जम्मू कश्मीर में आतंकियों के साथ 900 सहानुभूति रखने वालों को हिरासत में लेकर पूछताछ और लश्कर समर्थित 40 शिक्षक गिरफ्तार

जम्मू कश्मीर में पिछले कुछ दिनों में 5 गैर मुस्लिमों की आतंकवादियों ने निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। इन हत्याओं ने कश्मीरी पंडितों के कश्मीर में फिर से वापिस लौटने पर सवाल उठा दिए। क्यों कि भारत सरकार कश्मीरी पंडितों को सरकारी नौकरी देकर या अन्य किसी तरह से बसाना चाहती है। लेकिन कश्मीर के श्री नगर में एक हिंदू शिक्षक दीपक चंद और सिख शिक्षक सतविंदर कौर की आतंकवादियों ने जिस तरह से स्कूल में घुस कर मारा है। उससे कश्मीर घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडित और दुसरे गैर मुस्लिम लोग बहुत डरे हुए हैं। 



कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने जिन कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में सरकारी नौकरी देकर बसाया था। लेकिन श्रीनगर में आतंकियों ने लक्ष्य बनाकर दो गैर मुस्लिमों को मार डाला। इससे कश्मीर में दोबारा बसने वाले कश्मीरी पंडित भी बहुत खौफ में हैं और अब उन्होंने अपने घर से ज्यादा दूर निकलना भी बंद कर दिया है।  इनमे बहुत से कश्मीरी पंडित अपने अपने दफ्तरों में भी रिपोर्ट नही कर पा रहे हैं। 


लेकिन जब आतंकवादियों ने पांच गैर मुस्लिमों को निशाना बनाकर हत्या कर दी। तब जाकर भारत सरकार कुंभकर्ण की नींद से जागी है। अब जाकर भारत सरकार ने जम्मु कश्मीर में बहुत ही सख्त कार्रवाई करने का निर्णय ले लिया है। जिसके लिए वह अंतरराष्ट्रीय दबाव को भी अनसुना करने जा रही है। भारत सरकार ने अपने सबसे अच्छे अधिकारी व सुरक्षा सलाहकार को जम्मू कश्मीर में देश विरोधी ताकतों के खिलाफ़ कार्यवायीं करने का आदेश दे दिया है। जिसका असर जम्मू कश्मीर में 10 अक्टूबर को दिखने लगा भी है। 


भारत सरकार ने अजीत डोवाल को कश्मीर में भारत विरोधी ताकतों के खिलाफ़ कार्यवायीं करने का पूरा अधिकार दिया है। जिसके लिए कश्मीर में जम्मू कश्मीर पुलिस, सेना और सभी खुफिया एजेंसियों ने मिलकर कश्मीर में भारत के इतिहास का सबसे बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। जिससे भारत विरोधी और कश्मीरी पंडितों के खिलाफ़ आतंकी गतिविधियों में लिप्त लोगों में भगदड़ सी मची हुई है।

    

भारत सरकार की आतंकवादरोधी सबसे बड़ी एंजेसी एनआईए ने जम्मू कश्मीर में रविवार के दिन कश्मीर अन्नतनाग व श्री नगर की प्रमुख 8 जगहों पर छानवीन की है। जहां से इस्लामिक स्टेट के लिए 3 सहानुभूति रखने वाले लोगों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने गिरफ़्तार किया है। एनआईए ने इस्लामिक स्टेट के पकड़े गए जमीनी कार्यकर्ताओं के बारे में बताया है कि यह लोग कश्मीर में कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रहे थे और इसी के साथ ही यह आईएसआईएस के लिए लड़कों की भर्ती भी कर रहे थे। इसके साथ ही ये भारत के खिलाफ लोगों को भड़का रहे थे।


भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अलावा राज्य की पुलिस और सैन्य बलों ने जम्मू कश्मीर के कश्मीर के करीब 900 लोगों को हिरासत में लेकर जांच पड़ताल कर रहीं हैं। इन 900 लोगों में पत्थरबाज, आतंकियों के जमीनी कार्यकर्ता व पिछले सरेंडर किए हुए आतंकी शामिल हैं।  इन सभी  के साथ जम्मू कश्मीर पुलिस ने लश्कर से संबंध रखने वाले करीब 40 शिक्षकों को भी गिरफ्तार किया गया है। भारत सरकार के इतने सख्त रुख को देखकर घाटी में भगदड़ सी मच गई है। 


केन्द्र सरकार ने जैसे ही कश्मीर पंडितों को घाटी में फिर से बसाना शुरू किया है। तो इसमें उन लोगों को बहुत दर्द हो रहा है। जिन्होने कश्मीरी पंडितों की जमीन जायदाद व  उनके सेब के बाग बगीचों पर कब्जा कर रखा है। लेकिन अब जम्मू कश्मीर की सरकार कश्मीरी पंडितों की जमीन और सेब के बागानों पर से कब्जा हटवा रही है। जिसको लेकर स्थानीय कट्टरपंथी लोग भी कश्मीरी पंडितों के खिलाफ़ साजिश में शामिल हो सकते हैं। इसी कारण बहुत से कट्टरपंथी लोग पाकिस्तानी प्रायोजित आतंकवादियों का साथ दे रहे हैं। आतंकवादियों का पहला उद्देश्य है कि कश्मीर में माहोल कश्मीरी पंडितों के खिलाफ़ बना देना है। जिस कारण वो कश्मीरी पंडितों को चुन चुन कर निशाना बना रहे हैं।

जम्मू कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि जम्मू कश्मीर के अन्नतनाग और बांदीपुरा इलाके में बीती रात को दो अलग अलग जगहों पर 2 आतंकियों मार गिराया गया। इन दोनों आतंकियों में से एक की पहचान इम्तियाज अहमद डार के रूप में की गईं हैं। जो हाल में ही एक नागरिक की हत्या में शामिल था।

 



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