रूस ने भारत को अपना मिसाइल डिफेंस सिस्टम निर्यात करना शुरू कर दिया, पहली तैनाती तिब्बत के बॉर्डर पर।

भारत ने अपने आप को बैलिस्टिक मिसाइलों, लडाकू विमानों और छोटी दूरी की मिसाइलों से रक्षा के लिए रूस का सबसे घातक S 400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम का सौदा किया था। क्यों कि भारत को किसी एक उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम की सख्त जरूरत थीं। जिसका सबसे बड़ा कारण है कि चीन और पाकिस्तान भारत के खिलाफ़ साजिश पर साजिश रच रहे हैं। चीन ने तो लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल की स्थिति को बदलने की कोशिश की। चीन की इसी साजिश का परिणाम गलवान वैली की घटना थी। जिसमें भारत ने अपने 21 जवानों को खो दिया।


रूस के संघीय सेवा की  सैन्य तकनीकि सहयोग (FSMTC) के निदेशक दिमित्रि शुगेव ने  दुबई एयर शो में मीडिया को बताया कि रूस भारत को S 400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम का निर्यात शुरु हो चुका है। FSMTC (Federal Service of Military-Technical Cooperation) रूस का एक मुख्य रक्षा उपकरण निर्यातकर्ता संगठन है। जिसको वायु मार्ग और जलमार्ग दोनों से भारत भेजा जा रहा है। 


भारत सरकार के रक्षा विभाग ने भी मान लिया है कि रूस से S 400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम के उपकरण भारत आना शुरु हो गए हैं। भारत सरकार के रक्षा विभाग ने यह भी बताया है कि भारत एस 400 के पहले दस्ते को पश्चिमी सीमा पर तैनात करेगा। जहां से पाकिस्तान और चीन दोनों पर नजर रखी जा सकती है। जिससे भारत की पश्चिमी सरहद के साथ साथ उत्तरी सरहद से आने वाले खतरों से निपटा जा सकेगा।


भारत सरकार के स्रोत के अनुसार, इस वर्ष रूस से एस 400 की पहली स्क्वाड्रन आ जायेगी। जबकि दूसरी बची 4 स्क्वाड्रन भारत को रूस वर्ष 2022 के अंत तक डिलीवरी कर देगा। जिससे भारत का वायु क्षेत्र सुरक्षित हो जायेगा।

मोदी सरकार ने रूस से एस 400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की डील 15 अक्टूबर 2016 को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान की थी। जिसके लिए भारत और रूस की सरकारों ने ने एक अंतर-सरकारी समझौते (IGA) पर हस्ताक्षर किए। एस 400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम का सौदा 5.43 बिलियन अमेरिकी डॉलर (40,000 करोड़) में हुआ था। हालाकि भारत सरकार ने एस 400 को खरीदने के लिए औपचारिक रूप से 5 अक्टूबर 2018 को हस्ताक्षर किए थे। जिसके लिए भारत सरकार ने अमेरिका के प्रतिबंधों को भी अनदेखा किया।


इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह 400 किलोमीटर दूरी तक मार कर सकता है। जबकि भारत जानता था कि चीन के पास पहले से ही एस 400 मौजूद है। जिस कारण से भारतीय सैन्य अधिकारियों को इसकी बहुत ज्यादा जरूरत थीं। अब भारत के पास भी यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम होगा। तब भारत की वायु ताकत चीन के बराबर हो जायेगी। जिससे भारत वायु मार्ग से आने वाले खतरों से अच्छी तरह निपट सकता है।

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