भारतीय आबादी में कमी का स्वर्णिम दौर शुरू हो चुका, इतिहास में पहली बार महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक हुई।। World Affairs gk in hindi

भारत के इतिहास का सबसे स्वर्णिम काल शुरू हो चुका है। जिस खुशखबरी को भारत के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) ने दी है। NHFS ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सर्वेक्षण किया है। उन्होंने अपने सर्वेक्षण बताया है कि भारत के इतिहास में पहली बार भारत की राष्ट्रीय जन्म दर  2.1 से नीचे आ गई है। जिसका सीधा संबंध है कि भारत की जनसंख्या में अब गिरावट शुरू हो चुकी है।


हाईलाइट

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण  ने भारत की जनसंख्या की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए 31 मार्च 2017 तक भारत के 707 जिलों में एक महत्वपूर्ण सर्वेक्षण किया था।  इस सर्वेक्षण में भारत के लगभग 6,10,000 घरों के नमूने लिए गए थे। जिस नमूने में महिलाएं 15 से 49 आयु वर्ग की थी और पुरूष 15 से 54 आयु वर्ग के थे।


भारत की प्रजनन दर का इतिहास

भारत की प्रजनन दर 1960 में 5.91 थी। जिसका सीधा मतलब है कि 1960 में भारत की हर महिला करीब 6 बच्चों को जन्म दे रहीं थीं। जबकि इसी समय भारत की कुल आबादी 45.05 करोड़ थीं। लेकिन 1960 के बाद 2011 तक भारत की जनसंख्या में 75.5 करोड़ की वृद्धि हुई है। भारत की जनसंख्या 1947 में 34 करोड़ थी। जो 2021 में 139 करोड़ हो गई है।

बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड चिन्ता का कारण

जबकि भारत की प्रत्येक महिला राष्ट्रीय स्तर पर 2 से कम बच्चों को जन्म दे रहीं हैं। जिससे यह साफ दिख रहा है कि भारत की जनसंख्या कमी की ओर अग्रसर है। हालाकि अभी भारत के बिहार (3), उत्तर प्रदेश (2.3) और झारखंड (2) चिंता का कारण बने हुए हैं। जहां की प्रजनन दर राष्ट्रीय स्तर से ऊपर है। इन सभी राज्यों में भारत सरकार को ज्यादा ध्यान देना चाहिए। क्यों कि भारत के दूसरे राज्य जनसंख्या के मामले में चिन्ता बिहीन बन चुके होगे। दुसरी तरफ उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे भारत के बड़े राज्य जनसंख्या के मामले में संघर्ष कर रहे होगें।

भारत की प्रजनन दर में गिरावट के कारण

भारत की प्रजनन दर में गिरावट के कारण भी NFHS ने गिनाएं हैं। जिसमें उन्होंने बताया है कि भारत के लोगों ने गर्भनिरोधक तरीकों को बड़े पैमाने पर अपना लिया है। इस सर्वे के अनुसार भारत के करीब 67% लोग संभोग क्रिया के दौरान गर्भनिरोधक तरीकों का उपयोग कर रहे हैं। जोकि एक अच्छा कदम है।

जबकि भारत की वर्तमान पीढी अब 2 से ज्यादा बच्चे पैदा नहीं करना चाहतीं हैं। वह 2 बच्चों को ही अच्छी तरह से पालना चाहते हैं। ताकि उनको अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य दिया जा सकें।

पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया

पॉपुलेशन फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया ने बताया है कि भारत की प्रजनन दर में कमी के बावजूद भारत की कुल जनसंख्या का आकार तुरंत कम नहीं होगा। देश जनसांख्यिकीय संक्रमण के परिणामस्वरूप जनसंख्या गति का अनुभव कर रहा है। भारत में  10 से 24 आयु वर्ग के युवाओं का अनुपात लगभग 30.9% है।  जोकि अब एक प्रजनन आयु वर्ग है और जल्द ही प्रजनन करेगा। भले ही यह समूह प्रति जोड़े एक या दो बच्चे पैदा करता है, फिर भी भारत कुल जनसंख्या में निश्चित तौर पर वृद्धि होगी।

पहली बार महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण ने अपने सर्वे में पाया है कि भारत के इतिहास में पहली बार महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। जिसके अनुसार वर्तमान में 1000 पुरुषों पर 1020 महिलाएं हैं। जिसका अर्थ है कि भारत में संतुलित लिंग अनुपात से 20 महिलाएं अधिक हैं।

पाकिस्तान और चीन

भारत के अलावा 1960 के दशक में चीन और पाकिस्तान की प्रजनन दर 5.76 व 6.60 थी। सन् 1960 में चीन की आबादी 66.71 करोड़ थी। लेकिन चीन 80 के शुरूआती दशक में एक बच्चा पॉलिसी लेकर आया था। जिससे चीन ने करोड़ों बच्चों को जन्म देने से रोक दिया। लेकिन चीन का वन चाइल्ड सिद्धांत एक श्राप सिद्ध हुआ। क्यों कि चीन में केवल एक बच्चा पैदा होने से बूढ़ों की संख्या में वृद्धि हुई। लेकिन युवा पीढ़ी कम होती गई। जबकि सब जानते हैं कि एक बार जनसंख्या कम होने लगे। तो उसे बढ़ाना बड़ा मुश्किल काम होता है।  चीन इस समय कम प्रजनन दर से गुजर रहा है। क्योंकि चीन के युवा एक से अधिक बच्चा पैदा ही नहीं करना चाहते हैं।

जबकि दूसरी तरफ भारत के पड़ोसी पाकिस्तान की प्रजनन दर 2019 में 3.45 थी। जिसके मुताबिक पाकिस्तान की हर महिला करीब 4 बच्चों को जन्म दे रहीं हैं। जिससे दुनिया अनुमान लगा रही है कि पाकिस्तान की जनसंख्या 2050 तक 40 से 50 करोड़ तक पहुंच जायेगी। क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान की जनसंख्या बहुत ज्यादा हो जायेगी। पाक इतनी बड़ी आबादी के लिए संसाधन कहां से लायेगा। जिससे भविष्य अनुमान लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान की जनसंख्या में गरीबी और भुखमरी का प्रकोप बरसेगा। यहां से आबादी का पलायन भारत, ईरान और दुसरे खाड़ी देशों में होगा। यह भारत के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा।

पश्चिम के देशों की प्रजनन दर और इसका हल

पश्चिम के देशों की प्रजनन दर विकासशील देशों से बहुत अधिक कम है। 2019 में अमेरिका में प्रजनन दर 1.70 और  इंग्लैंड की प्रजनन दर 1.65 थी। यह समस्या सभी पश्चिमी देशों की हैं।

लेकिन इन सभी पश्चिमी देशों के पास एक ट्रंप कार्ड है। जिससे ये अपनी कम प्रजनन दर की समस्या को बडी चतुराई से हल कर लेते हैं। सभी पश्चिमी देश खासकर अमेरिका भारत और चीन से बेहद कुशल लोगों को अपने यहां काम के लिए बुला लेता हैं। जिससे अमेरिका में काम करने वाले लोगों की संख्या कम नहीं पड़ती है और उनकी कम प्रजनन दर की समस्या भी हल हो जाती है। हालाकि अमेरिका केवल प्रतिभावान लोगों को ही अमेरिका में रहने का अधिकार देता है। 

भारत विशेष में जनसंख्या के बारे में रोचक तथ्य

1. भारत की जनसंख्या 1901 में जनसंख्या 23 करोड़ और स्वतंत्रता के समय 34 करोड़ थी।
2.भारत में दूनिया की तीसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी और दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम-अल्पसंख्यक आबादी रह रही है। Pew research Center के अनुसार, इस समय भारत में 20 करोड़ मुस्लिम आबादी है।
3. हिंदूओं की 94% आबादी भारत में निवास करती है। Pew Research Center के अनुसार, 2021 में, भारत में कुल हिंदू आबादी लगभग 103 करोड़ है। 
4. यूएन और प्यू की रिपोर्ट के अनुसार, 2050 में भारत की जनसंख्या 160 के करीब होंगी और 2100 तक यह घटकर मात्र 145 करोड़ ही रह जायेगी।
5. यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2027 तक चीन को आबादी के मामले में पीछे छोड़ देगा।
6.  भारत में 25 ब्रिटेन के बराबर जनसंख्या निवास करती है।

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