कश्मीर में मोदी सरकार देश विरोधियों को बर्दाश्त करने के मूढ़ में कतई नहीं, ऐसी कार्यवायी जो सीमा रेखा तय कर दे

मोदी सरकार कश्मीर घाटी में देश विरोधियों को जरा सा भी बर्दाश्त करने के मूढ़ में नहीं है। जिसका असर अब जम्मू कश्मीर की पुलिस कार्यवायीं में दिखने लगा है। 

भारत पाकिस्तान टी 20 मैच के बाद लगे भारत विरोधी नारें

अभी हाल में भारत और पाकिस्तान का टी-20 विश्व कप का मैच "संयुक्त अरब अमीरात" के दुबई क्रिकेट स्टेडियम में हुआ था। जिसमें भारत की क्रिकेट टीम पाकिस्तान की क्रिकेट टीम से हार गई थी। जिसके बाद भारत में मौजूद कुछ भारत विरोधी लोगों ने जमकर खुशी मनाई और कुछ जगहों पर भारत विरोधी नारें भी लगाये गये। 


श्रीनगर के कॉलेज में लगें भारत विरोधी नारे

इसी तरह के भारत विरोधी मानसिकता वाले कुछ विद्यार्थियों ने कश्मीर के "श्रीनगर" में भारत विरोधी नारे लगाए और पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की प्रसंशा की।जब भारतीय टीम 24 अक्टूबर 2021 को टी-20 विश्व कप में पाकिस्तानी क्रिकेटर टीम से हार गई। तो भारत की हार से खुश होकर मेडीकल कॉलेज के इन विद्यार्थियों ने अपनी मानसिकता का प्रर्दशन कर दिया। इन विद्यार्थियों बहुत सारे वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह पूरे देश में फैल गए हैं। जिसको देखकर हर भारतीय बहुत गुस्सा में हैं। 

यह घटना 24 अक्टूबर को कश्मीर के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) और शेर ए कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) की है। जहां कुछ अल्पसंख्यक समुदाय के लड़के और लड़कियों ने भारत विरोधी नारे लगाए। 


विशेष

यह लोग सुख सुविधाएं भारत से लेते हैं और गुणगान भारत के दुश्मन देश का करते हैं। क्योंकि ये जिस मेडीकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहें हैं। वह भारत के करदाताओ की मेहनत का पैसा है। जिसके माध्यम से यह आराम की जिंदगी जी रहें हैं। इनको पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों की जिन्दगी नहीं दिखती हैं। जो नरक से ज्यादा बद्तर जिन्दगी जी रहें हैं। जबकि भारत सरकार इन लोगो को पूरी सुख सुविधाएं उपलब्ध करा रहीं है। अब तो धारा 370 हट जानें के बाद भारत सरकार ने सीधे लोगों को अपनी योजनाओं से लाभान्वित करना भी शुरु कर दिया है। 

हालाकि हर भारतीय यह भी खूब याद रखें। कि यह भारत विरोधी मुट्ठी भर लोग हैं। हमें सभी कश्मीरी भाइयों को शक की नजर से हरगिज़ नहीं देखना है। 

UAPA के तहत एफआईआर दर्ज

लेकिन जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ। तो जम्मू कश्मीर की सरकार और पुलिस प्रशासन दोनों हरकत में आए और उन्होंने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया। जिसका नतीजा बहुत ही सख्त कार्रवाई के रूप में प्रकट हुआ। इन सभी मेडीकल कॉलेज के विद्यार्थियों ने सपने में कभी नहीं सोचा होगा कि वे सब इसके बाद बहुत पछताएंगे। जिसका सबसे बड़ा कारण है कि जम्मू कश्मीर पुलिस ने इन सभी लड़के और लड़कियों पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA), 1967 की धारा 13 और भारतीय दंड संहिता 505 के तहत मामला दर्ज किया है। इस मामले में एफआईआर श्री नगर के पुलिस थाने सौरो और करन नगर में दर्ज कर ली गई है और पुलिस ने अपनी जांच पड़ताल भी शुरू कर दी है। 

केंद्र सरकार द्वारा सख्त कार्रवाई की अनुमति

हम इस बात से अनुमान लगा सकते हैं कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम एक्ट केवल भारत सरकार के गृह मंत्रालय की अनुमति के बाद ही पुलिस लगा सकती है। अब जब पुलिस सरकारी मेडिकल कॉलेज और शेर ए कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के विद्यार्थियों पर यूएपीए एक्ट लगाने का निर्णय लिया है। तो इसकी अनुमति अमित शाह के गृह मंत्रालय की अनुमति ने ही दी होंगी। 

भारत को पाकिस्तान से सीख लेनी चाहिए

हम इन मामलों में पाकिस्तान से सीख सकते हैं। क्योंकि पाकिस्तान में विराट कोहली के फैन उमर दराज ने भारतीय क्रिकेट टीम के समर्थन में अपनी छत पर भारतीय झंडा फहराया दिया था। जिसके बाद इस व्यक्ति को पाकिस्तानी पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। उसको पाकिस्तानी कोर्ट ने 10 वर्ष की सख्त सजा दी थी और उसने अभी तक 6 वर्ष की जेल काट भी दी है। हालाकि मजेदार बात यह है कि मैच भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हो रहा था न कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के साथ।

यूएपीए एक्ट (UAPA ACT) क्या है?

गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम संशोधन विधेयक (UAPA) को भारत सरकार के गृहमंत्री अमित शाह ने 2019 में लोकसभा में पेश किया था। जो लोकसभा में पास 24 जुलाई 2019 को हुआ था। इसके बाद इसको 2 अगस्त 2019 को ऊपरी सदन राज्य सभा में पास हुआ। यूएपीए कानून गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 का संशोधित रुप है। जो भारत की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को असीमित अधिकार देता है।


UAPA ACT बहुत ही सख्त कानून है और जिस पर यह लगता है। उसका भविष्य बर्बाद होता ही नहीं और उसके साथ उसकी जिंदगी भी नरक बन जाती है। क्योंकि इस कानून के माध्यम से पुलिस की गिरफ़्तारी के बाद 90 दिनों तक जमानत अर्जी तक दाखिल नहीं होती है। जब 90 दिनों के बाद पुलिस जांच पूर्ण हो जाती है। तब आरोपी कोर्ट में जमानत याचिका दायर कर सकता है। वहां भी कोर्ट पुलिस के द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों के आधार पर जमानत देगी। 


अगर पुलिस को इस कानून की धारा 13 आरोपी पर लगानी है तो उसे केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की अनुमति की आवश्कता पड़ती है और धारा 16, 17 और 18 के मामले में पुलिस को राज्य सरकार की अनुमती की जरूरत पड़ती है।

UAPA एक्ट का उद्देश्य

इसका मुख्य उद्देश्य भारत की अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ निर्देशित गतिविधियों से निपटने के लिए शक्तियां उपलब्ध कराना था। इसके साथ ही यह कानून भारत की सुरक्षा एजेंसियों को अधिकार देता है कि वह किसी भी व्यक्ति और संगठन को अपनी जांच पड़ताल के बाद आतंकवादी घोषित कर सकतीं हैं। इस कानून से अधिकतम 7 वर्ष की सख्त सजा हो सकती है। 

ट्विटर पर मौजूद भारत विरोधी स्टूडेंट का विडियो

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