तुर्की अपने यार पाकिस्तान को एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से निकलने के चक्कर में खुद ग्रे लिस्ट में शामिल हो गया, भारत विरोध भी भारी पड़ा

आज शुक्रवार को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की तीन दिवसीय मीटिंग फ्रांस के पेरिस में हुईं थीं। जिसमें सभी 39 सदस्य देशों ने आतंकी गतिविधियों के लिए की जा रही धन की फंडिंग, काले धन को वैध बनाना जैसी महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा हुई थी और इसके लिए जिम्मेदार देशों को दंडित करना।

इसी मीटिंग में एफएटीएफ ने तीन देशों को आतंकी गतिविधियों के लिए धन की फंडिंग के कारण "ग्रे लिस्ट" में शामिल किया। जिसमें पाकिस्तान के साथ उनका सबसे अच्छा दोस्त तुर्की भी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट में शामिल हो गया है। इसके अलावा एक ओर देश जॉर्डन को भी आतंकी गतिविधियों में धन फंडिंग के लिए एफएटीएफ (FATF) ने अपनी ग्रे लिस्ट में डाल दिया है। तुर्की बतौर एक एफएटीएफ सदस्य के रूप में "ग्रे लिस्ट" में शामिल हुआ है।

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने अपने बयान में बताया कि तीन देशों को एफ ए टी एफ की ग्रे लिस्ट में शामिल किया जाता है। ये सभी देश फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के साथ एक कार्य योजना पर सहमत हुए हैं तथा जब एफएटीएफ के कार्य योजना को पूर्ण कर देगे। तो इन सभी देशों को ग्रे लिस्ट से हटा दिया जाएगा। लेकिन यदि कोई भी देश FATF की कार्य योजना लागू करने में सफल नहीं होता है। तो वह देश आगे भी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट में शामिल रहेगा।

तुर्की का ग्रे लिस्ट में शामिल होना बड़ा आश्चर्य जनक है। क्योंकि तुर्की के पाकिस्तान के साथ बहुत ही मधुर संबंध हैं। लेकिन तुर्की यह भूल गया था कि उसका साथी पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट में सन 2018 से ही शामिल है। जिसको एफ ए टी एफ ने आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने और अपने पाले हुए आतंक की सहायता से दूसरे पड़ोसी देशों में आतंकी गतिविधियां संचालित करवाना। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को 32 बिंदु दिए थे। जिनको पाकिस्तान को पूर्ण करने थे। लेकिन पाकिस्तान 2018 से ही एफएटीएफ के 32 में से कुछ ही बिंदुओं पर खरा उतर पाया है और दूसरे अधिकतर बिंदुओं पर पाकिस्तान कार्यवाही करने में विफल रहा है। 

पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में शामिल रहने से 2018 से 2021 तक पाकिस्तानी इकोनॉमी को करीब 30 बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ है और पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बहुत ही नाजुक बन चुकीं हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान की इकोनॉमी को 51.6 अब पाकिस्तानी रुपयों की जरूरत है और यदि ऐसा नहीं हुआ है। तो पाकिस्तानी इकोनॉमी तहस नहस भी हो सकती है। क्यों कि इस समय पाकिस्तान की मुद्रा 160 रूपए प्रति डॉलर तक गिर गई है और इसके गिरने की रफ्तार धीमी नही पड़ी है। पकिस्तान के पास बांग्लादेश से भी कम करीब 16 बिलियन डॉलर तक का ही विदेशी मुद्रा भंडार ही है। 

पाकिस्तान की आर्थिक हालत गंभीर होती जा रही है लेकिन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के द्वारा दिए गए 32 बिंदुओं पर पाकिस्तान कार्यवाही करने में विफल हो गया। इसी के साथ पाकिस्तान अपनी आतंक की फैक्ट्री का विकास कर रहा है। जिसका प्रयोग पाकिस्तान एक हथियार के रूप में अपने पड़ोसी देशों में कर रहा है।

पाकिस्तान का मित्र तुर्की भी आतंकी गतिविधियों में संलिप्त पाया गया है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने तुर्की को आंतकवाद के लिए फंडिग व मनी लांड्रिंग करने का दोषी ठहराया है। जिसके चलते तुर्की को एफ ए टी एफ कि ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया है। तुर्की को एफएटीएफ ने दो महत्व पूर्ण मामलों में दोषी पाया गया है। तुर्की आतंकी संगठनों को फंडिंग कर रहा है और इसी के साथ वह मनी लांड्रिंग में भी शामिल पाया गया है। 

तुर्की के ग्रे लिस्ट में शामिल हो जानें से तुर्किश इकोनॉमी बहुत ही खराब असर पड़ेगा। क्योंकि तुर्की की अर्थव्यवस्था वर्तमान समय में अपने बुरे दौर से गुज़र रही है। अब इसका बुरा असर इनकी मुद्रा लीरा पर भी पड़ेगा और इसी के साथ इनको विश्व बैंक और एशियन विकास बैंक से ऋण मिलना भी मुश्किल हो जायेगा। तुर्की अपने बॉन्ड जारी करेगा। तब भी वह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसका राजनीतिक प्रभाव भी तुर्की पर अवश्य पड़ने वाला है। क्यों कि तुर्की में 2023 में आम चुनाव होने वाले हैं और तुर्की के ग्रे लिस्ट में शामिल हो जानें से तुर्की में एर्दोगान की स्थिति तुर्की में कमजोर जीती जा रही है। इसका परिणाम यह भी हो सकता है कि एर्दोगान अगले आम चुनाव में हार जाएं।

एर्दोगान ने भारत का कश्मीर मुद्दे पर खुलकर विरोध किया था और पाकिस्तान का समर्थन किया। जिसके लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के खिलाफ अनाप शनाप आरोप भी लगाए थे। वह वर्तमान समय में पाकिस्तान के आतंकी गतिविधियों में भी कुछ हद तक अब लिप्त पाए जा रहें हैं। 

जॉर्डन को भी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने ग्रे लिस्ट में डाल दिया है। क्योंकि एफ ए टी एफ को जॉर्डन के खिलाफ सबूत मिले हैं कि जॉर्डन आतंकी संगठनों को पैसा मुहैया करा रहा है।

माली एक पश्चिम अफ्रीका का चारों तरफ से भूमि से घिरा देश है। माली भी तुर्की, जॉर्डन देशों के साथ ग्रे लिस्ट में शामिल नया देश है। माली पर आरोप लगें हैं कि माली पश्चिमी अफ्रीका में इस्लामिक स्टेट जैसे खतरनाक आतंकवादी संगठन का समर्थन और फंडिग करता है। 

Post a Comment

Previous Post Next Post