विकसित देशों की बराबरी करता पुर्वांचल एक्सप्रेसवे, योगी आदित्यनाथ ने कमाल कर दिया,

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे भारतीय इंजीनियरिंग और तकनीक का अद्भुत नमूना है। जिस तरह के एक्सप्रेसवे आपको विकसित देशों में देखने को मिलते हैं। उसी तरह का पूर्वांचल एक्सप्रेसवे है। जो भी इस पर सफर करेगा। वह इसको देखकर आश्चर्य जरूर होगा। 


इस पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास योगी आदित्यनाथ जी की सरकार मे जुलाई 2018 में हुई थी। इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 341 किलोमीटर है व 6 लेन का एक्सप्रेसवे है। सबसे खास बात यह है कि इसकी कुल कीमत 22,500 करोड़ रुपए है। इस एक्सप्रेसवे को पूर्ण करने में कुल 18 महीनों का समय लगा है। हालाकि  कोविड लॉकडाउन और प्रोटोकॉल के कारण इसके पूर्ण होने में समय लगा।

341 किलोमीटर लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का प्रमुख उद्देश्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और गाजीपुर के बीच यात्रा के समय को कम करना है। पहले गाजीपुर से लखनऊ तक पहुंचने में 6 घंटो से ज्यादा का समय लगता था। लेकिन वहीं अब 6 घंटो का सफर मात्र 3 घंटो में पूर्ण हो जाता है।

यह 341 किलोमीटर लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे 7 बड़े पुलों, 7 भारतीय रेलवे के पुलों, लगभग 114 छोटे पुलों और 271 अंडरपांसो से होकर गुजरता है। जिससे यह एक्सप्रेसवे खुबसूरत बनता है। यूपी सरकार के अधिकारियों के मुताबिक भविष्य में इस एक्सप्रेसवे को 6 लेन से 8 लेन में  भी बदला जा सकता है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आज 16 नवंबर 2021 को 1 बजकर 30 मिनट पर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उदघाटन किया। जहां वह वायु सेना के सबसे बड़े मालवाहक जहाज सुपर हरक्यूलिस C 130  से पहुंचे थे।

वायु सेना सुपर हरक्यूलिस C 130 विमान पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर बनी हवाई पट्टी पर उतरा था। फिर इस हवाई पट्टी से। कुछ दूरी पर एक सभा को संबोधित किया। इस हवाई पट्टी पर सुपर हरक्यूलिस विमान के अलावा सुखोई 30 एमकेआई और मिराज 2000 भी उतरा था।

भारत सरकार ने पुर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हवाई पट्टी का निर्माण आपात लैंडिंग या युद्ध काल के समय के लिए किया है। जहां से आसानी से वायु सेना अपने विमानों को उड़ा सकती है।

भारत विशेष में सुपर हरक्यूलिस विमान

सुपर हरक्यूलिस विमान को C130J के नाम से भी जाना जाता है। जो एक सैन्य मालवाहक विमान है। इस विमान को अमेरिका की रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने बनाया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि यह मालवाहक विमान 913 मीटर लंबी हवाई पट्टी पर लैंड कर सकता है और एक बार में 4,000 किलोमीटर तक की यात्रा कर सकता है।

अमेरिकी वायु सेना में यह पहली बार 1996 में शामिल हुआ था। इसकी यह योग्यता ही है कि इस विमान ने दुनिया भर में लाखों की संख्या में उड़ान भरी।

सितंबर महीने के बाद सुपर हरक्यूलिस विमान ने सबसे ज्यादा उड़ान भरी थी। जिसका सबसे बड़ा कारण अमेरिका का अफगानिस्तान छोड़ना था। तब अमेरिका ने अफगानिस्तान से जल्दी जल्दी रातों रात लाखों की संख्या में लोगों को निकाला था।

भारतीय वायु सेना ने सुपर हरक्यूलिस विमान की खरीद के लिए पहला आदेश 2007 में दीया था। इस समय भारतीय वायु सेना में 12 की संख्या में C130j सुपर हरक्यूलिस विमान मौजूद हैं। इसकी सबसे खतरनाक ऊंचाई पर लैंडिंग 2013 में की गई, जो कि 40.41 मीटर के पंखों के साथ 34.37-मीटर-लंबी थी।

सबसे ऊंचाई वाले क्षेत्र दौलत बेग ओल्डी लद्दाख में सुपर हरक्यूलिस विमान 2013 में लैंड हुआ था। दौलत बेग ओल्डी समुद्र तल से 16614 फिट ऊंचाई पर स्थित है। 

Post a Comment

Previous Post Next Post