। अगर यदि रूस ऐसा नहीं करता है तो चाइना रूस पर आक्रमण कर देगा और किंग राजवंश के द्वारा शासित जमीन को चीन वापस ले लेगा। 


इस लेख में यह भी लिखा है कि चीनी जनता रूस के छोटे छोटे टुकड़े देखना चाहती हैं और रूस के विघटन की बात चीनी जनता को प्रेरित करती है।


निष्कर्ष


इस लेख से यह जरूर पता चलता है कि चाइनीज मीडिया कितनी सरकार द्वारा नियंत्रित की जाती है। ताकि अपनी जनता को राष्ट्रीय भावनाओं से जोड़ा जा सकें। जबकि इस लेख में जो लिखा है,वो चाइनीज सरकार द्वारा अपनी जनता को शिगुफा या धीमी गति से दिया जानें वाला चरस का नशा है। जिससे शी जिनपिंग चीन में चाइनीज जनता के बीच अपनी मज़बूत छवि  पेश करना चाहतें हैं। चीनी मीडिया का यह लेख न आज सही बैठेगा और न ही भविष्य में। 


इस तरह का चीनी विस्तारबाद का कदम उसकी बर्बादी का सिर्फ और सिर्फ एक कारण बनेगा। जिससे आने वाले निकट भविष्य में चाइना के ही खंड खंड होने का खतरा बड़ेगा। 

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