शलभासन मुद्रासन से होने वाले लाभ जिससे वक्ष स्थल आकर्षित बनता है

शलभासन

शलभासन में शरीर एक टिड्डी की भांति बन जाता है।  शलभासन एक संस्कृत शब्द है जो विशेष रूप से दो शब्दों से मिलकर बना है। जिसमें पहला शब्द "शलभ" जिसका अर्थ "टिड्डी" होता है और दूसरा शब्द आसन का अर्थ "मुद्रा" से है।  इसलिए इस शलभासन मुद्रा को टिड्डी मुद्रासन (Locust Pose)भी कहतें हैं।


शलभासन मुद्रासन करने की क्रिया विधि 

1. सबसे पहले एक समतल भूमि पर चटाई या दूसरी कोई आराम दायक वस्तु को बिछा कर लेट जाइये।

2. अब सबसे पहले हाथों को पीछे की ओर लंबा करते हुए तथा सिर को थोड़ा ऊपर की ओर उठाओ।

3. टांगों को पीछे की ओर लंबा करते हुए थोड़ा सा 30° कोण बनाते हुए ऊपर उठाओ।

4. छाती को फैलाते हुए ऊपर की ओर उठाओ।

5. पेट पर (Core) पीठ के निचले हिस्से की सहायता करने के लिए लातें हैं और पीठ का सारा वजन पेट पर आ जाता है।

6. पीठ के पिछले सिरों को थोडा लंबा करते हैं दोनों सिरों को थोडा उठा हुआ रखते हैं।

7. शरीर के कूल्हे (Hips)जमीन से पूरी तरह से छूतें हुए हों।

 8. दोनों पैरों की जांघें बीच में होनी चाहिए।

शलभासन मुद्रा से होने वाले लाभ 

1. रीड की हड्डी के लिए लाभदायक 

शलभासन योग मुद्रा से रीड की हड्डी लचीलापन और अच्छी तरह से कार्य करती है। क्यों कि यह मानव के परिधी तांतिका तंत्र का निर्माण करती है। रीड की हड्डी से ही सारे संवेदक ग्राही (Sensory receptors) मस्तिष्क तक संदेश ले जाते और मस्तिष्क से आदेश को पूरे शरीर में संचारित करते हैं।

2. वक्ष स्थल 

इस योग मुद्रा से वक्ष स्थल में शिथिलता और मासपेशियों में नयेपन का संचार करता। वक्ष स्थल में रक्त के संचार में सुधार होता है। इस योग मुद्रा को लगातार करने से महिलाओं का वक्ष स्थल बहुत आकर्षक आकार लेता है और साथ में पुरुषों का भी।

3. रक्त संचार में सुधार

इस योग मुद्रा से शरीर की सभी नसों में  मुलायमपन और शिथिलता की वृद्धि होती है। जिससे व्यक्ति के शरीर में रक्त के प्रवाह में कोई रुकावट उत्पन्न नहीं होती है। 

4. महिलाओं के नितंबों का आकर्षक आकार बनना

इस योग मुद्रा को महिलाओं द्वारा प्रतिदिन करने से उनका वक्ष स्थल बहुत ही खूबसूरत और उभार आता है और साथ ही महिलाओं के नितंबों की मासपेशियों को उत्तेजित करता है जिससे वह आकर्षक आकार धारण करते हैं।

5. कब्ज और गैसीय दोष

शलभासन मुद्रा से पेट परदवाबपड़ता है, जिससे अपच दूर होती है और पाचन क्रिया में सुधार होता है। साथ ही गैस्ट्रिक अम्ल का निर्माण होता है।  

6.ऊर्जा और गर्मी का संचार

शलभासन मुद्रा से शरीर में ऊर्जा और गर्मी का संचार होता है क्यों कि इस मुद्रासन को करते समय रक्त का संचार बहुत ही तेजी से होता है। जिससे शरीर में ऊर्जा और गर्मी का निर्माण होता है। यह ऊर्जा उपापचय क्रियाओं (Metabolic processes) से प्राप्त होती है।

शलभासन योग को कोन कोन करने से बचे?

1. गर्भवती महिलाओं

गर्भवती महिलाओं को इस योग मुद्रा को बिल्कुल ही नहीं करना चाहिए। क्यों गर्भावस्था के समय इस योग को करते समय पेट की मासपेशियों में खिंचाव पैदा होगा। जो मां और बच्चा दोनों के लिए बहुत ही खतरनाक होता है।

2. मासिक धर्म के बीच

 महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान इस योग मुद्रा को करने से बचना चाहिए। क्यों कि इस योग को मासिक धर्म के दौरान करने से महिलाओं में दर्द अधिक हो सकता है।

3. उच्च रक्तचाप

जब महिलाओं और पुरुष दोनों को  उच्च रक्तचाप के मामले में इस शलभासन मुद्रा को नही करना चाहिए। क्यों कि इससे रक्त चाप में और वृद्धि हो सकती है।

4. रीड की हड्डी में दर्द के समय

जब रीड की हड्डी में दर्द हो रहा हो तब इस योगासन को बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

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