राममंदिर निर्माण कार्य बहुत तेजी से प्रगति कर रहा, राममंदिर के निर्माण का प्रथम चरण पूर्ण हुआ

राममंदिर निर्माण का कार्य बहुत तीव्रता से प्रगति कर रहा है। राम काज में सभी इंजीनियर, मजदूर और दूसरे लोग दिन रात मेहनत कर रहे हैं। यहां तक सभी इंजीनियर व मजदूर कोरोना काल में भी नहीं रूके थे। सभी ने कोविड 19 प्रोटोकॉल अपनाते हुए कार्य जारी रखा था। कोविड 19 के समय सरकार ने सभी प्रकार के निर्माण कार्यों को जारी रखने की छूट दी थी। इसलिए सभी इंजीनियर व मजदूर कोरोना की दूसरी लहर के समय राम मंदिर निर्माण कार्यों में कार्य कर रहे थे। आज उनकी इसी मेहनत का नतीज़ा है कि राममंदिर का प्रथम चरण का कार्य पूर्ण हो गया है।





राममंदिर निर्माण के प्रथम चरण पूर्ण हो जानें की यह जानकारी "श्रीराम जन्मभूमि तीरथ क्षेत्र" ने ट्विटर पर शेयर की हैं। उन्होंने  राममंदिर निर्माण कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण कार्य बहुत तीव्र गति से चल रहा है। उन्होंने आगे बताया कि दिसंबर 2023 तक मंदीर के गर्भगृह में भगवान राम के दर्शन प्रारंभ हो जायेगें।



फिर श्रीराम जन्म भूमि तीरथ क्षेत्र के ट्रस्ट ने आगे बताया कि राममंदिर की नींव हेतु भूमि को मज़बूत बनाने का प्रथम चरण पूर्ण हो गया है। उन्होंने दूसरे चरण के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मंदिर निर्माण का दूसरा चरण नवंबर के मध्य तक पूर्ण कर लिया जायेगा। इसके बाद मंदिर की फर्श का निर्माण कार्य शुरू किया जायेगा।


राममंदिर निर्माण कार्य तो शुरु हो गया है। लेकिन यहां तक पहुंचने में हजारों लोगों ने अपनी उम्र को बलिदान कर दिया। राममंदिर संघर्ष का प्रथम चरण 1858 से शुरू हुआ था। जो कि पहला कानूनी तौर पर संघर्ष था। 30 नवंबर 1858 को अयोध्या के मोहम्मद सलीम ने सिख निहंगो के एक समूह के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई थी। कहा जाता है कि सिख निहंगो ने बाबरी मस्जिद पर अपना निशान साहब और राम का नाम लिख दिया था। 


इसके बाद 1949 में बाबरी मस्जिद के अंदर रामलला की मूर्ति मिली।  हिंदू और मुस्लिम दोनों पछों का कोर्ट जानें का यह सबसे बड़ा कारण बना था। जिसके बाद भारत सरकार ने बाबरी मस्जिद से संबन्धित 2.33 एकड़ भूमि को विवादित घोषित कर बंद कर दिया था। लेकिन 1986 में जिला न्यायालय ने मंदिर के कपाट पुजा करने के लिए खोलने का आदेश दिया।


6 दिसंबर 1992 को सबसे बड़ी घटना घटित हुई थी। जिसको भारत में बाबरी विध्वंस के नाम से जाना जाता है। इसी दिन आक्रोशित भीड़ बाबरी मस्जिद के ढांचे पर चढ़ गई और उसने बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर दिया। इस समय बीजेपी की सरकार थी और सरकार के मुखिया कल्याण सिंह थे। जिन्होंने भारत सरकार के खिलाफ़ जाते हुए आक्रोशित भीड़ पर गोलियां  चलाने से साफ़ इंकार कर दिया। बाबरी विध्वंस के बाद कल्याण सिंह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।


इस घटना के बाद 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2-1 से निर्णय देते हुए। विवादित भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटकर राम लला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दी। लेकिन कोर्ट के इस फैसले से कोई पार्टी खुश नहीं थी। इसके बाद तीनों पक्षों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गईं। जहां यह केस करीब 10 वर्ष  चला। 


हालाकि 9 नवंबर 2019 को देश के इतिहास के सबसे पुराने  मुदमें के निपटारे की तारीख भी आ गई। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को विवादित भूमि पर राम लला के अधिकार को मान्यता दे दी और कोर्ट ने सरकार को एक आदेश दिया कि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ भूमि देने का आदेश दिया।


5 फरबरी 2019 को भारत के प्रधानमन्त्री ने संसद में 15 सदस्यीय श्रीराम जन्मभूमि तीरथ क्षेत्र की स्थापना की। इसी ट्रस्ट को श्री राममंदिर निर्माण की जिम्मेदारी दी गई। आपको जानकार हैरानी होगी कि सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीरथ क्षेत्र ट्रस्ट को मात्र दान में 1 रूपए दिया था।


प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को श्री राम की स्थापना के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम सम्पन्न किया था। जिनके साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत जी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी भी उपस्थित रहे थे। इस कार्यक्रम को भारत के लोगों ने बड़ी ही श्रद्धा से देखा था। 


हिंदुओं की भावनाएं राममंदिर से इतनी जुड़ी हुई हैं कि केवल दो महीने में राम मंदिर के लिए चंदा 3 हज़ार करोड़ एकत्र हो गया था। राममंदिर को भव्य बनाने के लिए मंदिर के आकार को दो गुना बढ़ा दिया गया। जिसके लिए मंदिर के नक्शे में तीसरी मंजिल का निर्माण भी किया गया। 


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