वह प्रस्ताव जिससे आज नेपाल भारत का अभिन्न अंग होता, लेकिन पूर्व पीएम ने नामंजूर कर दिया था।

नेपाल का भारत में मिलने के लिए प्रस्ताव और भारत का नामंजूर करना

यह खुलासा भारत के किसी आम आदमी ने नहीं किया है। बल्कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपनी जीवनी में लिखा है कि नेपाल के राजा त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह ने नेपाल को भारत में मिलाने के लिए भारत से निवेदन किया था। लेकिन भारत के उस समय के प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने नेपाल के राजा का प्रस्ताव नामंजूर कर दिया था।

अगर आज भारत में नेपाल का विलय हो गया होता। तो नेपाल के कम्युनिस्ट आज भारत के खिलाफ नेपाल के लोगों को भड़का नहीं पाते। अब नेपाल भारत का एक पड़ोसी देश है। इसी के साथ भारत और नेपाल के बीच कोई सीमा विवाद भी नहीं होता। चीन कभी भी नेपाल में भारत विरोधी भावनाओं को नहीं भड़का सकता था। लेकिन यह सब एक प्रस्ताव के नामंजूर करने के कारण बर्बाद हो गया।
हालाकि नेपाल भारत का एक अहम पड़ोसी देश है, जिसके भारत के साथ रोटी और बेटी के संबंध हैं। जहां जानें और आने के लिए कोई बीजा की जरूरत नहीं होती है। 
Nepal Mountain

नेपाल में राजशाही की शुरुआत कैसे हुई?

नेपाल पहले भारत का ही एक हिस्सा था। भारत की अन्य रियासतों की तरह नेपाल भी एक छोटा सा राज्य था। नेपाल के प्रथम राजा पृथ्वी नारायण शाह ने मध्य हिमालय क्षेत्र के छोटे छोटे प्रदेशों को एकजुट किया और नेपाल राजशाही की शुरुआत हुईं। लेकिन अंग्रेजों ने इसे शुरुआत में स्वीकृति नहीं दी। लेकिन कुछ समय बाद अंग्रेजों ने नेपाल के छोटे छोटे राजाओं से मिलकर समझौता कर लिया और नेपाल को 1904 में एक स्वतंत्र देश के रूप में दर्जा दे दिया। इसलिए 1904 से नेपाल भारत का हिस्सा नहीं रहा। 

नेपाल में राजशाही का खात्मा

नेपाल में 2008 से पहले राजशाही थीं। नेपाल के प्रथम राजा प्रथम राजा पृथ्वी नारायण शाह जी थे। नेपाल में 28 मई 2008 को नेपाल से राजशाही का खात्मा कर दिया गया। नेपाल के अंतिम राजा नरेश ज्ञानेंद्र जी थे। नेपाल की राजशाही के दौरान नेपाल एक हिन्दू राष्ट्र था। लेकिन नेपाल में माओवादी विचारधारा के हावी हो जाने से नेपाल के हिंदु राष्ट्र का दर्जा ख़त्म कर दिया गया। अब नेपाल पर वामपंथियो का शासन है।

नेपाल राजशाही के परिवार का कत्ल

नेपाल में 1 जून 2001 को नेपाल की राजशाही के नौ लोगों का कत्ल कर दिया गया। नेपाल राजशाही के परिवार का कत्ल काठमांडू स्तित नारायणहिति राजमहल में कर दिया गया। जिसमें नेपाल के राजा के उत्तराधिकारी प्रिंस दीपेंद्र का भी कत्ल कर दिया गया। प्रिंस दीपेंद्र को गोलियों से छलनी कर दिया था। 

नेपाल एक हिंदू राष्ट्र 

नेपाल में हिंदू धर्म सबसे बड़ा धर्म है। जहां हिन्दू धर्म के अनुयायियों की संख्या 21,551,492 है, जो नेपाल की कुल आबादी की 81.34% है। लेकिन नेपाल में संविधान के माध्यम से 2007 में स्वयं को एक धर्मनिरपेक्ष देश घोषित कर दिया था। यह 2008 तक एक अकेला हिन्दू राष्ट्र था, लेकिन नेपाल से राजशाही उन्मूलन के बाद नेपाल के धार्मिक देश के दर्जे को खत्म कर दिया गया। जबकि नेपाल के राणा और गोपाल वंश के शासकों ने नेपाल को एक हिंदू राष्ट्र बनाए रखा था। जहां किसी भी हिन्दू के धर्म परिवर्तन की इजाजत नहीं दी जाती थी। 

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