भारतीय नेवी में भारत की सबसे शक्तिशाली डेस्ट्रॉयर शामिल हुईं, जानें चीन और अमेरिका के डेस्ट्रॉयर के बारें में भी।

भारत सरकार अपनी सेना के तीनों भागों स्थल, वायु, और नेवी  को शक्तिशाली बना रही है। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण एक नया डेस्ट्रॉयर्स है। जिसको भारत के रक्षामंत्री ने देश को समर्पित किया है। रक्षामंत्री राजनाथ ने 21 नबंबर, 2021 को नेवल डॉकयार्ड, मुंबई में अपनी उपस्थिति में  INS विशाखापत्तनम विध्वंसक (Destroyer) को भारतीय नेवी में शामिल कराया है। 

हालाकि P-15B श्रेणी के कुल 4 विध्वंसक  बनाये जानें हैं। जिसमें INS विशाखापत्तनम नाम का डेस्ट्रॉयर 21 नवंबर, 2021 को भारतीय नेवी में कमीशन हो चुका है। इसको पहली बार लॉन्च 20 अप्रैल 2015 को किया गया था। शेष बचे 3 विध्वंसक आईएनएस मोरमुगाओ, आईएनएस इंफाल, आईएनएस सूरत को 2022 से 2025 तक भारतीय नेवी में शामिल कर लिया जायेगा। जिनमें आईएनएस मोरमुगाओ, आईएनएस इंफाल को बना लिया गया है। लेकिन INS सूरत अभी निर्माण की प्रक्रिया में है। जिसको 2025 तक नेवी में शामिल किया जायेगा।

INS विशाखापत्तनम भारत का सबसे शक्तिशाली डेस्ट्रोयर है। यह विशाखापत्तनम-श्रेणी या पी -15 ब्रावो -श्रेणी का विध्वंसक है। जो एक P-15B स्टील्थ गाइडेड मिसाइल  विध्वंसक का एक वर्ग है। जिसको वर्तमान में भारतीय नेवी की जरुरतों के हिसाब से बनाया गया है। P-15B विध्वंसक को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई  द्वारा बनाया गया है। 

आईएनएस विशाखापत्तनम विध्वंसक की कुल लंबाई 163 मीटर और  चौड़ाई 17 मीटर है। यह एक भारी भरकम  विध्वंसक है। जिसका वजन 7,400 टन है। P-15B विध्वंसक में  4 शक्तिशाली गैस टर्बाइन लगीं हुईं हैं। जिनकी ताकत से यह 30 समुद्री मील से अधिक गति प्राप्त करने में सक्षम है। इसके अलावा इसमें आधुनिक रडार भी लगा हुआ है। जो जहाज के तोपखाने की हथियार प्रणालियों को लक्ष्य का सटीक डेटा प्रदान करता है। 

अगर इसमें लगें हथियारों की बात करें तो भारत की सबसे खतरनाक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का नेवल संस्करण लगा हुआ है। जो पलक झपकते ही किसी भी जहाज या जमीन के लक्ष्य को भेदकर बर्बाद कर सकता है। जिस कारण से यह विध्वंसक ओर ज्यादा शक्तिशाली बन जाता है। इसके अलावा इसमें सतह से सतह मार करने वाली बराक 8 मिसाइल भी लगीं हुईं है। जिसके द्वारा किसी भी बंदरगाह या समुद्र के तट पर स्थित शहरों को तबाह किया जा सकता है।

आईएनएस विशाखापत्तनम में  कुछ देशी उपकरण भी लगें हैं। जिनमें कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, टॉरपीडो ट्यूब लॉन्चर रॉकेट लॉन्चर, फोल्डेबल हैंगर डोर्स, इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम, ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम, हेलो ट्रैवर्सिंग सिस्टम, क्लोज-इन वेपन सिस्टम और सोनार शामिल हैं।

अगर हम दुनिया की सबसे शक्तिशाली विध्वंसक जहाज की बात करें। तो वह अमरीका के पास है। यह Zumwalt वर्ग की डेस्ट्रॉयर है। जिसको दुनिया का सबसे मंहगा विध्वंसक जहाज भी कहा जाता है। यूएसएनआई न्यूज न्यूज के अनुसार DDG-1000 मॉडल की कीमत 4.2 बिलियन डॉलर है। जबकि भारतीय INS विशाखापत्तनम विध्वंसक की कीमत मात्र 1.2 बिलियन डॉलर है। 

अमेरिका के विध्वंसक जहाज बहुत ही आधुनिक युग के होते हैं। हम इस बात से अनुमान लगा सकते हैं कि अमेरिका ने अपने विध्वंसक जहाजों की रिसर्च पर 22 बिलियन डॉलर खर्च किए हैं। अमेरिकन नेवी के विध्वंसक जहाज की डिजाईन के तरह के विध्वंसक भारत, चीन और रूसी नेवी में नहीं देखने को मिलेंगे। क्योंकि अमेरिका के विध्वंसक जहाज की डिजाइन वर्तमान पीढ़ी से आगे की है।  जिसमें मिसाइल छुपे रहते हैं। जिससे दुश्मन देश सैटेलाइट से भी इसमें लगीं मिसाइलों को देख नहीं पाता है।


Zumwalt वर्ग के अमेरिकन डेस्ट्रॉयर का वजन 15000 टन से अधिक होता है। जो आम डेस्ट्रॉयर से कहीं ज्यादा है।   अमेरिका कुल 32 डेस्ट्रॉयर बनाना चाहता है। जिनमें मात्र अभी 3 ही बनीं हुईं हैं। जबकि चीन डेस्ट्रॉयर के मामले में अमेरिका और भारत से बहुत आगे है। अभी चीन की नौसेना के पास कुल 40 डेस्ट्रॉयर हैं। जिनका वजन 13000 टन है। जबकि भारत के पास अभी कुल 10 डेस्ट्रॉयर हैं और उनका वजन 7500 टन के करीब है। इसलिए भारत  की नौसेना में करीब 20 डेस्ट्रॉयर  होनी चाहिए। जिनका वजन 12 से 15 हजार टन के बीच हों। 

हालाकि पाकिस्तान डेस्ट्रॉयर के मामले में भारत से बहुत दूर है। जिसके पास अभी वर्तमान में कुल 2 चालित डेस्ट्रॉयर हैं।  ये दोनों पाकिस्तानी नेवी की डेस्ट्रॉयर 1969 से 1975 के बीच बनी थीं। जिनका वजन 3500 टन है। जबकि इससे भारी भरकम भारत की एक फ्रिगेट्स होती है। 

विध्वंसक जहाज क्या है?

विध्वंसक जहाज एक अधिक शक्तिशाली उच्च-रिज़ॉल्यूशन रडार लैस और अधिक दूरी तक मार करने वाले लड़ाकू जहाज होतें हैं। जिनकी शक्ति एक फ्रिगेट्स से कई गुना अधिक होती है। जिसमें बड़ी संख्या में मिसाइल तैनात होती हैं। यह युद्ध में मिसाइल डिफेंस के रुप में सुरक्षाबलों को सहायता करते हैं।  अगर किसी देश पर वास्तव में बड़ा हमला करना है तो वह हमला विध्वंसक जहाज से किया जाता है।

जबकि फ्रिगेट (युद्ध पोत) विध्वंसक (Destroyer ) से कम शक्तिशाली होते हैं। जिनका वजन 3500 टन के करीब होता है। दूसरी तरफ एक विध्वंसक का वजन 7500 से टन से लेकर 15000 टन तक होता है। 


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