दक्षिण अफ्रीका को ईमानदारी का क्रूर परिणाम मिला, पश्चिमी व एशियाई देशों के सख्त यात्रा प्रतिबंध, जानें सार्स वायरस के पूर्वजों के बारे में

चीन के वुहान से निकला कोविड 19 वायरस दुनिया के लिए चिंता बना हुआ है। जिसने पता नहीं कितने देशों की अर्थव्यवस्थाओं को तहस नहस कर दिया है। हालाकि दुनिया 2020 के बाद निश्चिंत हो गई थी कि कोविड 19 वायरस को वैक्सीन के दम पर रोका जा सकता है। लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा वैक्सीन का असमान वितरण रहीं। जिससे दूसरे गरीब और विकासशील देशों को कोविड 19 की वैक्सीन प्राप्त ही नहीं हो पाईं। जिसके कारण कोरोना वायरस के अनेकों स्वरूप दुनिया में आए और फैल गए। वुहान से फैले इस वायरस को केवल वैक्सीन के द्वारा ही रोकना संभव है। अन्यथा यह परिवर्तित होकर नए स्वरूपों में हमारे सामने आता रहेगा और दुनिया में आर्थिक महामारी का कारण भी बनेगा।




कोविड-19 का वैरिएंट ऑमिक्रॉन

दुनिया और विश्व स्वास्थ्य संगठन को जिस बात का डर था, वह अब दुनिया के लिए सच्चाई बनता जा रहा है। कोरोना वायरस ने एक बार फिर अपने स्वरूप में परिवर्तन किया है और जिससे एक नया घातक कोविड 19 का वैरिएंट B.1.1.529  पैदा हो गया। जिसको विश्व स्वास्थ्य संगठन चिंताजनक श्रेणी में रखते हुए इसका नाम ऑमिक्रॉन रखा। WHO के अनुसार, कोविड19 के वैरिएंट ऑमिक्रॉन का पहला मामला दक्षिण अफ्रीका में 24 नवंबर 2021 को मिला था। इसके फैलने की रफ्तार बहुत अधिक है। क्यों कि दक्षिण अफ्रीका से यह थोड़े समय में ही दुनिया के 150 से अधिक देशों में फैल चुका है।


ऑमिक्रोन पर डब्ल्यूएचओ के विचार

कोरोना के नए वैरिएंट Omicron को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया को चेतावनी दी है कि यह नया वैरिएंट कोविड 19 की नई लहर के लिए फ्यूल का कार्य कर सकता है। जिससे संक्रमण बहुत तेजी से फैल सकता है और गंभीर हालात उत्पन्न हो सकतें हैं। 


इसके अलावा कुछ वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर, ओमिक्रॉन से संक्रमित होने का खतरा उन लोगों को सबसे ज्यादा है। जिन्होंने अभी तक टिके की पहली खुराक भी नहीं ली है। इसके अतिरिक्त यह इतना खतरनाक है कि  पूर्ण वैक्सिनेटेड लोगों को भी संक्रमित कर सकता है। कोविड 19 का नया संस्करण ओमिक्रॉन un लोगों को गंभीर रुप से प्रभावित कर सकता है, जिन्होंने टिके की एक भी डोज नहीं ली है।


दक्षिण अफ्रीका की ईमानदारी ने उसे बर्बाद कर दिया

दक्षिण अफ्रीका एक समझदार और जिम्मेदार देश है, जिसने चीन की भांति वर्ष 2019 की गलती नहीं की है। लेकिन उसकी ईमानदारी की भावना का दुनिया ने सम्मान नहीं किया है। जिसके बदले में पश्चिमी और कुछ एशियाई देशों ने यात्रा प्रतिबंध लगाकर दिया। इन सभी देशों ने यात्रा प्रतिबंध केवल दक्षिण अफ्रीका पर ही नहीं लगाया है। बल्कि इस क्षेत्र के 7 से 8 देशों पर भी यात्रा प्रतिबंध लगा दिए हैं। जोकि एकदम नस्ली और गलत तरीका है। क्योंकि इस तरह के यात्रा प्रतिबंधों से ये देश बर्बाद हो जायेगें। सारी टूरिज्म इंडस्ट्री बर्बाद हो जायेगी।



अब भविष्य में बहुत से देश कोविड 19 के दूसरे खतरनाक संस्करणों को बताने से डरेंगे। क्योंकि कोई देश नहीं चाहेगा कि उस पर सख्त प्रतिबंध लगे। जिससे उसकी इकोनॉमी प्रभावित हों, खासकर एक ऐसा पर्यटन आधारित देश बिल्कुल नहीं चाहेगा। जिसके उदाहरण श्री लंका, मालदीप, थाईलैंड और दक्षिण अफ्रीका के कुछ देश हैं।


जापान और इजराइल के सख्त प्रतिबंध

ऑमिक्रोन के भय के कारण एशिया के दो शाक्तिशाली देश  इजराइल और जापान ने बहुत ही सख्त कदम उठाए हैं। इन्होनें अपने देश की सभी सरहदों को दुनिया के लिए बंद कर दिया है। अर्थात् अब इजरायल और जापान में कोई भी विदेशी व्यक्ति नहीं जा सकता है। जिसकी घोषणा जापान के पीएम फुमियो किशीदा और इजरायल के पीएल बोनेट ने की है।


जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति जोए बाइडेन ने सतर्कता बरतने की सलाह दी है और यह भी कहा है कि अभी ज्यादा सख्त प्रतिबंधों की जरूरत नहीं है।


प्रमुख देश जहां Omicron पहुंच गया।

देश जहां  ऑमिक्रोन पहुंच चुका है।

जिनमें ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम , बोत्सवाना , कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी,  हांगकांग,  इज़राइल,  इटली, नीदरलैंड ,  पुर्तगाल , दक्षिण अफ्रीका, और स्विट्जरलैंड हैं।


आज विशेष में सार्स वायरस

कोरोना वायरस के पूर्वज लगभग 8000 ईसा पूर्व में भी अपने अस्तित्व में थे। जिनके कुछ स्वरूप लगभग 55 मिलियन वर्ष पुराने भी हैं। यह वायरस चमगादड़ और एवियन जाति के पक्षियों में हजारों वर्षों तक जिंदा रह सकते हैं।


SARS‑CoV‑2 को कोरोना वायरस के नाम से भी जाना जाता है। क्यों कि इसका उदगम स्थल चीन की प्रोविंस का।  वुहान  शहर है।  जहां दिसम्बर 2019 में कोविड 19 वायरस की  शुरूआत हुई थी। जिसका शुरूआती नाम ह्यूमन कोरोना वायरस रखा गया था। जिसका बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नाम covid 19 रखा। 


SARS‑CoV‑2 की पूर्ण नाम 'सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना 2' हैं, जिससे मानव का श्वसन तंत्र प्रभावित होता है और फैफड़े अधिक मात्रा में खराब हो जातें हैं।


SARS‑CoV‑2 अपने पूर्वज SARS‑CoV‑1 का ही उन्नत संस्करण है। SARS‑CoV‑1 के कारण 2003 से 2004 के बीच में बड़े पैमाने पर महामारी फैली थी और हजारों की संख्या में लोगों की जान गई थी। हालाकि यह पूरी दुनिया में SARS‑CoV‑2  की तरह फैल नही पाया था।


महामारी से संबंधित कुछ तथ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन अगर चाहता तो कोविड 19 को पूरे विश्व में फैलने से रोक सकता था। लेकिन WHO चीन के कहने पर चला और SARS‑CoV‑2 पूरी दुनिया में आर्थिक तबाही का दूसरा नाम बन बैठा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बहुत देर करते हुए 30 जनवरी 2020 को "Public Health Emergency of International Concern" घोषित किया था और कोविड 19 बीमारी को महामारी 11 मार्च 2020 को  घोषित की थी।


स्पैनिश फ्लू दुनिया की पहली महामारी थी। जिसमें करोड़ों की संख्या में लोगों की मौतें हुईं थीं। इस बीमारी को पहली बार मार्च 1918 में पहचाना गया था और 1919 तक चलती रही थी। जिसकी शुरूआत 


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