चीन ने सीडीएस विपिन रावत के बयान का विरोध किया, जिसमें सीडीएस ने चीन को भारत की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था

चीन ने भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ के बयान का विरोध किया। दरसल भारत के सीडीएस विपिन रावत ने कुछ दिनों पहले एक बयान दिया था। जिसको देश और विदेश की मीडिया ने कवर किया था। जिसमें उन्होंने ऐसा कुछ कहा कहा था। जिससे चीन को मिर्ची आवश्य ही लगनी थी। 

भारतीय चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ विपिन रावत




सीडीएस का बयान

सीडीएस विपिन रावत ने चीन पर दिए अपने बयान में कहा था कि पाकिस्तान अब भारत के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा नहीं रहा है। लेकिन चीन भारत के लिए सुरक्षा की दृष्टि से सबसे बड़ा खतरा है और पिछले वर्ष अपनी विवादित हिमालयी सीमा को सुरक्षित करने के लिए भारत ने जिन हजारों सैनिकों और हथियारों को तैनात किया था, अब वे एक लंबे समय तक बेस में नही लौट पाएंगे। सीडीएस ने आगे कहा था कि भारत और चीन दोनों परमाणु हथियारों से लैस पड़ोसी हैं। जिनके बीच सीमा विवाद को सुलझाने में 'विश्वास' की कमी और बढ़ता 'संदेह' आढ़े आ रहा है।

चीन का सीडीएस के बयान पर अधिकारिक तौर पर विरोध जताना

चीनी रक्षा मंत्रालय के  प्रवक्ता सीनियर कर्नल वू कियान ने एक ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में सीडीएस विपिन रावत के बयान का विरोध किया। जिसमें उन्होंने कहा कि भारतीय अधिकारी बिना किसी कारण के तथाकथित चीनी सैन्य खतरे पर अटकलें लगातें हैं, जो भारत और चीन दोनों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन का गंभीर उल्लघंन है। भारत के सीडीएस का बयान भू-राजनीतिक टकराव को भड़काना, गैर-जिम्मेदार और खतरनाक है। 


कर्नल वू कियान ने आगे कहा कि चीन की भारत चीन सीमा को लेकर स्थिति एकदम स्पष्ट है। चीनी सीमा सुरक्षा बल राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए दृढ़ हैं और चीन सीमा क्षेत्र में अपनी ओर से शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम सीमा पर डी एस्केलेशन के लिए तैयार हैं।

भारत के सीडीएस का बयान विदेश मंत्रालय से मिलता जुलता

सीडीएस विपिन रावत का बयान भारत के विदेश मंत्रालय के बयान से मिलता जुलता है। उनकी टिप्पणी भारत के विदेश मंत्रालय ने उन क्षेत्रों में नए चीनी निर्माण की आलोचना की थी। जिन पर दोनों देशों का दावा रहा है। इन सभी क्षेत्रों पर चीन ने 1959 के बाद से अवैध कब्जा कर रखा है। जिस पर चीन ने अपने गांव वसा लिए हैं और अपने आम लोगों के साथ साथ चीनी सेना को वहां ठहरा रहा है। चीन इस तरह का काम केवल कुछ जगहों पर नहीं कर रहा है। बल्कि वह पूरी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर निवास हेतु निर्माण कार्य कर रहा है। इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए सीडीएस ने अपना बयान दिया था।

पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस 

अटल बिहारी वाजपेयी में रक्षामंत्री रहे जॉर्ज फर्नांडीस ने 23 वर्ष पहले ही बता दिया था कि चीन भारत के लिए संभावित खतरा है। जिसके लिए उन्हें चीनी समर्थकों और हमदर्दों  की आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा था। 


हालाकि उनका यह बयान 1998 की कारगिल युद्ध के कारण दब गया था। क्योंकि उनके इस बयान के तुरन्त बाद पाकिस्तान ने कारगिल की चोटियों पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया था। जिस कारण से भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध की शुरुआत हो गई थी।


पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस अटल बिहारी वाजपेयी के दोनों कार्यकालों (मार्च 1998-मार्च 2001 और अक्टूबर 2001-मई 04) में भारत के एक प्रभावशाली रक्षामंत्री रहें थे। जॉर्ज फर्नांडीस ने रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। आज से करीब 23 वर्ष पहले चीन को भारत की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताना ही उनकी दूरदर्शिता को प्रदर्शित करता है। 

एशिया में चीन के प्रभाव रोकने वाली इकलौती शक्ति भारत

भारत ही एशिया महाद्वीप अकेला देश है। जो चीन का सैन्य तौर पर मुकाबला कर सकता है। जापान और आसियान देश चीन का मुकाबला नहीं कर सकते हैं। क्योंकि चीन ने जापान और दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया से उलझा रखा है। जबकि वियतनाम और दुसरे दक्षिण चीन सागर के देशों को चीन ने अपनी नौसैनिक शक्ति के दम पर कुचल दिया है। दुसरी तरफ रूस चीन पर आर्थिक तौर पर निर्भर बन गया है। जिस कारण से चीन को रूस के विरोध का डर नहीं रहा है।


एशिया महाद्वीप में भारत ही अकेला देश है, जो चीन को हर क्षेत्र में कड़ी चुनौती दे रहा है। खासकर कोरोना वायरस आने के बाद चीन की स्थिति दुनिया में कमजोर हुईं है और भारत ने अपनी स्थिति को मजबूत किया है। चीन को डर है कि ताइवान पर कब्जे के दौरान भारत चीन के खिलाफ़ तिब्बत बॉर्डर से एक फ्रंट खोल सकता है। चीन को यह बात ठीक से मालूम है कि भारतीय सेना युद्ध कौशल में परांगत है, जो पलक झपकते ही दुश्मन देश को बर्बाद कर देंगी। 


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