भारतियों ने चीन को चिढ़ाते हुए ताइवान दिवस मनाया, उधर चीनी सरकार की सांसे अटक गई

भारतीय लोग चीन को चिढ़ाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते हैं अर्थात भारतीय चीन की ऐसी जगह पर सटीक निशाना साधते हैं कि वह फड़फड़ाने लगता है। यहीं हाल 10 अक्टूबर के दिन हुआ था। जब हजारों की संख्या में भारतियों ने ताइवान दिवस को मनाया था और ट्विटर पर एक बडा कैंपेन चलाया। जिससे भारतियों को तो मजा आ रहा था और दूसरी तरफ चीनी सरकार की जान निकली जा रही थी। ताइवान दिवस को भारत के कुछ जानें माने  भारतियों ने खूब धूम धाम से मनाया। 



दिल्ली बीजेपी के नेता तेजिंदर सिंह बग्गा ने तो ताइवान दिवस को इस तरह मनाया है। जिससे चीन को मिर्ची लगना स्वाभाविक है। उन्होंने ताइवान दिवस को केक काट कर मनाया। यह केक ऐसी वैसी नहीं थी। बल्कि केक बहुत सजी हुई थी। जिस पर ताइवान दिवस की तारीक 10 अक्टूबर अंकित थी और साथ में ही केक के नीचे ताइवान दिवस की शुभकामनाएं लिखा था।

      

इसी तरह तेजिंदर सिंह बग्गा ने पिछले वर्ष ल्ली में चीनी दूतावास के बाहर एक बडा सा होर्डिंग लगाया था। जिस पर भी  ताइवान के बनने की तारीक 18 अक्टूबर लिखी थी। इस बात भी चीनी सरकार बहुत नाराज हुई थी। 

भारत के एक ओर नागरिक नवनीत कुमार ने भी ताईवान दिवस मनाते हुए लिखा। जैसा कि  हम भारतीय भारत में ताइवान दिवस को इस तरह से मना रहे हैं।  नवनीत ने आगे अपने विचारों को प्रदर्श

राकेश नाम के एक इंडियन नागरिक ने अपनी भावनाओं को भारतीय सरकार के आगे।

एक मैं भारतीय नाम से ट्वीटर यूजर ने अपनी सचिन कुमार के नाम से एक भारतीय ने ट्विटर पर लिखा कि मैं ताइवान के साथ खड़ा हूं और उसको अपनी संप्रभुता की रक्षा करने का अधिकार है। सचिन कुमार कहते हैं कि हम भारतीय सभी ताइवानी  पुरुषों ब महिलाओ को ताइवान के राष्ट्रीय दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं हैं। सचिन कुमार ने अपने ट्विट में एक फ़ोटो को शेयर किया था। जिसमें भारत के पीएम मोदी और ताइवान की राष्ट्रपति की  फ़ोटो है। जिसमें दोनों को चाय के को चीयर करते हुए दिखाया गया है। जिसमें हिंदी चीनी भाई भाई के की तरह ही हिंदी ताइवानी भाई भाई लिखा हुआ है।


भारतियों का ताइवान के प्रति इस तरह का लगाव देखकर ताइवान के विदेश मंत्रालय का  का दिल भर आया और भारतीयों  के इस अच्छे हाव - भाव  का जबाव देते हुए ट्वीटर पर लिखा कि दुनिया भर से साथी लोकतान्त्रिक देशों से राष्ट्रीय दिवस पर आने वाले संदेशों को देखकर  ह्रदय को छू लेने जैसा है। खासकर भारत से हमारे मित्रों और सहयोगियों के संदेशों ने ताइवान के लोगो का दिल छू लिया है। इस तरह का सहयोग हमें  अपने लोकतंत्र को तानाशाही के चंगुल से बचाने को प्रेरित करता है। हम ताइवान के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगे और अपनें ताइवान की भी रक्षा करेंगे।

जैसे ही ताइवान के विदेश मंत्रालय का भारतियों के लिए धन्यवाद संदेश आया। चीन के भारत में राजदूत के प्रवक्ता ने अपनी भड़ास भारतीय मीडिया आउटलेट्स पर निकाली। भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने अपने ट्वीट में लिखा कि हाल ही में, भारत में कुछ मीडिया हाउस और कुछ व्यक्तियों ने ताइवान का समर्थन करने के लिए प्लेटफॉर्म प्रदान किए हैं। जिन्होंने "दो चीन", या "एक चीन", "एक ताइवान" की वकालत की है। जो सीधे तौर पर "एक चीन नीति" का उल्लंघन है। इस तरह के प्रयास व्यर्थ में समाप्त होने के लिए बाध्य है। चीन के दूतावास के प्रवक्ता ने यहां कुछ मीडिया हाउस व व्यक्तियों के बारे में बताया। तो यहां उनका इशारा भारत भारत के अंतरराष्ट्रीय अंग्रेजी न्यूज चैनल वियोन और बीजेपी नेता तेजिंदर सिंह बग्गा की ओर था।

यहां गौर करने वाली बात है कि चीन के दूतावास के प्रवक्ता ने वन चाइना पॉलिसी के स्थान पर "एक चीन नीति" शब्द का प्रयोग क्यों किया है।  दरअसल भारत सरकार ने 1962 में चीनी एक चीन नीति को स्वीकार कर लिया था।  जिस कारणवश भारत सरकार ताइवान से सीधे तौर पर कोई भी संबंध नहीं रखती है और न कोई ज्ञापन और न कोई एएमयू पर हस्ताक्षर  पर रखना चाहती हैं। एक चीन नीति के अनुसार , जो यह दावा करती है कि चीन नाम के तहत केवल एक ही संप्रभु राज्य है। चीन की वामपंथी सरकार दो राज्य की नीति का विरोध करती है। चीन की सरकार केवल चीनी जनवादी गणराज्य (PRC)  को ही मुख्य चीन मानता है और वह चीनी गणराज्य (ROC) का विरोध करता है। क्योंकि दोनों में चीन शब्द का प्रयोग हुआ है।

चीन जानता है कि भारत एक लोकतान्त्रिक देश है और एक लोकतान्त्रिक सरकार बहुमत के आधार पर नीतियां भी बदल सकती है। जबकि भारत की ज्यादातर जनता अब एक चीन नीति में विश्वास नहीं करती है। इसलिए भारतीय लोग हर वर्ष 10 अक्टूबर को ताइवान दिवस मनातें हैं। इन्हीं सब कारणों से चीन बहुत चिंतित है कि कहीं भारतीय सरकार लोगों के दबाव में आकर एक चीन नीति को अस्वीकार कर सकती है। इसके लिए कुछ पिछले वर्षों से सरकार पर भारतियों ने दबाव भी बनाना शुरु कर दिया है। भारतियों का कहना है कि जब चीन भारत के पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से चीन पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर निकाल सकता है और यहां पर चीन ने भारत की संप्रभुता का उल्लघंन किया है। इसलिए भारत सरकार को एक बार पुनः एक चीन नीति में के बारे में सोचना चाहिए। 


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