पीएम मोदी को जान से मारने की कोशिश करने वालों को एनआईए कोर्ट ने मौत की सजा दी

पीएम मोदी को 2013 में आतंकी संगठनों ने जान से मारने की कोशिश की थी। यह उस समय की बात है। जब पीएम मोदी 2013 में बीजेपी की ओर से "पीएम पद" के उम्मीदवार बने थे। पीएम उम्मीदवार बनने के बाद मोदी जी ने पूरे देश में प्रचार प्रसार कर रहे थे। लेकिन पीएम मोदी के प्रचार प्रसार को आतंकियों की बुरी नजर लग गई थी। 


इसलिए जब पीएम मोदी की 27 अक्टूबर 2013 में पटना के गांधी मैदान में हुंकार रैली थी। तब इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने उनको जान से मारने की कोशिश की। आतंकवादियों ने पटना के गांधी मैदान में 6 लगातार बॉम्ब धमाके किए थे। जिसमें 6 लोग मारे गए थे और लगभग 66 घायल हुए थे। हालाकि पीएम पद के उम्मीदवार "नरेन्द्र मोदी" को वहां से सुरक्षित निकाल लिया गया था।


पटना गांधी बॉम्ब ब्लास्ट की जांच भारत की राष्ट्रीय आतंकरोधी एजेंसी "एनआईए"  कर रहीं थीं। जिसने 10 लोगों को आरोपी बनाकर "एनआईए कोर्ट" में पेश किया था। इसी मामले में कोर्ट ने 10 आरोपियों में से एक को बरी कर दिया था और दूसरे 9 आरोपियों के बारे में निर्णय 1 नवंबर को सुनाने के लिए कहा था। 


आज 1 नवंबर 2021 को  एनआईए कोर्ट ने कुल 9 आरोपियों में से 4 को फांसी की सजा सुनाई है और 2 आरोपियों को आजीवन उम्र कैद की सजा सुनाई। इनमें से 2 को कोर्ट ने 10 वर्ष की सख्त सजा दी और 1 दोषी को 7 वर्ष की सजा सुनाई। यह सभी इस्लामी आतंकवादी इंडियन मुजाहिदीन संगठन से जुड़े हुए हैं। 


पटना के गांधी मैदान में हुए सिरियल बॉम्ब ब्लास्ट के आरोपियों सजा प्राप्त होने मे 7 वर्ष का लंबा समय लग गया है। एनआईए कोर्ट ने नोमान अंसारी , हैदर अली उर्फ अब्दुल्ला उर्फ ब्लैक ब्यूटी, मोहम्मद मोजिबुल्लाह अंसारी और इम्तियाज अंसारी  उर्फ आलम नाम के सभी चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इनमें दो  उमर सिद्धिकी और अजहरूद्दीन  को कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई। इन सभी के अलावा एनआईए कोर्ट ने  2 दोषियों अहमद हुसैन और फिरोज आलम उर्फ पप्पू को 10-10 वर्ष की सजा सुनाई। बचे एक दोषी को इफ्तिखार आलम को 7 वर्ष की सजा सुनाई है। लेकिन इफ्तिखार आलम की यह सजा पूरी हो गई है। इसलिए वह अब जेल से बाहर आ जायेगा। 


हालाकी एनआईए कोर्ट ने इन सभी आतंकवादियों को सजा के खिलाफ़ हाई कोर्ट जानें का अधिकार दिया है। लेकिन 30 दिनों के अंदर सभी आतंकियों को उच्च न्यायालय में अपील करनी होगी। अन्यथा एनआईए कोर्ट का यह आदेश लागू हो जायेगा। 


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