चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा, अरूणाचल प्रदेश के 15 स्थानों के नामों को चीनी भाषा में रख दिए

चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। जिसका ताजा उदाहरण अरुणाचल प्रदेश के मामले में निकल कर आया है। चीन ने भारत के अभिन्न अंग अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थानों का नाम बदल कर मंदारिन में रख दिए।

जिस पर चीन की सरकार के मुख्य पत्र ग्लोबल टाईम्स ने कहा है कि चीन ने संप्रभुता और इतिहास के आधार पर जांगनान (Zangnan) में 15 और स्थानों के नामों को बदला किया। ध्यान देने वाली बात है कि चीन अरूणाचल प्रदेश को जांगनान नाम से बुलाता है। जिसको चीन तथाकथित दक्षिण तिब्बत का हिस्सा मानता है। दरअसल अरूणाचल प्रदेश पर दो देश अपना कब्ज़ा बताते हैं, जिनमें एक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (ताईवान) और रिपब्लिक ऑफ चाइना (ताईवान) हैं। लेकिन ताईवान अब इस मामले पर कुछ नहीं बोलता है। 

चीन की मंशा

चीन एक विस्तारवादी देश है, जिसने कई देशों पर ताकत के दम पर कब्ज़ा कर रखा है। यहीं वह भारत के साथ करना चाहता है। इसी मंशा से चीन अरूणाचल प्रदेश के नदी, पहाड़ों और दूसरे प्रमुख क्षेत्रों के नाम बदल रहा है। जबकि सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि अरूणाचल प्रदेश के किसी भी स्थान का नाम मंडारिन भाषा में नहीं लिखा मिलता है। इस विषय पर भारत के विदेश मंत्रालय का साफ़ कहना कि अरूणाचल प्रदेश भारत एक अभिन्न अंग है।

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चीन द्वारा इन 15 स्थानों का नामकरण दलाई लामा की अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के बाद किया गया है।  चीन ऐसा भारत के राज्य पर अपना दावा करनेके लिए कर रहा है।  लेकिन राज्य के अधिकांश स्थानों को अतीत में चीनी नाम कर दिया गया है।

चीन द्वारा बदले गए कुछ नाम

नमकापुब री- भारत के जानकारों का मानना ​​है कि यह नाम संभवत: तवांग जिले में स्थित नमका चू का है।  नमका चू 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच सबसे खतरनाक लड़ाई का स्थान था।  

बुमो ला-  यह अ स्थान बुमला होगा।  यह तवांग से एलएसी पर से लगभग 37 किलोमीटर दूर स्थित है। बुमला की सड़क भी एक ऐतिहासिक मार्ग है।  इसी स्थान से 1962 के युद्ध के दौरान चीन ने भारत पर आक्रमण किया था।

कुछ विशेष

चीन ने 1962 के युद्ध के दौरान ज्यादातर अरूणाचल प्रदेश पर अपना कब्ज़ा कर लिया था और अस्थाई तौर पर अरूणाचल कुछ महीनों के लिए पीपल्स लिबरेशन आर्मी के   नियंत्रण में रहा था। हालाकि बर्फ और रसद के डर से चीन को अरूणाचल प्रदेश खाली करना पड़ा था।

अमेरिका और जापान का समर्थन

अमेरिका साफ तौर पर अरूणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा मानता है और यह उसने 6 दशक पहले ही कर दिया था। जबकि जापान के वर्तमान पीएम फ्यूमियो किशिदा (तत्कालिक विदेश मंत्री) अपनी 2015 की भारत  यात्रा के दौरान अरूणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा बताया था। जिसके बाद चीन जापान पर आगबबूला हो गया था।

भारत का बीजिंग विंटर ओलंपिक का समर्थन

भारत ने अभी हाल में ही बीजिंग विंटर ओलंपिक खेलों का समर्थन किया है। हर भारतीय को समझ नहीं आ रहा है कि जब चीन इस तरह की हरकतें कर रहा है तो हमें बीजिंग विंटर ओलंपिक खेलों के समर्थन की क्या जरूरत थी। भारत सरकार को अभी भी सोचना चाहिए और अपने सरकारी अधिकारियों को। बीजिंग ओलंपिक में नहीं भेजना चाहिए।

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