पेंटागन की रिर्पोट के अनुसार, चीन एक हजार परमाणु बॉम्ब के साथ विश्व युद्ध की तैयारी कर रहा

पेंटागन ने हाल ही में एक रिर्पोट जारी की है। जो करीब 193 पेजों की एक विस्तृत रिपोर्ट है। जिसमें चीन की निकट भविष्य की खतरनाक चालों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें चीन द्वारा दुसरे देशों में सैन्य बेस बनाने, परमाणु हथियारों की संख्या को बढ़ाने और भारत के साथ सैन्य संघर्ष के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है। 


पेंटागन ने एक रिर्पोट को यूएस कांग्रेस (Parliament) में रखी है। जिसको उसने "चीन के जनवादी गणराज्य को शामिल करते हुए सैन्य और सुरक्षा विकास"  (military and security devlopment involving the people's republic of China)  नाम दिया है। 


पेंटागन ने इस रिर्पोट के पहले पेज पर ही लिखा है कि चीन अपने आप को अमेरिका के खिलाफ़ एक प्रतिद्वंदी की तरह देख रहा है। जिसका सीधा मतलब है कि चीन दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बनना चाहता है और इस उद्देश्य के लिए चीन ने 2049 की समय सीमा तय कर रखी है। अर्थात चीन अमेरिका को विश्व की महाशक्ति के पद से हटाकर खुद को  2049 तक धरती ग्रह का सबसे शक्तिशाली देश बन जाना चाहता है। 


लेकिन इससे पहले चीन अपनी सेना को अमेरिका की तरह आधुनिक बनाना चाहता है। जिसके लिए चीन अपनी सेना का बड़ी तेजी से आधुनिकरण कर रहा है। जिस तरह अमेरिकी सेना में जवानों की संख्या कम है। लेकिन वह आधुनिक हथियारों से पूरी तरह से लैस हैं। जिससे उनकी मारक क्षमता सबसे अधिक है। चीन ने विश्व की सबसे आधुनिक और शक्तिशाली सेना बनाने की समय सीमा 2029 तय की है। जिसके वह सैन्य शक्ति में अमेरिका को पीछे छोड़ देगा और खुद सैन्य शक्ति के तौर पर विश्व की महाशक्ति बन जायेगा।

इस पेंटागन की रिर्पोट में चीन की विस्तारवादी खतरनाक सोच के बारे में भी बताया गया। जिसमें कहा गया है कि चीन 2049 तक अपनी विवादित भूमि को दूसरे देशों से युद्ध या दूसरे तरीकों से छीन लेगा और अपने देश में मिला लेगा। जिसको चीन बड़ी सोची समझी रणनीति के तहत करना चाहता है। चीन हिंद और प्रशांत महासागर में अपने खिलाफ़ बनने वाले गुटों को विफल कर देगा। जिससे वह इस क्षेत्र में सबसे शक्तिशाली देश बन जाएगा और आसानी से दूसरे देशों की जमीन को अपने देश में मिला लेंगे। इसमें भारत के अरुणाचल प्रदेश का नाम नहीं लिखा गया है। लेकिन चीन भारत के अभिन्न अंग अरुणाचल प्रदेश को भी तिब्बत का हिस्सा मानता है। अगर ऐसा है तो चीन भारत से इस राज्य को छीनने के लिए भविष्य में एक बडा युद्ध भी लड़ सकता है। जिसके लिए भारत को अभी से बड़े पैमाने पर तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।

पेंटागन ने अपनी इस रिर्पोट में यह भी खुलासा किया है कि चीन जैसे जैसे दूसरे देशों के खिलाफ़ आक्रामक होता जायेगा। वैसे वैसे उसके  उत्पादों का दुनिया में वहिष्कार होता जायेगा। जिसके कारण चीन का विदेशी बाजार उसके हाथों से खिसक जायेगा और उसके निर्यात में भारी गिरावट आयेगी। लेकिन चीन ने इसकी भी काट निकाल ली हैं। जिसके लिए चीन  "दोहरा संचलन" नाम की पद्धति का प्रयोग करेगा। इस पद्धति के अनुसार, चीन  सिर्फ अपने नागरिकों के लिए ही उत्पाद बनायेगा और उनकी खपत भी चीनी नागरिक कर लेंगे। अर्थात् चीन खपत आधारित अर्थव्यवस्था अर्थव्यस्था बन जायेगा। इससे यह होगा कि चीन आगे बढ़ता रहेगा। 


चीन यह जानता है कि अमेरिका भारत और दूसरी पश्चिमी ताकतें चीन को विश्व की फैक्ट्री ज्यादा समय तक नहीं रखेगी। चीन का विश्व की फैक्ट्री का तमगा भारत और वियतनाम जैसे हासिल कर लेंगे। इसलिए चीन अपनी  "दोहरा संचलन" की नीति लाना चाहता है।


पेंटागन ने अपनी इस रिर्पोट में सबसे ज्यादा खतरनाक खुलासा किया है कि चीन 2027 तक 700 परमाणु बम बना लेगा और 2030 तक इनकी संख्या 1000 तक पहुंच जायेगी। चीन इतने बड़े पैमाने पर परमाणु बॉम्ब बनाकर वह खुद का डेड हैंड बनाना चाहता है। जिसका सीधा मतलब है कि चीन अब एक विश्वस्तरीय युद्ध की तैयारी कर रहा है। जिससे यदि वह युद्ध में हार रहा होगा। तब चीन अपने डेड हैंड से एक साथ क़रीब 700 से ज्यादा परमाणु बॉम्ब दुनिया की अलग अलग जगहों पर फोड़ देगा। 


लेकिन चीन ने अमेरिका के इस आरोप पर कहा है कि अमेरिका की यह रिपोर्ट बेहद पक्षपात वाली है।


नॉट:

डेड हैंड सबसे पहले रसिया ने बनाया था। जिसमें रसिया का मानना था कि यदि उनके देश पर परमाणु बॉम्ब से हमला होता है तो रशिया अपने "डेड हैंड" का प्रयोग करेगा और पुरी दुनिया में एक साथ ढेर सारे परमाणु बॉम्ब को फोड़ दिया जायेगा। उस समय के रशिया का कहना था कि यदि हम नही जिंदा रहेगा। तो पुरी दुनिया कोई भी जिंदा नहीं रहेगा।  यहीं उद्देश्य चीन का भी है।


इस रिर्पोट में आगे कहा है कि चीन आने वाले समय में दूसरे देशों में अपने सैन्य बेस बनाना शुरू कर देगा। जिसमें ताजिकिस्तान, कंबोडिया, केन्या, शेसल्स, यूएई, इंडोनेशिया और पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं। हालाकि चीन का चीन से बाहर इकलौता सैन्य बेस अभी जिबूती में ही है।  जिनमें पाकिस्तान उसका हर विषम परिस्थितियों में (All weather Partner) साथ देने वाला देश होगा। इसलिए पाकिस्तान में शीघ्र ही चीन का कोई सैन्य बेस बन जायेगा। चीन पाकिस्तान का प्रयोग भारत को नियंत्रण में रखने के लिए करेगा। जिसके लिए चीन पाकिस्तान और भारत के बीच धार्मिक दुश्मनी का ज्यादा इस्तेमाल करेगा। 


यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि पाकिस्तान अब चीन का पिट्ठू बनकर रह गया है और अमेरिका के लिए खतरा बनता जा रहा है। क्यों कि चीन अमेरिका के लिए सीधा खतरा है और पाकिस्तान चीन का साथ देकर वह भी इस खतरे में वृद्धि कर रहा है। यदि निकट भविष्य में पाकिस्तान नहीं सुधरता है। तो हम निकट भविष्य में देखेंगे कि अमेरिका सहित दुसरी पश्चिमी ताकतें पाकिस्तान को गंभीर रुप नुकसान आवश्य पहुंचाएगी। 


इस पेंटागन की रिर्पोट की सबसे बड़ी खतरनाक बात भारत के लिए कहीं गईं हैं। कि वर्तमान में चीन और भारत की "लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल" पर सेना आमने सामने तैनात है। यहां पर पेंटागन की रिर्पोट कहती हैं कि चीन भारत से एलएसी पर संघर्ष के बहाने अपनी सेना और सैन्य अधिकारियों को बड़े युद्ध की तैयारी करा रहा है। ताकि यदि वह ताइवान के खिलाफ़ या भारत के खिलाफ़ ही बड़े पैमाने पर युद्ध करें। तो पीएलए की सेना और सैन्य अधिकारियों को कोई परेशानी न हो। 15 जून 2021 को गलवान वैली का सैन्य संघर्ष पीपल्स लिब्रेशन आर्मी का एक सोचा समझा परिणाम है। इस सैन्य संघर्ष से चीनी सेना को वास्तविक युद्ध का अनुभव करा दिया है। क्यों कि चीन को बडा युद्ध लड़े दशकों का समय बीत गया है और वह किसी भी बड़े युद्ध में  शामिल नहीं हुआ है। जबकि भारतीय सेना पाकिस्तान से 3 से ज्यादा युद्ध लड़ चुकी है।


इन सब बड़ी बातों के बाद पेंटागन की रिर्पोट में भारत और चीन के रक्षा बजट की तुलना की गई है। जिसमें भारत का रक्षा बजट 64.8 अरब डॉलर और चीन का 209 अरब डॉलर ही है। चीन भी यह मानता है कि एशिया में भारत ही ऐसा देश है। जो उसके प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है। जबकि जापान अभी सैन्य तौर इतना मज़बूत नहीं है कि वह चीन का सामान कर सकें। रूस चीन का इस समय आर्थिक पिट्ठू बन गया है। जो चीन के खिलाफ़ कभी नहीं जायेगा।

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