गृहमंत्रालय के निर्णय से बंगाल और पंजाब में बीएसएफ सीमा के 50 किलोमीटर अंदर कार्यवाहीं कर सकती, किंतू टीएमसी और पंजाब सीएम ने विरोध किया

केंद्र सरकार के गृहमंत्रालय ने सीमा सुरक्षा अधिनियम 1968 के अनुसार, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को पश्चिम बंगाल और पंजाब में सीमा के 50 किलोमीटर अंदर तक किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार करने व किसी भी प्रकार की कार्यवाही करने का अधिकार दे दिया है। गृहमंत्रालय के इस आदेश से बीएसएफ की शक्तियों में वृद्धि हुई। जिससे बीएसएफ किसी भी व्यक्ति से पुछताछ व जरूरत पड़ने पर गिरफ्तार भी कर सकती हैं। जिसके लिए सीमा सुरक्षा बल को भारत सरकार और राज्य सरकार की अनुमति लेने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। 



भारत सरकार ने यह निर्णय पाकिस्तान और बांग्लादेश के सीमा से लगते राज्यों को ध्यान में रखते हुए लिया है। क्योंकि पश्चिम बंगाल और पंजाब दोनों राज्यों में सीमाओं पर आएं दिन अपराधिक घटनाएं घटित हो रही थी। पंजाब में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के द्वारा हथियारों और ड्रग की तस्करी हो रही है। जबकि पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी मुसलमान घुसपैठ व गलत कार्यों में संलिप्त रहते हैं। इन्हीं सब कारणों से गृहमंत्रालय ने बीएसएफ को पश्चिम बंगाल और पंजाब की सरहदी सीमाओ के 50 किलोमीटर अंदर तक गिरफ्तार करने की शक्तियों में वृद्धि की है। जबकि इससे पहले बीएसएफ इन दोनों राज्यों में सीमा के 15 किलोमीटर अंदर तक ही किसी व्यक्ति से पूछताछ और गिरफ्तार कर सकती थी। 


लेकिन इसके अलावा गृहमंत्रालय ने पूर्वोत्तर राज्यों मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा और नागालैंड में बीएसएफ को 50 किलोमीटर अंदर तक कार्यवाही करने का अधिकार दिया है। इन सभी पांच राज्यों में बीएसएफ की कार्यवाही का दायरा 80 से घटाकर 50 किलोमीटर तक कर दिया है। इसी तरह गुजरात में बीएसएफ की कार्यवाही के दायरे को घटाकर 50 किलोमीटर तक कर दिया गया। हालाकि राजस्थान में कार्यवाही का दायरा पिछला वाला 50 किलोमीटर ही रखा गया है। 


जैसे ही केंद्र सरकार ने बीएसएफ को पंजाब और पश्चिम बंगाल की सीमाओं के 50 किलोमीटर अन्दर तक कार्यवाहीं करने के अधिकार दिया। तो पश्चिम बंगाल और पंजाब दोनों राज्यों से केंद्र के इस फैसले के खिलाफ़ प्रतिक्रियाएं आईं। 

पंजाब के सीएम चरण जीत सिंह चन्नी ने केन्द्र के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं भारत सरकार के एकतरफा फैसले की कड़ी निंदा करता हूं, जिसने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे 50 किलोमीटर के दायरे में बीएसएफ को अतिरिक्त शक्तियां देने का फैसला किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र का यह निर्णय संघवाद पर सीधा हमला है। फिर उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह को टैग करते हुए कहा कि मैं केंद्रीय गृह मंत्री अमितशाह से इस तर्कहीन निर्णय को तुरंत वापस लेने का आग्रह करता हूं।


जबकि पंजाब के भूतपूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह  ने केंद्र सरकार के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि इससे सीमा सुरक्षा बल राज्य की सीमा के 50 किलोमीटर अंदर तक अपनी कार्यवाहीयां कर सकतीं हैं तथा इससे पंजाब मजबूत होगा।

 


इसी तरह पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि यह संघीय ढांचे पर केंद्र का हमला है और वह राज्य के मामलों में हस्तछेप कर रहीं हैं। कानून व्यवस्था राज्य का मसला है। बीजेपी से टीएमसी में गए यशवंत सिन्हा ने कहा कि अब तक दिल्ली में दो शरारती दिमाग (पीएम मोदी और अमित शाह) वाले लोग ईडी, आयकर, सीबीआई, एनआईए, नारकोटिक्स ब्यूरो और ऐसी ही अन्य एजेंसियों का दुरुपयोग कर शासन कर रहे थे। अब उन्होंने उस सूची में बीएसएफ को शामिल कर लिया है। संघवाद नरक में जा सकता है।



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