आज भारत में 25 ब्रिटेन, 12 रूस और 5 अमेरिका बन सकतें हैं, जानें विस्तार से।

भारत एक प्राचीन देश है। जिसकी पहचान सनातन संस्कृति, हिंदु धर्म और हिंदु संस्कारो  से है तथा जिसके बड़े बड़े मंदिर और उनमें रखीं अकूत संपत्ति के खजाने से है। लेकिन कुछ हाल के दशकों में इसकी दूसरी पहचान बन गयी और वो दूसरी पहचान इसकी विशाल जनसंख्या है। हम सब अच्छी तरह से जानतें हैं कि भारत के पास संसाधन सीमित मात्रा में मौजूद हैं और पूरी दुनिया की 17% जनसंख्या हमारे देश में निवास करती हैं। जबकि हमारे पास जमीन पूरी दुनिया की केवल 2.1% ही है। 




भारत की जनसँख्या 

भारत  जनसंख्या के मामले में चीन के बाद दूसरे स्थान पर आता है। 2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार भारत की जनसंख्या 121 करोड़ है और अगर वर्तमान समय की बात करें तो अब यह  1,39 करोड़ के करीब होगी। 2020 में 0.93% भारतीय जनसंख्या में वृद्धि देखने को मिली।


हम सब जानतें हैं कि हद से ज्यादा जनसंख्या सभी कारणों, समस्याओं और बीमारियों की जननी होती है।अधिक जनसंख्या होने से रोजगार की सबसे बडी समस्या उत्पन्न होती है। आज भारत जैसे विकासशील देश में अधिक जनसंख्या होने से करोड़ों लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। आप इन आंकड़ों को देखकर समझ जायेंगे कि भारत की विशाल जनसंख्या भारत के लिए किसी परमाणु बॉम्ब से कम नहीं है। आज भारत में 2020 में सीबीएसई(CBSE) बोर्ड से 10,59,080 बच्चे पास हुए हैं और सभी राज्यों के बोर्ड से लगभग 1 करोड़ विद्यार्थी 12 वीं की परीक्षा में बैठे थे और लगभग 70% बच्चे पास भी हो गए। अब भारत में सभी प्रकार के कॉलेजों से करीब 2019 के रिकॉर्ड के अनुसार 25 लाख विद्यार्थी ग्रेजुएट हुए। इनमें डिप्लोमा कोर्स करने वाले बच्चे अलग से हैं। अब इतनी ही मात्रा में विद्यार्थी देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से उत्तीर्ण होतें हैं और जब कि देश में नौकरियां इतनी मात्रा में पैदा नहीं होती हैं। 


जब ज्यादा मात्रा में बेरोजगारी होंगी। तो देश में कानून, सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था बर्बाद हो जाती हैं। इन सभी के साथ चिकित्सीय उपचार, भोजन और पानी की समस्या उत्पन्न हो जाती है। आज दिल्ली जैसे शहर में लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। इसके साथ ही जनसंख्या ज्यादा होने के कारण सभी लोगों को चिकित्सीय उपचार नहीं मिल पाता है। आज भारत जैसे देश में पता नहीं कितने लोगों को चिकिस्ता नहीं मिल पाती है जिससे हजारों लोगों की मृत्यु हो जाती हैं।


भारत की जनसंख्या के कारण हर जगह लाइन लगानी पड़ रही है। चाहें वह बैंक, अस्पताल और रेलवे स्टेशन हो। हर जगह आपको भीड़ मिल जायेगी। जनसंख्या की वृद्धि को अगर रोका नहीं गया तो आने वाले समय में पीयू (Pew) रिसर्च संस्था के अनुसार, 2050 तक भारत में 1.70 करोड़ जनसंख्या होंगी। जों बहुत अधिक डराने वाले आंकड़े हैं। 

दूसरे देशों से तुलना

आज भारत में 5 अमेरिका, 25 ब्रिटेन और 12 रूस बन सकते जनसंख्या के अनुसार। पूरा का पूरा यूरोप भारत की जनसंख्या के बराबर नहीं हैं। रूस जो विश्व में सबसे बड़ा देश है और उसके देश का क्षेत्रफल 1 करोड़ 71 लाख वर्ग किलोमीटर है। जों भारत से 5 गुणा बड़ा देश है और उसकी खुद की जनसंख्या 11 करोड़ है और अमेरिका की 45 करोड़ जनसंख्या है और जिसके देश का क्षेत्रफल 98 लाख वर्ग किलोमीटर है। ब्रिटेन जिसकी 6 करोड़ आबादी है और उसके देश का क्षेत्रफल 242,495 km² है जो उसकी जनसंख्या के अनुसार ठीक है। 


हमारे पड़ोसी देेश  चीन की जनसंख्या 144 करोड़ है वर्तमान समय में। लेकिन उसने अपने जनसंख्या कानून बनाकर 10 करोड़ बच्चों को पैदा होने से रोक लिया और जनसंख्या की वृद्धि को भी रोक दिया। लेकिन भारत चाइना को जनसंख्या के मामले में 2025 तक पीछे छोड़ देगा। जबकि चीन का क्षेत्रफ़ल भारत से 3 गुणा है। यानि लगभग 97 लाख वर्ग किलोमीटर है। जब कि भारत का क्षेत्रफ़ल 32 लाख 87 हजार वर्ग किलोमीटर है। जब कि जनसंख्या 132 करोड़ है। आगे आने वाले समय में भारत की जनसंख्या में और वृद्धि देखने को मिलेंगी। जो किसी भी देश के लिए बहुत अच्छा नहीं है।

भारतीय जनसंख्या धर्म के अनुसार

2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में भारत की जनसंख्या 121 करोड़ थीं और आगे हम जानेंगे कि किस संप्रदाय की संख्या भारत में कितनी है। 

हिन्दुओं की जनसंख्या

2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हिदुओं की जनसंख्या 96.62 करोड़ थी। यानी जो भारत की कुल आबादी का 79.80% होता है। आज वर्तमान में एक अनुमान के अनुसार भारत में हिन्दुओं की जनसंख्या 1.05 अरब से ज्यादा होंगी। भारत में हिंदु अभी 35 में से 28 राज्यों में बहुसंख्यक हैं।

मुस्लिमों की जनसंख्या

2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मुस्लिमों की जनसंख्या 17.22 करोड़ थी और जो भारत की कुल आबादी की 14.23% है। आज वर्तमान समय में भारत में मुस्लिमों की जनसंख्या 21 करोड़ के करीब होगी। भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यक है और 35 में से 2 राज्यों में बहुसंख्यक हैं।

क्रिश्चियन की जनसंख्या

2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में क्रिश्चियनों की जनसंख्या 2.78 करोड़ है। जो भारत की कुल आबादी का 2.30 % बनता है। आज वर्तमान समय में भारत में क़रीब 3 करोड़ ईसाई भारत में होंगे। भारत में क्रिश्चियन 35 में से 4 राज्यों में बहुमत में हैं।

सिख जनसंख्या 

2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2.08 करोड़ सिख लोग रहतें हैं। जिनका भारत की जनसंख्या में कुल हिस्सेदारी 1.72 % है। अब अगर वर्तमान समय में बात करूं तो भारत में सिखों की जनसंख्या 2.08 से बढ़कर 2.60 करोड़ तक पहुंच चुकी होगी। सिख जनसंख्या भारत की 35 राज्यों में से केवल 1 राज्य में बहुमत में हैं।

बुद्धों की जनसंख्या

2011 में बुद्धों की जनसंख्या 84.43 लाख थी जों अब वर्तमान समय में 1 करोड़ के करीब होगी। बुद्ध लोग भारत के किसी भी राज्य में बहुमत में नहीं हैं।

जैन जनसंख्या   

भारत में 2011 में जैनों की जनसंख्या 44.52 लाख हैं। जो भारत की कुल आबादी का 0.37 % बन पाती हैं। जैन धर्म के लोग ज्यादातर लोग मुम्बई, गुजरात और कुछ अन्य राज्यों में पाएं जाते हैं।

दुसरे धर्म की जनसंख्या       

2011 की जनगणा के अनुसार, भारत में 79.38 लाख लोग अन्य धर्मों की जनसंख्या है। जो कि भारत की कुल आबादी का 0.66 % हिस्सा ही है।

वो लोग जिन्होंने अपना धर्म नहीं बताया

2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में जों धर्म को नहीं मानते है उनकी आबादी 28.67 लाख है। जों कुल आबादी का 0.24 % है।

बढ़ती जनसंख्या कानून व्यवस्था के लिए खतरा

भारत की बेतहाशा बढ़ती जनसंख्या आने वाले खतरे की घंटी हैं। जिससे देश में कानून व्यवस्था खराब हो जायेगी। जिससे दंगों, चौरी, आंतकवाद और महिला अपराधों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। इसके बाद बड़ी जनसंख्या के लिए खाना पानी की समस्या उत्पन्न होना निश्चित होगा। क्योंकि दिल्ली शहर में पानी की सबसे बड़ी समस्या है। इसी के साथ गरीबी और शैक्षिक योग्यता में कमी आयेगी। बिना पढ़ी लिखी व अकुशल जनसंख्या देश के लिए केवल कचराहोती है। जो देश पर भार साबितहोती है। जबकि जापान जैसे देश संतुलित जनसंख्या वाले देश का उदाहरण देख सकतें हैं कि वहां पुलिस 24 घंटे खाली बैठी रहती है। जिसका सबसे बड़ा कारण जापान की कम जनसंख्या और पढ़ें लिखें लोग हैं। 

विश्व के टॉप 10 जनसंख्या वाले देश


1.चीन। 1,439,323,776 

2 भारत। 1,380,004,385 

3 अमेरिका। 331,002,651 

4 इंडोनेशिया। 273,523,615 

5 पाकिस्तान। 220,892,340 

6 ब्राज़िल 212,559,417 

7 नाइजीरिया। 206,139,589 

8 बांग्लादेश 164,689,383 

9 रूस 145,934,462 

10 मेक्सिको 128,932,753

Post a Comment

Previous Post Next Post