मस्तिष्क और आत्मा को शांति प्रदान करने वाला योगासन and वैरीकोसेल के लिए योग, साइनस के लिए योग

भ्रामरी प्राणायम (Bhramari Yoga)






मधुर ध्वनि (Sweat sound)

भ्रामरी प्राणायम (Bhramari pranayama) जब करतें हैं तब एक गूंज या आवाज आती है। जो भ्रामरी नामक मक्खी के उड़ते समय होने वाली ध्वनि की तरह होती है। इसलिए इसको भ्रामरी प्राणायाम कहते हैं।

क्रिया विधि (Method of action )

  1. सबसे पहले सतह पर आसन में बैठते हैं तथा रीढ़ (backbone) को सीधा कर हाथों को घुटनों ( Knees) पर रखतें हैं, अब तर्जनी उंगली (Index finger) को कान के अन्दर डालतें हैं।
  2. दोनों नाक के छिद्रों से स्वास को धीरे धीरे अंदर लेते हुए ओम शब्द (sound of Om)की ध्वनि निकालते हैं।
  3. ओम की ध्वनि के पश्चात सुरीली आवाज में कंठ से भौरे की तरह गुंजन करें।
  4. अब नासिका से स्वास को धीरे धीरे बाहर की ओर छोड़े।
  5. जब पूरी स्वास निकल जाती है तो भ्रामर की मधुर ध्वनि अपने आप बंद हों जाती है।
  6. इस भ्रामरी प्राणायम के क्रम को कम से कम 10 से 12 बार करना चाहिए।

भ्रामरी प्राणायम के लाभ

  1. वाणी और स्वर में मधुरता तथा मीठापन आता है।
  2. दिल के रोग(Heart Disease) के लिए अच्छा होता है।
  3. मन की एकाग्रता बढ़ती है और मन की चंचलता दूर हो जाती है।
  4. पेट के रोग (Abdomen Disease) कम हो जाते हैं।
  5. उच्च रक्तचाप (High blood pressure) के रोगियों के लिए लाभदायक होता है।
  6. इसको करते समय मस्तिक में एक दिव्य ज्योति (Divine light) जलती हुई प्रतीत होती हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि आंखो की दोनों भौहें के बीच कोई प्रकाश पुंज प्रकट हो गया हो।


नोट: 

इसको छोटे बच्चों से लेकर हर उम्र के लोग कर सकते हैं। इसको करने के लिए ज्यादा सावधानी की भी जरूरत नहीं होती है। यह सबसे सरल योग आसनों में से एक है।

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