जोए बाइडेन ने लोकतन्त्र पर वर्चुअल सम्मेलन बुलाया, जिसमें ताइवान को भी विशेष आमंत्रण भेजा।

अमेरिकी राष्ट्रपति जोए बाइडेन ने 9 से 10 दिसंबर तक लोकतंत्र पर संवाद करने के लिए एक वर्चुअल सम्मेलन को आमंत्रित किया है। जिसमें दुनिया के सभी महत्वपूर्ण लोकतान्त्रिक देशों को आमंत्रण दिया गया है।


अमेरिका का लोकतंत्र पर वर्चुअल सम्मेलन खास है। क्योंकि इसमें दुनिया के 110 लोकतान्त्रिक देशों को आमंत्रण दिया गया है। लेकिन इसमें कम्यूनिस्ट देश चीन को नहीं बुलाया गया है। जबकि ताईवान को अमेरिका के विदेश मंत्रालय द्वारा आमंत्रण भेजा गया। जिससे चीन और अमेरिका के रिश्ते फिर तल्ख़ हों सकते है।


चीन के अलावा रूस को भी अमेरिका ने इस सम्मेलन में शामिल होने का आमंत्रण नहीं दिया है। क्यों कि अमेरिका और पश्चिमी देशों को ऐसा लगता है कि रूस में कोई लोकतन्त्र नही है। 

तुर्की को आमंत्रण नहीं

इस सम्मेलन की सबसे खास बात है कि अमेरिका ने नाटो के सदस्य देश तुर्की को आमंत्रित देशों की सूची से गायब रखा है। जिसके ढेर सारे कारण हैं। जिनमें से एक कारण रूस और तुर्की की बढ़ती नजदीकी भी है। क्योंकि तुर्की ने रूस से S 400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदा है। जिस वजह से अमेरिका ने तुर्की पर प्रतिबंध भी लगा रखें हैं। 



अफगानिस्तान को अकेला छोड़ा


अमेरिका ने अफगानिस्तान को भी लोकतन्त्र पर होने जा रहे सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया है। जिसका कारण है कि अफ़ग़ानिस्तान अब एक लोकतान्त्रिक देश नहीं रहा है। अब वहां एक इस्लामी कट्टरपंथ और आतंकवादी संगठन तालीबान की सरकार है। जिसको दुनिया में अभी तक किसी भी देश ने मान्यता नहीं दी है।

भारतीय उपमहाद्वीप से शामिल होने वाले देश

अमेरिका ने भारतीय उपमहाद्वीप से श्रीलंका, बांग्लादेश, और अफ़ग़ानिस्तान को लोकतन्त्र पर 'संवाद' करने के लिए वर्चुअल सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रण नहीं दिया है।  जबकि भारत और पाकिस्तान दोनों को अमेरिका ने आमंत्रण भेजा है। इसके अलावा ईराक को भी 110 देशों की सूची में स्थान दिया है।


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