चीन ने उइगर मुसलमानों की मस्जिदों से अरब संस्कृति के प्रतीक हरे गुम्बंदो को हटाया

अब चीन उइगर मुस्लिमों की सांस्कृतिक विरासत को भी खत्म करने पर तुल गया है। जिसके अंतर्गत उसने अपने मुस्लिम बहुल राज्य शिंजियांग की "अरब संस्कृति" को खत्म करना शुरू कर दिया है। इसी तरह चीन ने उइगर मुस्लिमों के धार्मिक ग्रंथों  को भी बदल दिया तथा मुस्लिम धर्म को चीनी वामपंथी विचारधारा के अनुकूल बनाया जा रहा है। जिसके लिए चीन ने एक कार्यक्रम शुरू किया है। जिससे चीन अपने शिंजियांग राज्य व पूरे चीन में अरब संस्कृति के "चिन्हों" को खत्म कर रहा है। 



मुख्य विषय सूची

1.चीन का मस्जिद सिनिकाइजेशन कार्यक्रम व अरब चिह्नों का हटाया जाना।

2.ईमाम और मुस्लिम समुदाय के पास खिलाफत करने की ताकत नहीं।

4.चीन का उद्देश्य मुस्लिम धर्म को चीनी संस्कृति में ढालना। 

5. मुस्लिम दुनिया उइगर मुसलमानों के मामले में एक दम चुप।

चीन ने "मस्जिद सिनिकाइजेशन" के कार्यक्रम के तहत अरब संस्कृति के प्रतीकों को हटाना शुरू कर दिया। इस कार्यक्रम के तहत चीन सभी मस्जिदों के हरे गुम्बंदो को हटा रहा है तथा मस्जिद की छत को समानांतर बना रहीं हैं। इस मामले पर विश्व मीडिया का कहना है कि वहां के मुस्लिम लोगों के पास कोई आशा नहीं है। वह इसके खिलाफ आवाज भी नहीं उठा सकते हैं। मस्जिदों के ईमाम चुप चाप इन कार्यों को होते देखते रहते हैं। लेकिन उनमें विरोध करने का साहस नहीं हैं। यहां के मुस्लिम समुदाय का कहना है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यों के खिलाफ जो भी जाता है। उसको पुलिस तुरंत गिरफ्तार कर "जेल या एकाग्रता शिविर" में भेज दिया जाता है। इसलिए यहां के मुस्लिम समाज के लोग कुछ भी नहीं कर पाते हैं। चीन ने मुसलमानों की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य शिंजियांग में बहुत ही सख्त प्रतिबंध लगा रखे हैं। चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी ने 1947 के बाद से ही यहां "हान चीनी लोगों" को बसाना शुरू कर दिया था। अब शिंजियांग राज्य में चीनी हान लोगों की आबादी 45% हो चुकी है और जल्द ही उइगर मुस्लिम इस राज्य में अल्पसंख्यक बन जायेंगे। इस तरह से देखा जा सकता है कि चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी ने इस राज्य की जनसांख्यिकी में केवल 73 वर्षों में ही बड़ा बदलाव कर डाला है।


चीनी मुसलमानों की मस्जिदों से अरब संस्कृति के प्रतीक चिन्हों को खत्म करने की जानकारी सबसे पहले इंग्लैंड की चीन में राजदूत क्रिस्टीना स्कॉट ने कुछ फोटो को शेयर कर दुनिया को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की करतूतों के बारे में बताया था। क्रिस्टीना स्कॉट ने 13 सितंबर 2021 के अपने ट्वीट में डोंगगुआन ग्रेट मस्जिद के बारे में दुनिया को बताया था कि डोंगगुआन ग्रेट मस्जिद में पहले गोल गुम्बद मौजूद थे। लेकिन मस्जिद के नवीकरण के बाद गोल गुम्बद गायब हो गए हैं। 


इसके बाद ब्रिटिश राजदूत ने अपने दूसरे ट्वीट में एक दूसरी "नानगुआन मस्जिद" के बारे में बताया कि नानगुआन मस्जिद से भी गुंबदों को हटाने का कार्य किया जा रहा है। जिसकी उन्होंने पूरी तरह से फोटो भी अपने ट्वीट में शेयर की हैं।



चीन ने मुस्लिम धर्म की सबसे पुरानी मस्जिद चीन के किंघई शहर में स्थित है। किंघई मस्जिद 14 वीं सदी में बनाई गईं थीं। चीन की वामपंथी सरकार ने मस्जिद के हरे रंग के गुम्बंदो को हटा दिया है तथा मस्जिद को एक दम समनांतर आकार दे दिया गया है। इस तरह की ढेर सारी मस्जिदें हैं। जिनको चीन नवीनीकरण के नाम पर उनके हरे गुम्बंदों को हटा कर नया रंग रूप दे रहा है। इन सभी मस्जिदों को चीनी भवनों और सांस्कृतिक भवनों के आकार में ढाला जा रहा है।




दूसरी सभी मस्जिदों की तरह ही चीन के यिनचुआन राज्य के ज़िक्सिया जिले के जिंगजिंग शहर में "जिंगे ग्रैंड मस्जिद" है। जिसके पहले वाले फोटो में हरे रंग के गोल गुम्बंदो को आसानी से देखा जा सकता है। लेकिन जुलाई 2021 में इस मस्जिद के सभी गुम्बद गायब हो गए हैं और पूरी मस्जिद चीनी भवनों के आकार में ढाल दी गई है। जिसके आगे चीन का झंडा लहरा रहा है।


चाइना की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) का साफ उद्देश्य है कि चीनी मुसलमानों को चीन की संस्कृति के अनुसार ढालना है। इसलिए चीन ने अपने शिंजियांग के 10 लाख मुसलमानों को एकाग्रता शिविर में कैद कर रखा है। जहां उनसे बंधुआ मजदूरी व मानसिक रूप से टॉर्चर किया जाता है। इन एकाग्रता शिविरो में रहने वाले लोगों को सुअर का मांस खिलाया जाता है। इस कार्य को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी  जानबूझ कर रही है। 

चाइना के शिंजियांग राज्य के मुसलमानों को लंबी दाढ़ी रखने का भी अधिकार नहीं है। कोई भी मुस्लिम रोजा इफ्तार भी नहीं रख सकता है। इस धार्मिक त्यौहार पर चीन ने सख्त प्रतिबंध लगा रखा है। इसके साथ ही सीसीपी के अधिकारियों के आदेश से सभी मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतार लिए गये हैं। 


आज जो चीन शिंजियांग राज्य के मुसलमानों के खिलाफ कर रहा है। तो दुनिया में कोई भी मुस्लिम देश आगे आकर चीन का विरोध और उइगर मुस्लिम के समर्थन करने नहीं आया है। जो तुर्की , पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (IOC) भारत के कश्मीर मसले पर चिल्लाने लगते हैं। जबकि पूरी दुनिया जानती है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश हैं। जहां किसी के साथ भेद भाव हो ही नहीं सकतें हैं। इसके साथ ही भारत में सोशल मीडिया माध्यमों को पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त है। जबकि चीन के मामले में  पूरी दुनिया जानती है कि चीन किस तरह से उइगर मुस्लिमों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उनकी अरब तुर्किश इस्लामिक संस्कृति को चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी धीरे धीरे सदा के लिए खत्म कर रही है। 

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