तालिबान अब दुनिया को धमकी देने पर उतर आया, तालिबान प्रवक्ता ने मीडिया से बडी खतरनाक बात कहीं।

तालिबान अपनी सरकार को पहचान दिलवाने के लिए हर कोशिश कर रहा है। लेकिन अफ़गानिस्तान पर कब्जे के 3 महीनों के बाद भी दुनिया का कोई भी देश तालिबान सरकार को मान्यता देने को तैयार नहीं है। यहां तक तालिबानियों को अपने घर में शरण देने वाले पाकिस्तान ने भी आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी है और पाकिस्तान का दोस्त चीन भी तालिबान को मान्यता देने में हिचक रहा है। क्योंकि चीन अमेरिका, भारत और दुसरे पश्चिमी देशों के कदम का इंतजार कर रहा है। लेकिन सरकार को मान्यता न मिलते देख, तालिबान बहुत ज्यादा निराश हो रहा है। जिस वजह से वह पूरी दुनिया को धमकी देने पर उतर आए हैं। 




तालिबान के प्रवक्ता "जब्बीहुल्लाह मुजाहिद" ने मीडिया को इंटरव्यू देते हुए कहा कि यदि अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में तालीबान सरकार को मान्यता नहीं दी। तो अफ़ग़ानिस्तान की क्षेत्रीय समस्या पूरी दुनिया की समस्या बन जायेगी। तालीबान के इस बयान से ऐसा लग रहा है कि तालीबान अमेरिका को और पूरी दुनिया को आंतकवाद का भय दिखा रहा है। 


मुजाहिद ने आगे कहा कि अमेरिका को जल्द से जल्द अफ़ग़ानिस्तान से राजनयिक संबंध बनाने चाहिए। क्योंकि अमेरिका का अफ़ग़ानिस्तान के युद्ध में कूदने का प्रमुख कारण तालीबान सरकार के साथ संबंध नहीं थे। 


जबकि पूरी दुनिया जानती है कि वह तालीबान ही था। जिसने ओसामा बिन लादेन को अमेरिका को देने से मना कर दिया। लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका अल्कायदाय के 11 सितंबर 2001 के हमले से रौद्र रूप में था। जैसे ही तालीबान सरकार ने ओसामा को  अमेरिका के हाथों में सौंपने से इंकार कर दिया। तो उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति "जॉर्ज बुश" ने क्रोध में आते हुए अफ़ग़ानिस्तान पर हमला करने का आदेश दे दिया और अमेरिकी सेना ने 2 अक्टूबर 2001 को तालिबान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर हमले शुरु कर दिए। 


तालीबान के प्रवक्ता ने मीडिया से बातचीत करते हुए बोले कि अमेरिका ने पिछली बार जिन कारणों से हमला किया था और उसे करीब 20 वर्ष अफ़ग़ानिस्तान में रुकना पड़ा। तो उन कारणों को राजनीतिक  रुप से या बातचीत के जरिये हल किए जा सकते थे। लेकिन तब अमेरिका और तालिबान सरकार के  दौरान के कोई भी बातचीत का माध्यम ही नहीं था। लेकिन वर्तमान में अमेरिका फिर से पिछली वाली गलती करने जा रहा है। अमेरिका को तालिबान सरकार को मान्यता देनी चाहिए और अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान के अरबों डॉलर की राशि रोक लगा रखी है। उन पर से तुरन्त रोक हटानी चाहिए। 


तालिबान की कोशिश है कि अफगानिस्तान की सरकार को किसी भी तरह से पैसा प्राप्त होना चाहिए। जिसके लिए तालिबान ने भारत से भी बहुत उम्मीदें बना रखी हैं। जिसका सबसे बड़ा कारण है कि भारत अफगानिस्तान में एक रेल मार्ग निकाल रहा है। जो ईरान के चाबहार पोर्ट तक जायेगी। इसी के साथ एक तापी अंतरराष्ट्रीय गैस पाइप लाइन परियोजना पर भी काम चल रहा है। जिसमें चार देश शामिल हैं। जिनमें तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत हैं। इन तीन देशों में दो देश तालिबान को मान्यता देने के लिए तैयार बैठे हैं। लेकिन भारत तालिबान सरकार को मान्यता देने के बारे में अभी सोच भी नहीं रहा है। यहीं कारण है कि तालीबान तापी गैस पाइप लाइन व रेल मार्ग परियोजना को लेकर उत्सुक है। क्योंकि भारत को रेलमार्ग और तापी गैस पाइप लाइन परियोजना को पूर्ण करने के लिए अफगानिस्तान में निवेश करना ही होगा। 


तापी गैस परियोजना (TAPI)

परियोजना में शामिल देश

  तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान,पाकिस्तान    , भारत

शुभारंभ दिवस

      13 दिसंबर 2015

पूर्ण करने का अंतिम वर्ष

        2019

तापी परियोजना का प्रारंभिक स्थान

        तुर्कमेनिस्तान

तापी परियोजना का अंतिम छोर

        फाजिल्का, पंजाब (भारत)

भारत की की ओर से शामिल प्रतिनिधि

       पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी

हर वर्ष कुल गैस आपूर्ति 

        33 अरब घन मीटर गैस

कुल लंबाई

       1814 किलोमीटर

कुल लागत

        10 अरब डॉलर

लागत में हिस्सेदारी

     तुर्कमेनिस्तान (85%)

     अफगानिस्तान (5%)

     पाकिस्तान (5%)

      भारत (5%)

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) 

    तापी के लिए 1 अरब डॉलर कर्ज दिया।

तापी परियोजना का अंतिम छोर

     फाजिल्का, पंजाब  (भारत)

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