तीनों कृषि कानून रद्द होने के बाद, छोटे किसान फिर बिचौलियों के शिकंजे में क्या।

आज पीएम मोदी जी अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया है। यह तीनों कृषि कानून लोक सभा से 17 सितंबर और राज्य सभा से 20 सितंबर को पास हुए थे। राष्ट्रपति ने इन तीनों कृषि कानूनों पर 27 सितंबर 2020 को हस्ताक्षर किए थे। हालाकि नवंबर महीने से ही तीनों कृषि कानूनों का कुछ किसान संगठनों ने विरोध करना शुरू कर दिया था और वह सब दिल्ली की सरहदों पर इकठ्ठा होने भी शुरु हो गए थे।




आज 19 नवंबर को पीएम मोदी ने गुरू पर्व के अवसर पर तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया है। जिससे एक राजनीतिक संदेश भी गया है। जो भारतीय जनता पार्टी के लिए शुभ हो सकता है। पंजाब में बीजेपी पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के साथ गठबंधन कर चुनाव लडने की पुरी पुरी संभावनाएं हैं। जिससे बीजेपी को इसका फायदा होगा और कांग्रेस को इसका सबसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। तीनों कृषि कानूनों की वापसी आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। क्यों कि यह दोनों पार्टियां तीनों कृषि कानूनों के सहारे पंजाब में अपनी सरकार बनाने की योजना बना रही थी। लेकिन अब अमरिंदर सिंह पंजाब में सबसे बडे़ खिलाड़ी बन सकतें हैं।


पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानूनों पर विस्तृत रूप से देश की जनता को बताया।


1. उन्होने तीनों कृषि कानूनों के बारे में कहा कि बरसों से देश के किसानों, कृषि विशेषज्ञों, देश के किसान संगठनों की मांग रहीं थीं। जिस कारण से ये तीनों कृषि कानूनों लाए गए थे। 


2. पीएम मोदी ने राष्ट्र नाम संबोधन में कहा कि तीनों कृषि कानून किसानों की स्थिति को सुधारने के लिए लाए गए थे।जिनका मकसद देश के किसानों को, खासकर छोटे किसानों को मजबूत बनाना था। जिससे छोटे किसानों को उनकी उपज की सही कीमत और उपज बेचने के ज्यादा विकल्प मिल सकें।


3. उन्होंने कहा कि इतनी पवित्र बात, पूर्ण रूप से शुद्ध, किसानों के हित की बात, हम अपने प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को समझा नहीं पाए। कृषि अर्थशास्त्रियों ने, वैज्ञानिकों ने, प्रगतिशील किसानों ने भी उन्हें कृषि कानूनों के महत्व को समझाने का भरपूर प्रयास किया।


4. पीएम मोदी ने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में आगे कहा कि हमारी सरकार, किसानों के कल्याण के लिए, खासकर छोटे किसानों के कल्याण के लिए, देश के कृषि जगत के हित में, देश के हित में, गांव गरीब के उज्जवल भविष्य के लिए, पूरी सत्य निष्ठा से, किसानों के प्रति समर्पण भाव से, नेक नीयत से ये तीनों कृषि कानून लेकर आई थी। 


5. पीएम मोदी ने तीनों कृषि कानूनों के बारे में कहा कि आज मैं देश की जनता को बताने आया हूं कि सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस महीने के अंत में शुरू हो रहें संसद सत्र में, तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की संवैधानिक प्रक्रिया को पुरा कर दिया जायेगा।


कृषि कमेटी गठित करने का ऐलान


हालाकि पीएम मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया है। लेकिन उसी के साथ एक कृषि कमेटी भी गठित करने का ऐलान किया है। जो एमएसपी को और अधिक प्रभावी बनायेगी तथा ऐसे सभी विषयों पर, भविष्य को ध्यान में रखते हुए, निर्णय लेने के लिए, एक कमेटी का गठन किया जाएगा। जिस कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकार के प्रतिनिधि, किसान, किसान वैज्ञानिक और कृषि अर्थशास्त्री शामिल होगें।


जीरो बजट खेती


प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी ने देश के किसानों को जीरो बजट की कृषि के गुणों के बारे में बताया। जिसमें उन्होंने कहा है कि आज ही सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़ा एक और अहम फैसला लिया है। जिसमें सरकार ने जीरो बजट खेती यानि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देगी। जीरो बजट खेती देश की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर क्रॉप पैटर्न को वैज्ञानिक तरीके से बदलन के लिए जरूरी है।


कृषि कानूनों से संबंधित घटनाएं


1. कृषि कानूनों के नाम पर देश में बहुत ज्यादा राजनीति हुईं हैं। जिसमें 26 जनवरी 2020 की सबसे ज्यादा गलत घटना हुईं थीं। जिसमें कुछ किसान संगठनों से संबंधित लोगों ने दिल्ली के लाल किला पर तिरंगे के स्थान पर धार्मिक झंडा फहरा दिया था। जिसका सबसे बड़ा कारण था कि कुछ प्रदर्शकारियों ने पुलिस के द्वारा तय मार्ग पर नहीं चलना था और वह दूसरे मार्ग के अवरोधक को तोड़ते हुए दिल्ली के लाल किला पर पहुंच गए थे।


2. 18 जून को टिकरी विरोध स्थल के पास 42 वर्षीय झज्जर, हरियाणा के मुकेश नाम के व्यक्ति को जिंदा जला देने की घटना।


3. सिंधू धरना प्रदर्शन के स्थल पर निहंगों के द्वारा 30 वर्षीय दलित लखबीर सिंह  को बड़ी बेदर्दी से मारने की घटना। यह घटना 15 अक्टुबर को घटित हुई थी। जिसमें सरबजीत सिंह नाम का निहंग मुख्य आरोपी है।


4. एक औरत मोमिता बसु की टिकरी बॉर्डर से लाश के मिलने की घटना। जो पश्चिम बंगाल से किसान आंदोलन में शामिल होने आई थी। मोमिता बसु  के पिता ने पुलिस को बताया था कि उसकी बेटी के साथ रेप हुआ था।


5. 3 अक्टुबर की लखीमपुर खीरी की दुखद घटना। जो किसानों और बीजेपी नेताओं के संघर्ष का कारण थीं। जिसमें 4 किसान, 1 स्थानीय पत्रकार और 2 से 3 बीजेपी कार्यकर्ता मारे गए थे।


6. कृषि आन्दोलन का हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान ने भी पुरा फायदा उठाने की कोशिश की है। जिसकी साजिश पंजाब में दिखने भी लगी थी। जो पंजाब में फिर से एक बार आतंकवाद को बढ़ावा देने की फिराक में रहता है। हालाकि वह अपने इस उद्देश्य में कभी सफल नहीं हो सकता है। इस आंदोलन में चीनी सरपरस्ती वाले वामपंथियों ने जम कर आग लगाई है। जिन्होंने चीन और भारत युद्ध के समय भारतीय सेना का साथ न देकर चीन का साथ दिया था।

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