अफगानिस्तान में शिया समुदाय का सामूहिक नरसंहार हो रहा, जिसमें इस्लामिक स्टेट खुरासान और तालिबान दोनों शामिल

जब से तालिबान अफ़गानिस्तान की सत्ता में वापस लौटा है। तब से ही अफगानिस्तान अल्पसंख्यक समुदाय के लिए नरक बन चुका है। हर दूसरे या तीसरे दिन अल्पसंखयक समुदाय के पुजा स्थलों पर आत्मघाती हमले हों रहें हैं। 


अफ़गानिस्तान के टोलो न्यूज चैनल के अनुसार ,आज अफ़गानिस्तान की शिया हजारा समुदाय की मस्जिद के अंदर हुए आत्मघाती हमलों में करीब 32 लोग मारे गए और लगभग 70 लोग घायल हुए हैं। इस आत्मघाती हमले में मारे गए सभी लोग अफ़ग़ानिस्तान के अल्पसंखयक शिया समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। 


यह हमला अफ़ग़ानिस्तान के कंधार शहर की ईमाम बारगाह मस्जिद में नमाज अदा करने के समय हुआ था। कुछ चश्मदीदो के अनुसार मस्जिद में लगातार तीन हमले हुए थे। कंधार शहर की ईमाम बारगाह मस्जिद शहर की सबसे बड़ी मस्जिद है। इसी कारण आज जुम्मे का समय भी था और मस्जिद में नमाज अदा करने वाले लोगों की संख्या भी ज्यादा हो गई थी। इसी का फायदा उठाकर आत्मघाती हमलावर ने हमला किया। 

ऐसा ही हमला 8 अक्टूबर 2021 को अफगानिस्तान के कुंदुज प्रोविंस में शिया हजारा समुदाय की मस्जिद में नमाज के समय ही हुआ था। जिस हमले में 120 शिया मुस्लिम लोग मारे गए थे और लगभग 170 के करीब लोग घायल भी हो गये थे। इस हमले को चीन के शिंजियांग राज्य के एक उइगर मुस्लिम ने दिया था। जोकि इस्लामिक स्टेट खुरासान का एक सदस्य था। 

तालिबान ने भी अपने पहले शासन काल में अफगानिस्तान के "शिया हजारा समुदाय" के साथ बहुत ज्यादा अत्याचार किए थे। उस समय हजारों की संख्या में तालिबानियों ने अफ़गान हजारा समुदाय को मौत के घाट उतार दिया था। क्योंकि तालिबान भी हजारा शिया समुदाय से उतनी ही ज्यादा नफरत करता है। जितनी इस्लामिक स्टेट खुरासान करता है। अफगानिस्तान में जब अमेरिका समर्थित लोकतान्त्रिक सरकार थी तब यह जनजातीय समुदाय तालिबान का सीधा निशाना बनता था। अब जब तालिबान खुद अफगनिस्तान की सत्ता में है। तो अफ़गान हजारा समुदाय उन्हीं की रहमों करम पर है।

इस महीने में अब तक अफ़गान शिया समुदाय पर दो बड़े इस्लामिक स्टेट खुरासान ने हमले किए हैं। जिनमें 150 से ज्यादा शिया समुदाय के लोगों की जान जा चुकी है और अभी कुछ पता नहीं ऐसे हमले शिया समुदाय पर कितने होगें।

हजारा समुदाय की अफ़ग़ानिस्तान में आबादी लगभग 40 लाख है। जो वहां की सुन्नी मुस्लिम आबादी की लेवल 10 से 11% ही है तथा यह अफ़ग़ानिस्तान का तीसरा बड़ा मुस्लिम जातीय समूह है। ज्यादातर अफगान शिया हजारा समुदाय के लोग फारसी भाषा बोलने वाले हैं। जिनका निवास स्थान केंद्रीय अफ़ग़ानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में है। जबकि बड़े पैमाने पर हजारा समुदाय के लोग पूरे अफगानिस्तान में भी फैले हुए हैं। अफगानिस्तान के लगभग 1 से 2 लाख हजारा शिया समुदाय के लोग पाकिस्तान में भी रह रहें हैं। ईरान में भी 5,00,000 हजारा समुदाय की जनसंख्या रहती है। 

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