चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बोले कि ताइवान का मातृभूमि के साथ पुनर्मिलन आवश्य होना चाहिए।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बोले कि ताइवान के साथ चीन का "पुनर्मिलन" आवश्य होना चाहिए और यह होकर रहेगा।


मुख्य खबर 

1. चीन के अनुसार , ताइवान का चीन के साथ पुनर्मिलन होना चाहिए। 
2 . चीनी राष्ट्रपति के बयान पर ताइवान का जवाब। 
3. चीनी वायु सेना का ताइवान में इतिहास की भारी घुसपैठ करना। 
4.चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अनुसार  एक चीन सिद्धांत की व्यख्या।
5. चीनी जनवादी गणराज्य (People's Republic of  china ) और  चीनी गणराज्य (Republic of China ) में अंतर। 


9 अक्टूबर को बीजिंग के ग्रेट हॉल में शी जिनपिंग ने एक बार फिर कहा कि चाइनीज ताइपे का चीनी मुख्य भूमि में पुनर्मिलन करायेगे। लेकिन उन्होंने अपने भाषण में बल का इस्तेमाल करने की बात नहीं कहीं है। जबकि कुछ दिनों पहले ही चीनी वायु सेना के 77 से अधिक लड़ाकू विमान ताइवान के अंदर घुसपैठ कर आए थे। इस तरह उकसाबे की हरकतें चीनी वायु सेना बहुत बार कर चुकी है। चीनी वायु सेना की इन हरकतों से साफ साफ दिख रहा है कि चीन ताइवान को लेकर बहुत बड़ी योजना बनाकर चल रहा है। दुनिया के रक्षा जानकारों का भी मानना है कि एक बार ताइवान पर चीनी कब्जा हो जानें के बाद हांगकांग व अफगानिस्तान की तरह अमेरिका कुछ नहीं कर सकता है। 

ताइवान के एयर क्षेत्र में चीनी एयर फोर्स की सबसे बड़ी घुसपैठ

राष्ट्रपति शी ने ताइवान की स्वतंत्रता पर कहा कि ताइवान की आजादी चीनी मातृभूमि से पुनर्मिलन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए काफी गंभीर खतरा है। उन्होंने यह बात 1911 की क्रान्ति की 110वी वर्षगांठ पर कहीं थी। इसी 1911 की क्रान्ति के बाद चीनी लोगों को 2000 वर्ष पुराने शाही शासन से छूटकारा प्राप्त हुआ था और चीनी लोगों के बीच लोकतंत्र और समानता के विचारों का प्रसार किया।

     

उन्होंने क्रांति की 110 वी वर्षगांठ कहा कि ताईवान के साथ चीन का एकीकरण शांतिपूर्वक हासिल किया जायेगा, लेकिन शी जिनपिंग ने  आगे ताइवान को चेतावनी भी दी है कि चीनी लोगों की अलगाववाद का विरोध करने की "शानदार परंपरा" थी। 


राष्ट्रपति शी ने हांगकांग का उदाहरण देते हुए कहा है कि हांगकांग चीन के "वन चाइना सिद्धांत" का सबसे अच्छा उदाहरण है। जो वन चाइना सिद्धांत के अंदर कार्य कर रहा है। उसको वन चाइना सिद्धांत के अंदर सारे अधिकार प्राप्त है। वह चीन का एक हिस्सा है और इसके बाबजूद उसके पास स्वशासन करने की शक्ति भी है। 

जबकि स्वतः शाशित आइलैंड ताइवान की राष्ट्रपति तासे इंग वेन ने चीनी राष्ट्रपति के जवाब का उत्तर देते हुए कहा है कि हमारा मानना है कि ताइवान के लोगों को ही ताइवान का भविष्य तय करना चाहिए। लोकतंत्र और स्वतंत्रता के मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता में ताइवान एकजुट है। रिपब्लिक ऑफ चीन ताईवान की राष्ट्रपति का कहना है। हम ताइवान के लोग अपने मूल्यों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। ताइवान की राष्ट्रपति ने आगे कहा कि ताइवान एक स्वतंत्र देश है, न कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का हिस्सा।

      

जबकि चीन केवल वन चाइना सिद्धांत पर विश्वास करता है। जहां केवल एक ही संप्रभु देश चीन होगा और दूसरे राज्य मुख्य भूमि चीन के नियमों तथा कानूनों का पालन करेंगे। चीन की वामपंथी सरकार का साफ़ कहना है कि "चीनी मातृभूमि" लोकतांत्रिक जनवादी गणराज्य चीन (People's Republic of China) है और वह लोकतांत्रिक गणराज्य चीन ताइवान (Republic of China Taiwan) में विश्वास नहीं करती है। वह चीनी मातृभूमि का एक हिस्सा है।  यहां गौर देने वाली बात यह है कि लोकतांत्रिक जनवादी गणराज्य चीन को कहा जाता है और ताइवान भी अपने आप "जनवादी गणराज्य चीन" कहता है। इसलिए दोनों देशों के आधिकारिक नाम में चीन शब्द जुड़ा हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह 1949 की कम्युनिस्ट क्रान्ति रही है। इस समय कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना व राष्ट्रीय पार्टी के बीच चीन में गृह युद्ध हुआ था। इस युद्ध में कम्यूनिस्ट पार्टी की जीत हुई थी और राष्ट्रीय पार्टी की हार हुई। कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता "माओ त्से तुंग" ने चीन में अपनी एक दलीय सरकार बनाई। जिसको लोकवादी चीनी गणराज्य के नाम से जाना जाता है। 

कुओमिनटांग चीन से भाग कर ताइवान द्वीप  पर अपनी रिपब्लिक ऑफ चाइना नाम से सरकार बनाई। जहां के लोगों की सोच एक दम चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी से अलग है। ताइवान के लोग लोकतान्त्रिक व्यवस्था में विश्वास करते हैं और अपने अधिकारों व स्वतंत्रता का आनंद उठा रहें हैं। यह सब उन्हें "पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना" के नीचे रहते हुए प्राप्त नहीं हो सकता है। 


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