आखिरी यहूदी को तालिबान ने भगाकर अफ़गानिस्तान को यहूदी विहीन देश कर दिया।

तालीबान ने सरकार बनाने के बाद तालीबान के प्रवक्ता सोहैल शाहीन ने कहा है कि तालीबान सभी पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध रखना चाहता है और इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि वह अमेरिका के साथ भी सम्बंध स्थापित करने को तैयार है। लेकिन वह इजरायल के साथ कोई भी सम्बंध नहीं रखेगा।

इसी नफ़रत का असर अफ़गानिस्तान में भी दिख रहा है। तालिबान यहूदियों से इतनी ज्यादा नफ़रत करता। कि वह अफ़गानिस्तान की जमीन पर किसी भी यहूदी को रहने नहीं देना चाहता है। 


इसी का एक ताजा उदाहरण अफ़गानिस्तान से आया है। जिसमें एक अकेले बचे यहुदी को तालिबानी ने डरा धमका के अफ़गानिस्तान से भगा दिया। ज़ाबुलोन सिमेंटोव वो आखिरी यहूदी हैं जिन्होंने अफ़गानिस्तान छोड़ा है। क्यों कि उनके दूसरे साथी पहले ही निकल गए थे। लेकिन "ज़ाबुलोन सिमेंटोव" अफ़गानिस्तान में ही रह गए थे। ज़ाबुलोन सिमेंटोव कहते हैं कि तालिबानियों के पिछले शासन के दौरान उन्हें जेल में बंद कर दिया गया था और इस बार भी डरा धमका रहे थे।   

इसलिए ज़ाबुलोन सिमेंटोव को अफ़गानिस्तान से निकलना ही पड़ा। अगर वह तालिबानी शासन में रहते। तो आवश्य ही मार दिए जातें। ज़ाबुलोन सिमेंटोव आगे कहते हैं कि वह अफ़गानिस्तान छोड़ना नहीं चाह रहे थे। लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गई हैं। वहां रुकना मतलब मौत को दावत देना जैसा है। इसलिए वह अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य में अपने परिवार के पास चले गए।

Post a Comment

Previous Post Next Post