पाकिस्तान के नवाब इमरान खान और मालिक आईएमएफ, चीन हैं। पाकिस्तान पर कुल कर्ज 50 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपए हो गया।

पाकिस्तान और भारत दोनों एक साथ 1947 में आजाद हुए थे। आज भारत दुनिया की छठी आर्थिक ताकत बन गया है। जबकि आज पाकिस्तान अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। पाकिस्तान आर्थिक तौर पर इतना कमजोर हो गया है कि वहां की सरकार के पास देश को चलाने के लिए पैसा नहीं है। इस बात को पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने खुद अपने एक भाषण के द्वारा स्वीकार की है। उन्होंने अपने भाषण में कहा है कि हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि पाकिस्तान को चलाए रखा जा सके। 

पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के जाल में फंस गया

जब कोई देश बाहर से ऋण पर ऋण लेता रहें। तो उसकी हालत किसी गुलाम की तरह हो जाती है। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण पाकिस्तान है। जिस पर शासन इमरान खान कर रहे हैं। लेकिन आदेश आईएमएफ, चीन और सऊदी अरब का चल रहा है।

दरसल पाकिस्तान इन दिनों अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के जाल में फंस गया है। जिससे उसका निकल पाना मुश्किल लग रहा है। यह बात पाकिस्तान में प्रसिद्ध नेशनल बिजनेस ग्रुप पाकिस्तान के अध्यक्ष और पूर्व प्रांतीय मंत्री मियां जाहिद हुसैन ने कहीं है। 

मियां जाहिद हुसैन ने पाकिस्तान के आईएमएफ के जाल में फंस जानें की बात ऐसे ही नहीं कहीं है। जिसकी वजह खुद पाकिस्तान है। पाकिस्तान ने 23 अगस्त 2021 को आईएमएफ से 2.77 बिलियन डॉलर का कर्ज लिया था। जिसके लिए पाकिस्तान ने आईएमएफ की सभी शर्तों को स्वीकार किया था। यहीं शर्तें आज पाकिस्तान की सरकार के लिए मुसीबत बन गई हैं। आईएमएफ ने 2.77 बिलियन डॉलर 27 अगस्त को स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान(SBP) में डालें थे। लेकिन आईएमएफ ने पाकिस्तान की सरकार पर ढेर सारे प्रतिबंध लगा रखें हैं। जिसके कारण पाकिस्तान की सरकार अपनी ही केंद्रीय बैंक में रखें पैसे को निकाल नही सकती है। 

दूसरी तरफ आईएमएफ ने पाकिस्तान की सरकार को टैक्स बढ़ाने का आदेश दिया है। जिसको इमरान खान की सरकार को मानना ही पड़ेगा। आईएमएफ के आदेश को मानते हुए पाकिस्तान की सरकार ने पेट्रोल डीजल पर भारी मात्रा में टैक्स की वृद्धि कर दी। जिसका परिणाम यह हुआ कि पेट्रोल पंप मालिक कम आमदनी की वजह से पेट्रोल पंप बंद कर रहें हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तानी जनता महंगाई के बोझ तले दबी जा रही है।

पाकिस्तान ने आईएमएफ से ओर कर्ज मांगा

जब पाकिस्तान सरकार को कहीं से पैसा नहीं मिल रहा था। तब उसने आईएमएफ से एक वित्तीय वर्ष के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2 प्रतिशत के बराबर ऋण देने की मांग की। जिसको आईएमएफ ने सीधे तौर पर अस्वीकार कर दिया। 

अब यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पाकिस्तान सिर्फ नाम मात्र का आज़ाद देश है। जबकि उसकी वास्तविक कमान आईएमएफ, चीन और सऊदी अरब के हाथों में हैं। जिसको स्पष्ट पाकिस्तान की एक ट्रिब्यून रिपोर्ट कर रहीं है। यह ट्रिब्यून की रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान सरकार का अपने कार्यों के वित्तपोषण के लिए ऋण लेने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन आईएमएफ के सख्त प्रतिबंधों की वजह से वह ऐसा नहीं कर सकती है। यहां तक पाकिस्तान की सरकार कोई बॉन्ड भी नहीं निकाल सकती है। जिसको पाकिस्तान की केंद्रीय बैंक न खरीद ले। जिससे घूम फिर कर स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान का पैसा पाकिस्तान की सरकार के हाथों में न चला जाए।

पाकिस्तान पर सऊदी अरब, आईएमएफ और चीन का कुल कर्ज

चीन ने पाकिस्तान को चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर के लिए 62 बिलियन डॉलर का कर्ज देने वादा किया था। जिसको महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाओं को पूरा करने को पुरा करना था। लेकिन पाकिस्तान ने 62 बिलियन डॉलर कर्ज़ में से 24.7 बिलियन डॉलर का कर्ज ले भी लिया है। 


अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान को पहली बार कर्ज 8 दिसंबर 1958 को स्टैंडबाय व्यवस्था के आधार पर 25,000 अमेरिकी डॉलर दिया था। जबकि आईएमएफ 7.4 बिलियन डॉलर का कर्ज पाकिस्तान को दे चुका है।

जबकि इमरान खान सभी पिछले दिनों सउदी अरब गए थे।सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 4.2 बिलियन डॉलर नकद सहायता देने का वादा किया। पाकिस्तान सऊदी अरब से कई बार कर्ज ले चुका है। 

पाकिस्तान पर कुल कर्ज

इस समय पाकिस्तान पर कुल 50 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपए के बराबर कर्ज हो चुका है। जो अमेरिकी डॉलर में 270 बिलियन डॉलर बैठता है। जबकि पाकिस्तान की संपूर्ण जीडीपी 300 बिलियन डॉलर है। जो पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 98.7 प्रतिशत है। इसके अलावा पाकिस्तान पर बाहरी कर्ज 127 बिलियन डॉलर है। जिसमें बड़ा हिस्सा चीन द्वारा दिए गए कर्ज का भी है। पाकिस्तान पुरी तरह से कर्ज के जाल में फंसकर रह गया है। जिससे निकट भविष्य में संभावना है कि यह देश टूट कर कई देशों में बंट सकता है। क्योंकि जब पाकिस्तान कर्ज़ को वापस नहीं दे पायेगा। जिससे पाकिस्तान को एक डिफॉल्टर देश घोषित कर दिया जायेगा। जिसका सीधा मतलब होगा कि वह देश आर्थिक तौर पर खंडित हो चुका है। 

पाकिस्तान का कर्ज़ रॉकेट की तरह बढ़ा

पकिस्तान का कर्ज़ 2008 से 2021 के बीच रॉकेट की रफ्तार से बढ़ा है। पाकिस्तान की सभी सरकारों ने मात्र 13 वर्षों में 88% कर्ज लिया है। 

इसके विपरीत पाकिस्तान ने 1947 से 2008 ( 62 वर्षों में ) तक अपने कुल कर्ज़ का मात्र 12% लिया है। इस तथ्य से एक बात साफ़ हो जाती है कि पाकिस्तान में भ्रष्टचार बहुत ही ज्यादा हुआ है। जिससे पाकिस्तान एक उद्देश्यहीन व विफल राष्ट्र बन गया है। 

भारत और पाकिस्तान में अंतर

पाकिस्तान की सकल घरेलू उत्पाद 1960 में कुल 374.93 करोड़ अमेरिकी डॉलर था। जो 2020 में बढ़कर 26,368.66 करोड़ यूएस डॉलर ही हो पाया है।


जबकि इसके विपरीत भारत का 1960 में सकल घरेलू उत्पाद 3,702.99 करोड़ यूएस डॉलर था। जोकि 2020 में बढ़कर 2.62 लाख करोड़ यूएस डॉलर हो चुका है। अर्थात् भारत ने बड़ी तेजी से प्रगति की है। जबकि पाकिस्तान ने भारत से शत्रुता और आतंकवादी गतिविधियों से अपना समूल नाश करवा लिया है।


जो बांग्लादेश कभी पाकिस्तान का हिस्सा हुआ करता था।  उसकी 1960 में कुल जीडीपी 427.49 करोड़ अमेरिकी डॉलर थी। जबकि वर्तमान 2020 तक जीडीपी बढ़कर 32,423.92 यूएस डॉलर हो चुकी है। बांग्लादेश विकास के कारण आज एक सफल देश है। 

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