पीएम मोदी ने जलवायु परिवर्तन पर हो रहे COP 26 वैश्विक सम्मेलन में विश्व को पांच अमृत तत्व दिए, पांचवे अमृत तत्व में भारत को बदल देने वाला एलान

पीएम मोदी इटली के रोम से सीधे यूके (यूनाइटेड किंगडम) के ग्लासगो में पहुंच गए थे। जहां उनको रविवार को जलवायु परिवर्तन पर हो रहे अंतरराष्ट्रीय Cop 26 के सम्मेलन को सम्बोधित करना था। अपनी इस दो दिनों की यात्रा के दौरान वह ब्रिटिश पीएम के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की है। 


आज सोमवार को पीएम मोदी ने भारत के प्रतिनिधि के रूप में Cop 26 जलवायु परिवर्तन के सम्मेलन में शामिल हुए और उन्होंने दुनिया के सभी देशों के प्रमुखों के सामने भारत का राष्ट्रीय विजन Cop 26 सम्मेलन में  रखा।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में COP 26 पर विश्व नेताओं के सम्मेलन में कहा है कि  जलवायु परिवर्तन पर हो रहे इस वैश्विक मंथन में, मैं भारत के प्रतिनिधि के रूप में 5 'अमृत तत्व ' पेश करना चाहता हूं।  उन्होंने इन "5 अमृत तत्व" को पंचामृत नाम भी दिया है। 

इसके बाद उन्होंने जलवायु परिवर्तन के मामले पर भारत का संदेश दुनिया को बताया। भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने पांच अमृत तत्व के बारे में Cop 26 जलवायु परिवर्तन के वैश्विक मंथन पर दुनिया को बताया। 

पीएम मोदी का पहला अमृत तत्व

उन्होने अपने पहले अमृत तत्व के बारे में विश्व को बताया कि भारत 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म ऊर्जा की क्षमता को 500 गीगावाट तक पहुंचाएगा। 

पीएम मोदी का दूसरा अमृत तत्व

इस दुसरे अपने अमृत तत्व में उन्होंने दुनिया के वैश्विक नेताओं के सम्मेलन में बड़ा ऐलान किया और दुनिया को बताया कि भारत 2030 तक अपनी ऊर्जा की जरूरत का 50% नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करेगा। 

पीएम मोदी का तीसरा अमृत तत्व

पीएम मोदी ने अपने तीसरे अमृत तत्व में भारत के द्वारा हो रहे कार्बन उत्सर्जन के बारे में बताया है। जिसमें उन्होंने कहा कि भारत अपने आज से लेकर 2030 तक कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में 1 बिलियन टन की कमी करेगा। 

पीएम मोदी का चौथा अमृत तत्व

उन्होंने अपने चौथे अमृत तत्व में भारतीय अर्थव्यस्था की ऊर्जा जरूरतों के बारे में बताया कि भारत 2030 तक अपनी अर्थव्यस्था की कार्बन तीव्रता को 45% से भी ज्यादा कम करेगा। अर्थात् भारत अपनी अर्थव्यस्था को कार्बन  पर से निर्भरता को ज्यादा से ज्यादा कम करेगा। 

पीएम मोदी का अंतिम पांचवा अमृत तत्व

भारत के पीएम मोदी ने अपने अंतिम अमृत तत्व में भारत के इतिहास का सबसे बड़ा एलान किया। उन्होंने अपने अंतिम अमृत तत्व रूपी वादे में दुनिया को बताया कि भारत 2070 तक कार्बन उत्सर्जन की दर को शून्य तक पहुंचा देगा। 

पीएम का यह अन्तिम एलान भारत के लिए बहुत महत्त्व पूर्ण है। क्योंकि जलवायु परिवर्तन का सबसे बुरा असर दुनिया में कहीं पड़ेगा। तो वह भारत में पड़ेगा। जिसको हम साधारण तरीके से समझ सकते हैं कि भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है। जहां जलवायु परिवर्तन के साथ साथ विषम परिस्थितियों का जन्म होता जायेगा। जैसे कि बेमौसम बारिश, अनेक प्रकार की बीमारियां, कृषि क्षेत्र में संकट, और बाढ़ जैसी बड़ी मुसीबतें भारत के मुहाने पर होगी। 

जलवायु परिवर्तन से पुरा भारतीय उपमहाद्वीप संकट में 

यह अकेले भारत में ही नहीं होगा। बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में जलवायु परिवर्तन का प्रकोप बरसेगा। क्यों कि यह क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के मामले में संवेदनशील है। जो 13 जैव विविधता वाले मंडलों का हिस्सा है और जब जलवायु परिवर्तन होगा। तब यहीं जैव विविधता वाला मण्डल बहुत ही बुरी तरह से संघर्ष करेगा।

भारत के पड़ोसी देशों में भी जनसंख्या ज्यादा होने के कारण जलवायु परिवर्तन को झेल नहीं पायेंगे। क्यों कि 2050 तक अगर जलवायु परिवर्तन को स्थिर नहीं किया गया। तो इस भारतीय उपमहाद्वीप के क्षेत्र के देशों में भयंकर भुखमरी, गरीबी, और बीमारियों का जाल सा बुना होगा। 

इन सभी देशों के पास इतना पैसा नहीं है कि यह प्राकृतिक आपदाओं को सहन कर सकें। हम कोविड 19 महामारी को ले सकते हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप कैसे इस बीमारी से ग्रस्त है। भारत को छोड़ दे। तो अभी तक किसी भी देश में कोविड 19 टीकाकरण 20% जनसंख्या का भी नहीं हुआ है। जबकि  इस क्षेत्र के कुछ देश कोविड 19 के कारण आर्थिक तौर पर बर्बाद हो गए हैं। 

अंतर्राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मुख्यालय 

यहीं कारण है कि भारत जलवायु परिवर्तन की मुहिम को अपने नेतृत्व में सबसे आगे चल रहा है। भारत ने अपने सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन के। लक्ष्य को 2 वर्ष पहले ही पुरा कर लिया है। इसी के साथ अंतर्राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मुख्यालय भारत के राज्य हरियाणा के शहर गुरग्राम में हैं। जिसमें संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी सदस्य देश शामिल हैं।

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