कंगना रनौत ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने के बाद ऐसा कुछ किया, जिससे वह लोगों के दिलों पर छा गई

कंगना रनौत भारतीय हिन्दी सिनेमा जगत की विख्यात अभिनेत्री हैं। जिनका अभिनय कला बहुत ही सुंदर और आकर्षक है। इसलिए उन्होंने अपने कौशल के दम पर झांसी की रानी, क्वीन, तनु वेड्स मनु रिटर्न, क्रिश 3 और पंगा जैसे हिट फिल्में दी हैं। 


अभी हाल में ही कंगना रनौत की फिल्म थलावी रिलीज हुई है। जिसमें उन्होंने तमिलनाडु की भूतपूर्व मुख्यमंत्री जयललिता जी का किरदार निभाया है। जिसमें उन्होंने अपनी एक्टिंग का करिश्मा पूरे भारत वर्ष को दिखाया है। कंगना रनौत एक राष्ट्रवादी महिला हैं। जो हमेशा देश की भलाई के लिए खड़ी रहती हैं।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

कंगना रनौत के बेहतरीन अभिनय के कारण उनको राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ। जिसको लेने वह अपने माता और पिता दोनों के साथ गईं थीं। कंगना रनौत को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त होने पर उन्होंने कहा कि वह आज अपनी दो उपलब्धियों के लिए  फिल्म पुरस्कार  प्राप्त हुए। उन्हें यह पुरस्कार मणिकर्णिका अर्थात झांसी की रानी (2019) और पंगा (2020) के लिए प्राप्त हुआ है। उन्होंने आगे बताया है कि मैंने मणिकर्णिका का सह निर्देशन भी किया और झांसी की रानी का अभिनय भी किया था।

कंगना रनौत का अंडमान द्वीप पर पहुंचना

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त करने के बाद वह सीधे अंडमान द्वीप समूह पर पहुंच गई। जहां वह पोर्ट ब्लेयर के काला पानी और सेल्यूलर जेल में वीर सावरकर की सेल का दौरा किया था। कंगना रनौत के वीर सावरकर की सेल में पहुंचने के बाद उन्होंने सावरकर की दयनीय स्थिति का बहुत ही मार्मिक चित्रण किया। इसके साथ ही उन्होंने पोर्ट ब्लेयर की सेल्यूलर जेल का भी वर्णन किया। जिसके बाद कंगना रनौत ने वीर सावरकर की बहादुरी और उनके द्वारा सेल्यूलर जेल में भुगते असहनीय पीड़ा की भी व्याख्या की।

सेल्यूलर जेल का वर्णन

कंगना रनौत ने सेल्यूलर जेल का वर्णन करते हुए कहा है कि सेल्यूलर जेल चारों ओर से पानी से घिरी हुई है और जेल की बड़ी बड़ी दीवारें हैं। जहां हवा भी नसीब नहीं होती है। यह जेल ऐसी है। कि यहां से किसी का बच निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। इसी के साथ वीर सावरकर को उनकी सेल में भी मजबूत जंजीरों में बांध कर रखा जाता था। जो यह दर्शाता है कि शत्रु वीर सावरकर से कितना डरता था। उन्होंने आगे कहा कि वीर सावरकर के साथ अंग्रेजो ने बहुत ज्यादा क्रूरता करी। लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिरोध और दृढ़ संकल्प के साथ हर क्रूरता का सामना किया।

भारतीय पाठयपुस्तक और वीर सावरकर की सेल

कंगना रनौत ने भारत के पाठ्यक्रम पर हमला करते हुए कहा है कि हमें वीर सावरकर के बारे में पाठयपुस्तकों में जो कुछ पढ़ाया गया। वह पुस्तकें सच्चाई नहीं व्यक्त कर रहीं हैं। लेकिन वीर सावरकर की सेल आजादी की सच्चाई है और वह वीर सावरकर की वास्तविक जीवन शैली को अभिव्यक्त कर रहीं हैं। कंगना रनौत ने वीर सावरकर को उनकी सेल में ही उनको अपनी कृतज्ञता और गहरा सम्मान प्रकट किया।


इसके बाद उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किए फ़ोटो के कैप्शन में लिखा है कि स्वतंत्रता संग्राम के इस सच्चे नायक को मेरा कोटि कोटि नमन। जय हिन्द।

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