टर्किश मीडिया का आरोप, भारत और पश्चिमी जगत ने टर्की को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट में शामिल कराया

दुनिया में काला धन और मनी लांड्रिंग की निगरानी करने वाली संस्था "फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स" है। जिसने अपनी हाल की मीटिंग में कुछ देशों को "ग्रे लिस्ट" में शामिल किया और कुछ देशों को ग्रे लिस्ट से बाहर भी किया है। 

लेकिन इस बार एफएटीएफ  ने अपनी 22 अक्टूबर 2021 की मीटिंग में तुर्की को ग्रे लिस्ट में डाल दिया है। FATF ने तुर्की को ग्रे लिस्ट में डालने के लिए 2 प्रमुख वजह बताई। जिसमें उन्होंने कहा कि तुर्की आतंकी संगठनों को फंडिंग और काले धन को वैध बनाने जैसे कार्यों में संलिप्त है। 



टर्किश मीडिया का भारत और पश्चिमी शक्तियों पर आरोप

टर्किश मीडिया खासकर तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी टीआरटी आरोप है कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स अब पश्चिमी जगत व भारत का एक हथियार बन गया है। जिसका इस्तेमाल वो अपने विपरीत जानें वाले देशों पर करते हैं।

टर्किश मीडिया ने कुछ कारण भी गिनाए। जिनमें रूस से प्राप्त मिसाइल डिफेंस सिस्टम एस 400 है। जिसको लेकर अमेरिका और तुर्की के संबंध खराब हो गए हैं और अमेरिका ने अपने CAATSA (Countering America's Adversaries Through Sanctions Act) कानून के तहत तुर्की पर प्रतिबंध लगा रखे हैं। 


जबकि दुसरी तरफ तुर्की ने अपने भूमध्य सागर में  अधिकारों को लागू करने का प्रयास किया और भूमध्य सागर के बड़े क्षेत्रफल पर अपना अधिकार जताया। तब ग्रीस ने तुर्की के भूमध्य सागर पर अधिकारों पर आपत्ति जताई और तुर्की के संबंध ग्रीस से खराब हो गए। टर्किश मीडिया ने आगे कहा कि ग्रीस यूरोपियन यूनियन का एक सदस्य है। इसलिए तुर्की के संबंध यूरोपीय संघ से भी खराब हो गए हैं। 


इसके अलावा टर्किश मीडिया ने सीरिया और लीबिया के मामलों में कहा कि तुर्की इन दोनों देशों में अपने नाटो सहयोगियों के ख़िलाफ़ खड़ा है और सीरिया के 40 लाख से ज्यादा शरणार्थियों को शरण दे रखी है। तब भी यूरोपीय संघ और अमेरिका तुर्की पर आतंकवादियों को पैसें देने का आरोप लगा रहें हैं। इन्हीं सब कारणों से फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की 22 अक्टूबर की मीटिंग में तुर्की को ग्रे लिस्ट में डाल दिया गया। 


टर्किश मीडिया FATF के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा है। जिसमें उसका साथ पाकिस्तान भी दे रहा है। पाकिस्तान भी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट में शामिल है। उस पर भी वही आरोप हैं। जो तुर्की पर हैं। वैसे पाकिस्तान 2018 से FATF की ग्रे लिस्ट में हैं। पाकिस्तान ने तुर्की की सहायता से FATF की ग्रे लिस्ट से निकलने का बहुत प्रयास किया था। लेकिन FATF का सदस्य देश तुर्की खुद ग्रे लिस्ट में डाल दिया गया। 


टर्किश मीडिया ने पाकिस्तान के बारे में कहा कि पाकिस्तान हमेशा फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की सभी शर्तो को पूरा कर देता है। लेकिन FATF किन्हीं कारणों से इन शर्तो में अचानक वृद्धि कर देता है। टर्किश मीडिया ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के एक बयान को आधार बनाते हुए कहा कि नई दिल्ली पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट में रखने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करेगी। 


पाकिस्तान और टर्किश मीडिया ने मिलकर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की विश्वनीयता पर हमला करने का निर्णय लिया। जिससे जो भी FATF की ग्रे लिस्ट में देश शामिल हैं। वो फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की शर्तो को मानने से इंकार कर दे। पाकिस्तान को यह खूब मालूम है कि वह कभी भी आतंकियों का साथ नहीं छोड़ेगा और जिससे वह FATF की ग्रे लिस्ट से भी बाहर नहीं निकल सकता है। इसीलिए पाकिस्तान ने तुर्की के साथ मिलकर FATF के खिलाफ दुष्प्रचार करने का निर्णय लिया। 


इस काम में टर्किश मीडिया का साथ देते हुए पाकिस्तानी पीएम के विशेष सलाहकार रउफ हसन ने अपने एक ट्वीट में FATF के खिलाफ लिखते हुए कहा कि वित्तीय कार्रवाई कार्य बल की जो विश्वनीयता थीं वो अब खो चुकी है। अब वह निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं  रही है। इसके बजाय वह पश्चिमी  साम्राज्यवादी शक्तियों  के एजेंडे का एक वास्तविक हाथ बन गया। उन्होंने आगे कहा कि अब हमें अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का समय आ गया है। 

रउफ हसन का ट्वीट

टर्किश मीडिया की माने तो वित्तीय कार्रवाई कार्य बल  (FATF) का अब राजनीतिकरण हो चुका है और पश्चिमी देशों के साथ साथ भारत का हथियार बन चुका है। 

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल(FATF) 

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल एक अंतरराष्ट्रीय  मनी लांड्रिंग और आतंकी संगठनों को फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था है। यह मनी लांड्रिंग और आतंकी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने वाले देशों को दंडित करती है।  जिसके लिए वह दोषी देश को अपनी ग्रे लिस्ट में डाल देती है। जिसके कारण दंडित देश को विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय  मुद्रा कोष से कर्ज मिलना मुश्किल हो जाता है। इसी के साथ ही विदेशी निवेशक भी ग्रे लिस्ट में शामिल देशों से अपना पैसा निकालने लगते हैं।

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल की स्थापना सन् 1989 में जी 7 देशों की संस्तुति पर हुई थी। इसकी 2 अधिकारिक भाषाएं अंग्रेजी और फ्रांसीसी हैं। जिसका मुख्यालय फ्रांस के पेरिस शहर में है।  इसके सदस्यों की संख्या 39 है और वर्तमान समय में इसके अध्यक्ष मार्कस प्लेयर है। इसको संक्षिप्त रूप रूप से FATF के नाम से भी जानते हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post