शी जिनपिंग की सरकार ने चीनी लोगों से क्यों कहा, घरों में जुटा लें डेली जरूरतों के सामान

चीन में शी जिनपिंग की सरकार ने अपनी जनता को अजीब सलाह दी है। उन्होंने अपनी जनता से घरेलू प्रतिदिन उपयोग में आने वाली वस्तुओं को एकत्र कर लेने के लिए कहा। 

Credit twitter,चीन में सब्जियां खरीदता हुआ चीनी व्यक्ति

सब जानते हैं कि चीन में केवल "चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी" का शासन है और यदि चीनी पार्टी की "शी जिनपिंग सरकार" अपने लोगों से आम घरेलू सामानों को एकत्र करने के लिए कहें। तो वह कोई छोटी समस्या नहीं होगी। लेकिन चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी चीनी जनता को पूरी जानकारी कभी देती ही नहीं है। इसलिए चीनी जनता में भगदड़ से मची हुईं हैं। वह किराना की दुकानों से भर भर कर सामान अपने घरों में जुटा रहीं हैं। उनको 2019 का कोविड 19 लॉकडाउन अच्छी तरह से याद है। जिसकी यादें हर चीनी नागरिक को सहमा देती हैं। क्योंकि चीनी सरकार ने 2019 में इतना सख्त लॉकडाउन  लगाया था। जिसमें बहुत से लोगों को हद से ज्यादा तकलीफें हुईं थीं। उसी मंजर को देखते हुए। सभी चीनी लोग प्रतिदिन उपयोग में आने वाली वस्तुओं को एकत्र कर रहे हैं।


चीनी सरकार को चीनी लोगों से घरों में जरूरत के सामानों को एकत्र करने के लिए क्यों कहना पड़ा। क्या इसमें भी कोई चीन की शी जिनपिंग सरकार की बड़ी साजिश है या चीन में उत्पन्न कोई भयंकर  राजनीतिक उठापटक है। जिसको वह अपनी जनता से छुपाना चाहते हैं। हालाकि इन वजहों में से कोई भी वजह नहीं है। चीन में इस समय जो भी समस्याएं पैदा हुईं हैं। उनमें चीनी सरकार के कुप्रबंधन का नतीजा है। जिसमें वह खुद फंसती नजर आ रही है।

भारत में कभी सरकार के मुंह से ऐसा नही सुना होगा कि लोग जल्दी से जल्दी अपने घरों में जरूरत के सामान को एकत्र कर लें। कि भारत में खाद्य पदार्थों की कमी हों गईं है। ऐसा सिर्फ चीन में ही सकता है और जिसकी बड़ी वजह खाद्य पदार्थों की कमी भी है। हा आपने बिलकुल ठीक सुना है। इस समय चीन में खाने की कमी पड़ गईं हैं। जिसको लेकर चीनी सरकार परेशान है। यहां तक चीनी सरकार ने भारत से अपनी जरूरत का 45% चावल आयात किया है। इस वर्ष के अगस्त महीने तक भारत ने चीन को चीन के कुल चावल आयात का 45% निर्यात किया है। जिसकी बड़ी बात यह है कि भारत में इस  साल चावल की बंपर पैदावार हुईं है। जिससे भारतीय चावल पूरी दुनिया को बहुत ही सस्ता 345 डॉलर प्रति टन जाता है। 

चीन में खाद्यान्य की कमी का सबसे बड़ा कारण इस वर्ष चीन में आई भयंकर बाढ़ भी है। जिससे चीन का कृषि क्षेत्र बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ था। अगर चीन को ध्यान से अध्यन किया जाय तो चीन 2 हिस्सों में बंटा हुआ है। एक हिस्से में 94% जनसंख्या निवास करती हैं और दुसरे हिस्से में मात्र 6% जनसंख्या ही निवास करती है। चीन का 90% जनसंख्या वाला क्षेत्र ही कृषि के योग्य है और दुसरा बड़ा हिस्सा पहाड़, रेगिस्तान, पठार है। चीन को एक रेखा दो हिस्सों में बांटती है। जिसको हेइहे टेंगचांग रेखा रेखा (Heih Tenchang Line) कहतें हैं। 

चाइना में खाद्यान्य की कमी का सबसे बड़ा कारण कोयला भी है। क्यों कि चीन की सरकार आधिकारिक तौर पर यह माना था कि चीन में देश कोयले की कमी पड़ गईं हैं। जिसके कारण चीन के बहुत सारे शहरों में ब्लैक आउट भी हुआ था। लेकिन कोयले की कमी चीनी सरकार के कुप्रबंधन का परिणाम था। क्योंकि चीन की सरकार ने ऑस्ट्रेलिया का कोयला खरीदने से मना कर दिया था। जिसका कारण चीन और आस्ट्रेलिया की दुश्मनी है। चीन चाहता था कि आस्ट्रेलिया ताईवान, हॉन्गकॉन्ग और कोरोना वायरस के मामलों पर एकदम चुप रहें। लेकिन आस्ट्रेलिया ने चीन के दुश्मनों भारत, अमेरिका और जापान से हाथ मिला लिया। उधर आस्ट्रेलिया को जो कोयला चीन के लिए पड़ा था। उसको बड़ी चालाकी से भारत ने अच्छे दामों पर खरीद लिया। अब चीन के पास कोयले की समस्या भी गहरा गईं थीं। 

चीन ने आस्ट्रेलिया से अपनी दुश्मनी के कारण कोयले का आयात नहीं किया। इसके बदले में चीन ने डीजल से बिजली उत्पादन शुरु कर दिया। लेकिन यहीं फैसला चीन के लिए अब मुसीबत बन गया। क्योंकि इस समय चीन में डीजल की भी कमी हो गई। जिसका सीधा असर बड़े बड़े स्टोर घरों में जमा खाद्यान्य किराना स्टोर तक पहुंच ही नहीं पा रहें हैं। 

हालाकि चीन की शी जिनपिंग सरकार जिस समस्या को छोटा बता रहीं हैं। लेकिन असल में वह बहुत बड़ी समस्या होती है। जिसको चीनी जनता बखूबी जानती है। इसी वजह से वहां के लोगों में पैनिक है। 

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