भारत सहित सभी सात देशों ने एकजुट होकर कहा, अफ़ग़ानिस्तान को आंतकवाद का घर नहीं बनने देंगे।

भारत की सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 10 तारीख 2021 को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। जिसमें अफ़ग़ानिस्तान के सभी पड़ोसी देशों को बुलावा भेजा गया था। जिसमें चीन और पाकिस्तान ने भारत का अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर चर्चा के आमंत्रण को ठुकरा दिया था। 

लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के आतंकवाद से ज्यादा प्रभावित होने वाले सभी दुसरे देश शामिल हुए। जिनमें 8 देशों रूस, ईरान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज़्बेकिस्तान और कजाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शामिल हुए। अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर इस मीटिंग का नेतृत्व भारत के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल ने किया।

अफ़ग़ानिस्तान के मामले पर हुई मीटिंग की 8 महत्वपूर्ण बातें हैं। जिसको सभी 8 देशों ने सामूहिक रूप से स्वीकार किया।

1. अफ़ग़ानिस्तान की अंदरूनी राजनीति या मामलों पर  किसी भी देश को हस्तछेप नहीं करना चाहिए। अफ़ग़ानिस्तान संप्रभुता और अखंडता का  सम्मान करना चाहिए। 

कारण- पाकिस्तान के दो प्रमुख व्यक्तियों ने अफ़ग़ानिस्तान का दौरा किया था। जिसमें पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ फैज हमीद और  विदेश मंत्री मेहमूद कुरैशी गए थे। जिन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में टॉप तालीबान के नेताओं से मुलाकात की थी।

2. अफ़ग़ानिस्तान की भूमि का उपयोग आतंकवाद के लिए नही होना चाहिए। अफगनिस्तान की भूमि का उपयोग आतंकियों के आश्रय, ट्रेनिंग , आतंकी योजनाएं बनाने, और आतंकियों को पैसा देने के लिए बिल्कुल नहीं होना चाहिए।

कारण- पाकिस्तान की सबसे बड़ी साजिश है कि वह अपने देश के सभी आतंकी संगठनों के ट्रेनिंग सेंटर और उनके मुख्यालयों को अफ़ग़ानिस्तान में खोल देना चाहता है। ताकि वह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स को गुमराह कर सकें और उसका अपने पड़ोसी देशों में आतंक का साम्राज्य स्थापित रहें।

3. सभी आठ देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने एक साथ कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में कट्टरपंथ, अतिवाद, अलगाववाद और नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों पर सभी क्षेत्रीय देशों को सहयोग बढ़ाना चाहिए। ताकि इन समस्याओं से लड़ा जा सकें। 

कारण- अब तालीबान अफगानिस्तान की सत्ता में है और जिस कारण से अफगानिस्तान और इसके सभी पड़ोसी देशों में इस्लामी कट्टरपंथ बड़े पैमाने पर फैल सकता है। 

इसके अलावा नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद की सभी पड़ोसी देशों में वृद्धि हो सकती है। जिसका प्रमुख कारण पाकिस्तान के आतंकी संगठन, इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISISK), अलकायदा और खुद तालिबान भी आतंकवाद के रास्ते पर आगे बढ़ सकता है। 

4. सभी 7 देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारो ने आतंकवाद के सभी रूपों और प्रकारों से लड़ने में अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता जताई।

कारण- पाकिस्तान के द्वारा दुसरे देशों में आतंकवाद का निर्यात किया जाना और दूसरे देशों में कटरपंथ के रास्ते आतंकवाद को बढ़ावा देना। 

5. दिल्ली घोसणा पत्र में तालिबान से कहा गया कि तालिबान को स्वतंत्र, निष्पक्ष और एक मिश्रित सरकार का निर्माण करना चाहिए। जिसमें सभी अफगानी का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।

कारण- तालिबान अफगानिस्तान की बहुसंख्यक जनजाति पश्तून से संबंधित है। जबकि अफगानिस्तान में दूसरी भी जातियां ताजिक, उज़्बेक, तुर्कमेन और हज़ारा भी रहते हैं। लेकिन तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में पश्तून जाति के अलावा किसी को सरकार में शामिल नहीं किया है। जबकि यह लोग हजारा शिया समुदाय से नफ़रत करते हैं।  अफगानिस्तान तब तक स्थिर नहीं हो सकता है। जब तक अफगानिस्तान के सभी समुदायों और महिलाओं का उचित प्रतिनिधित्व नहीं हो जाता है।

6. सभी देशों ने अफगानिस्तान में सुरक्षा कारणों से संघर्ष कर रहे सभी अफगानियों के लिए चिंता व्यक्त की। 

कारण- तालिबान के शासन में सबसे ज्यादा आम आदमी, अफगानी महिलाएं और लड़कियां कर रहीं हैं। क्योंकि तालिबान के आतंकी आम अफगानी महिलाओं और लड़कियों को घरों से उठा ले जातें हैं। फिर उनका सामूहिक रैप करते हैं। 

7. सभी आठ देशों ने अफगानिस्तान के आम लोगों तक तुरन्त मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए कहा।

कारण- अफगानिस्तान में अब लोकतान्त्रिक सरकार नहीं रहीं है। जिस कारण दुनिया के देशों की ओर अफगानिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद बंद हो गई है। इसके साथ में अमेरिका ने अफगानिस्तान की बैंक के अरबों डॉलर को रोक दिया। क्योंकि तालिबान इस पैसें का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए कर सकता है। 

लेकिन इन सभी कारणों से आज अफगानिस्तान की 95% जनसंख्या के पास खाने के लिए खाना नहीं है। जबकि ठंड का समय शुरू हो चुका है। जिससे अफगानिस्तान में सबसे बड़ी मानवीय घटित हो सकती है। हजारों बेगुनाह लोग मर सकते हैं। 

8. दिल्ली घोषणा पत्र में सभी 8 देशों ने स्थिर, सुरक्षित और शांतिपूर्ण अफगानिस्तान के लिए पूरा सहयोग देने का वादा किया है।

कारण- अफगानिस्तान के अस्थिर रहने से सभी पड़ोसी देशों को आतंकवाद, ड्रग तस्करी और इस्लामी कट्टरपंथ से जूझना पड़ सकता है। इसलिए सभी देशों को स्थिर बनाने में पूर्ण सहयोग देना चाहिए। 

चीन और पाकिस्तान ने इस मीटिंग में शामिल नहीं हुए हैं। जो यह दर्शाता है कि ये दोनों देश भारत को अफ़ग़ानिस्तान के मामले से दूर रखना चाहते हैं। यहीं कारण है कि रूस में अफगानिस्तान के मसले हुईं मीटिंग से भारत को दूर रखा गया था। क्योंकि पाकिस्तान और चीन ने रूस पर दबाव बनाया था कि वह भारत को रशिया में हो रही बैठक में शामिल न करें। जबकि भारत इस क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी है। यह बात चीन और पाकिस्तान के अलावा सभी देश जानते हैं। 

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